नई दिल्ली, 28 सितंबर 2026 : भारत अपनी लड़ाकू विमान निर्माण क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक साथ दो मोर्चों पर आगे बढ़ रहा है। फ्रांस से अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की संभावित डील के साथ भारत में फाइटर जेट निर्माण की दूसरी उत्पादन लाइन स्थापित करने की योजना है। स्वदेशी एलसीए तेजस मार्क-1 ए के विकास और उत्पादन कार्यक्रम को भी जारी रखा जाएगा। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने एक डिफेंस समिट 2026 में भारत की रक्षा उत्पादन रणनीति को लेकर अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फ्रांस भारत में राफेल विमानों के निर्माण और बड़े स्तर पर स्वदेशीकरण के लिए तैयार है। इससे देश में लड़ाकू विमानों के उत्पादन का एक अतिरिक्त आधार तैयार हो सकता है।

राफेल की नई उत्पादन लाइन से बढ़ेगी भारत की क्षमता

रक्षा सचिव के मुताबिक, राफेल पहले से इस्तेमाल और परीक्षण किया हुआ लड़ाकू विमान है। भारत में इसके निर्माण से केवल विमानों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद नहीं मिलेगी, बल्कि रक्षा क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर उत्पादन और तकनीकी क्षमता को भी बढ़ावा मिल सकता है। अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद के साथ भारत में इसकी मैन्युफैक्चरिंग को लेकर होने वाला सहयोग देश की रक्षा उत्पादन क्षमता के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। इससे भविष्य में भारतीय कंपनियों और रक्षा उद्योग को भी निर्माण प्रक्रिया में अधिक भागीदारी मिलने की संभावना है।

राफेल आने से तेजस पर नहीं पड़ेगा असर

इस दौरान रक्षा सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि राफेल की खरीद का मतलब यह नहीं है कि स्वदेशी तेजस कार्यक्रम को पीछे किया जाएगा। एलसीए तेजस मार्क-1 ए का विकास और उत्पादन अपनी निर्धारित दिशा में आगे बढ़ता रहेगा। तेजस को लगातार आधुनिक बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। भविष्य में इसमें अधिक स्वदेशी रडार, हथियार प्रणालियों और अन्य तकनीकों को शामिल किए जाने की योजना है। इसका उद्देश्य ऐसा स्वदेशी लड़ाकू विमान तैयार करना है, जिसकी क्षमताओं को समय के साथ लगातार बढ़ाया जा सके।

वायुसेना की तीन बड़ी जरूरतों पर भी फोकस

रक्षा सचिव ने भारतीय वायुसेना की क्षमता से जुड़ी तीन प्रमुख जरूरतों का भी उल्लेख किया। इनमें लड़ाकू विमानों की संख्या में कमी के साथ-साथ एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (एईडब्ल्यूएंडसी) और हवा में ईंधन भरने वाले विमानों की आवश्यकता शामिल है। ये विमान वायुसेना की क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, इन जरूरतों को पूरा करने का असर तुरंत दिखाई देने की संभावना नहीं है। अनुबंध होने के बाद विमानों की आपूर्ति की समयसीमा तय होगी और इसके बाद चरणबद्ध तरीके से वायुसेना की क्षमता में वृद्धि होगी।

स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर जोर

भारत सरकार लगातार देश में रक्षा उपकरणों और सैन्य प्रणालियों के निर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य सैन्य जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ विदेशी निर्भरता को कम करना और घरेलू रक्षा उद्योग की क्षमता बढ़ाना है। राफेल की संभावित भारतीय उत्पादन लाइन और तेजस मार्क-1ए कार्यक्रम को समानांतर रूप से आगे बढ़ाने की रणनीति इसी व्यापक रक्षा उत्पादन नीति का हिस्सा है। एक ओर राफेल के जरिए अतिरिक्त लड़ाकू विमान क्षमता बढ़ाने पर जोर है, तो दूसरी ओर तेजस के जरिए स्वदेशी लड़ाकू विमान निर्माण को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी है।