नई दिल्ली, 29 सितंबर 2026 : दिल्ली की ट्रायल कोर्ट की जज ने यौन अपराध की पीड़िता 10 वर्षीय बच्ची के लिए फैसला सुनाने के बाद एक विशेष पत्र लिखा है। इस पत्र में जज रजनी रंगा ने बच्ची की हिम्मत की सराहना करते हुए कहा कि अदालत उसका बचपन वापस नहीं ला सकती, मगर सच बताने और आरोपी की पहचान करने के उसके साहस को हमेशा याद रखेगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने अब इस पत्र को बच्ची और उसके परिवार तक पहुंचाने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने इसे ‘करेज नोट’ यानी साहस का संदेश बताया है। उत्तर-पश्चिम दिल्ली जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) को पत्र प्रिंट कर दो सप्ताह के भीतर बच्ची तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया है।

जज ने पत्र में बच्ची की हिम्मत की तारीफ की

जज रजनी रंगा ने पत्र की शुरुआत ‘डियर चाइल्ड’ से की। उन्होंने बच्ची के अदालत में आकर अपनी बात रखने और आरोपी की पहचान करने के साहस की सराहना की है। इस पत्र में कहा गया कि बच्ची ने चुप रहने के बजाय अपनी मां को घटना के बारे में बताया। अदालत के मुताबिक, उसके इस साहस से आरोपी के खिलाफ कार्रवाई संभव हुई और दूसरे बच्चों को संभावित नुकसान से बचाने में मदद मिली।

‘अब अपनी जिंदगी जियो, स्कूल जाओ, सपने देखो’

इस पत्र के अंत में जज ने बच्ची को आगे की जिंदगी पर ध्यान देने का संदेश दिया। उन्होंने उसे स्कूल जाने, दोस्त बनाने, हंसने, खेलने और सपने देखने के लिए प्रोत्साहित किया। जज ने यह संदेश भी दिया कि उसके साथ हुई घटना उसके पूरे भविष्य को तय नहीं करती। अदालत ने उसके साहस को महत्वपूर्ण बताया।

आरोपी को प्राकृतिक जीवन के बाकी समय तक जेल

मामला 23 जुलाई 2023 का है। उस समय बच्ची की उम्र सात साल थी। शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। बच्ची आरोपी को ‘अंकल’ कहती थी। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ गंभीर यौन अपराध के मामले में प्राकृतिक जीवन के बाकी समय तक कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा आपराधिक धमकी के मामले में भी अलग सजा और जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा दोनों सजाएं साथ चलने का आदेश दिया गया है।

बच्ची के लिए 10.50 लाख रुपये मुआवजा

ट्रायल कोर्ट ने पीड़ित बच्ची के लिए 10.50 लाख रुपये के मुआवजे का आदेश दिया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने डीएलएसए के सचिव से मुआवजे के भुगतान की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है। इस मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया हाईकोर्ट में जारी है। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में 29 सितंबर 2026 को निर्णय जारी होने की प्रविष्टि भी उपलब्ध है। आज इस पर कोर्ट की टिप्पणी आ सकती है।

दोषी की सजा पर तत्काल रोक से इनकार

दोषी की ओर से सजा पर तत्काल रोक और जमानत की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड और मामले से जुड़े साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए इस स्तर पर राहत देने से इनकार किया। मामले की अगली सुनवाई और अपील की प्रक्रिया अदालत के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ेगी।

बाल यौन अपराध के मामलों पर चिंता

एनसीआरबी के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में पॉक्सो कानून के तहत 1,553 मामले दर्ज हुए थे। यह आंकड़ा बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों की गंभीरता को दर्शाता है। इस मामले में अदालत का विशेष पत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें न्यायिक प्रक्रिया के साथ पीड़ित बच्ची के साहस और उसके भविष्य पर ध्यान देने का संदेश दिया गया है।