नई दिल्ली, 15 अगस्त 2026 : स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को राष्ट्र को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को नमन करते हुए देशवासियों को राष्ट्र-निर्माण का अहम भागीदार बताया। राष्ट्रपति ने विभाजन की त्रासदी, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और भारत के विकास की रफ्तार समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 को भारत पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त हुआ और देशवासियों ने स्वतंत्र भारत की नियति के निर्माता के रूप में नई यात्रा शुरू की।

हर नागरिक राष्ट्र-निर्माण में भागीदार : राष्ट्रपति

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि विद्यार्थी, शिक्षक, वैज्ञानिक, इंजीनियर, डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी, श्रमिक और किसान समेत देश के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले नागरिक राष्ट्र-निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने संविधान में निहित मूल कर्तव्यों का पालन करने वाले सभी नागरिकों की सराहना करते हुए कहा कि भारत की प्रगति में हर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है।

आधुनिक विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा भारत

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपनी समृद्ध विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों को साथ लेकर आधुनिक विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने राष्ट्र के प्रति निरंतर जागरूक रहने की भावना पर जोर दिया। उन्होंने महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर समेत स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले महान व्यक्तित्वों को नमन किया।

विभाजन की त्रासदी को किया याद

14 अगस्त को मनाए जाने वाले विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि देश के विभाजन के दौरान सांप्रदायिक हिंसा के कारण लाखों लोगों को विस्थापन और पीड़ा झेलनी पड़ी। उन्होंने कहा कि विभाजन के साथ नवस्वतंत्र भारत के सामने 550 से अधिक रियासतों को देश के साथ जोड़ने की बड़ी चुनौती भी थी। सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आज हर व्यक्ति बड़े सपने देख सकता है : मुर्मू

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में जनभागीदारी की भावना लंबे समय से मौजूद रही है और आज देशवासी इसे नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले लोग आज विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं। इससे यह विश्वास मजबूत होता है कि आज के भारत में हर व्यक्ति बड़े सपने देख सकता है और उन्हें पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

लोकतंत्र में हर संस्था की जिम्मेदारी

राष्ट्रपति मुर्मू ने जनप्रतिनिधियों, कार्यपालिका और न्यायपालिका की जिम्मेदारियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे विधायिका में जनता की आकांक्षाओं को आवाज दें।उन्होंने कहा कि कार्यपालिका को जनहित और राष्ट्रहित की नीतियों को लागू करना चाहिए, जबकि न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों का दायित्व है कि आर्थिक अभाव के कारण कोई व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे।

पिछले एक दशक में तेज हुआ समावेशी विकास

राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय में भारत ने तेज गति से समावेशी विकास किया है। उन्होंने कहा कि देश ने अपनी विरासत और विकास के बीच संतुलन कायम करने को प्राथमिकता दी है और विकास में बाधक कई पुराने अवरोधों को दूर किया गया है।

महिला सशक्तिकरण और सावित्रीबाई फुले का योगदान

राष्ट्रपति मुर्मू ने महात्मा ज्योतिबा फुले और क्रांति-ज्योति सावित्रीबाई फुले के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि दोनों ने सामाजिक न्याय, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण व समानता के क्षेत्र में ऐतिहासिक काम किया। उन्होंने कहा कि वंचित वर्गों को आगे बढ़ाना राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।

25 करोड़ से अधिक लोगों के गरीबी से बाहर आने का दावा

राष्ट्रपति ने कहा कि देश में 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है। उन्होंने वित्तीय समावेशन का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत करीब 59 करोड़ खाताधारक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े हैं, जिनमें 32 करोड़ से अधिक महिला खाताधारक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि करीब 80 करोड़ लोगों के लिए निशुल्क राशन की व्यवस्था के जरिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।

राष्ट्रपति के संबोधन का संदेश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन में स्वतंत्रता संग्राम की विरासत, विभाजन की पीड़ा, लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास का संदेश प्रमुख रहा। उन्होंने देशवासियों से राष्ट्र-निर्माण में अपनी भूमिका निभाने और भारत को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।