नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026 : सुप्रीम कोर्ट तक विपक्षी नेताओं के मार्च और SIR विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी किया गया है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी सुप्रीम कोर्ट को डराने या धमकाने की कोशिश नहीं कर सकता है। शीर्ष अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब भी मांगा है। रिपोर्ट के मुताबिक नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और 13 अन्य की याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग (ECI) को भी नोटिस जारी किया गया है। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस संबंध में स्पष्टीकरण भी देना होगा।
12 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने निकाला था मार्च
याचिका दायर होने से पहले 12 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के नेताओं ने दिल्ली के बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला था। रिपोर्ट के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत विपक्ष के कई नेता बाद में सुप्रीम कोर्ट परिसर पहुंचे थे। इससे पहले विपक्षी सांसदों ने CJI सूर्यकांत को एक पत्र लिखकर मिलने और ज्ञापन सौंपने के लिए समय मांगा था। बताया गया कि उन्हें मुलाकात का समय नहीं मिला। इसके बाद विपक्षी नेताओं के मार्च और शीर्ष अदालत परिसर में पहुंचने को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश
सुनवाई के दौरान वकील गौरव भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट से उस समय के CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की, जब राहुल गांधी कोर्ट परिसर पहुंचे थे। आरोप लगाया गया है कि इस दौरान एक महिला पत्रकार को धक्का दिया गया था। हालांकि इस आरोप की पुष्टि अभी नहीं हुई है। इस बीच अदालत में जस्टिस बागची ने संबंधित कानूनी एजेंसियों को CCTV और अन्य डिजिटल फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि संबंधित सामग्री जमा कराई जा सकती है, ताकि मामले से जुड़े तथ्यों की जांच सही तरह से की जा सके।
केरल कांग्रेस की सोशल मीडिया पोस्ट पर भी विवाद
याचिका में केरल कांग्रेस की एक सोशल मीडिया पोस्ट पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने इसे CJI के खिलाफ अवमाननापूर्ण बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित पोस्ट बाद में हटा दी गई थी। इस मामले में अदालत की आगे की कार्रवाई और संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण होगा।
SIR और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के सवाल
विपक्षी दलों का विरोध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर भी है। विपक्ष ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया, चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर तक पहुंच जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में एक अखबार के हवाले से चुनाव आयुक्तों द्वारा SIR से जुड़े कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति जताए जाने का भी उल्लेख है। इन दावों और संबंधित दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि के बाद ही इन्हें अंतिम तथ्य के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। आगे की सुनवाई में मार्च, प्रदर्शन की जिम्मेदारी और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों से जुड़े सवालों पर अदालत का रुख अहम रहेगा।




