नई दिल्ली, 30 सितंबर 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर पटाखों के इस्तेमाल को लेकर एक बड़ी टिप्पणी की है। दिपावली पर पटाखों के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर यानी बुधवार को सुनवाई के दौरान संतुलित रुख अपनाने के संकेत भी दिए। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा कि कोर्ट न तो पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के पक्ष में है और न ही 24 घंटे पटाखे चलाने की अनुमति दी जा सकती है। शीर्ष कोर्ट ने साफ कहा कि दिवाली मनाने से जुड़ी लोगों की भावनाओं को भी ध्यान में रखना होगा, मगर पटाखों से होने वाले प्रदूषण और उसके असर को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों, बीमार लोगों और अन्य जीव-जंतुओं पर इसके प्रभाव को लेकर शीर्ष कोर्ट ने अपनी चिंता जताई।
तय समय में पटाखे चलाने का संकेत
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि दिवाली के दौरान पटाखे चलाने के लिए विशिष्ट समय सीमा तय की जा सकती है। हालांकि, 30 सितंबर की सुनवाई में अंतिम समय-सीमा घोषित नहीं की गई है। शीर्ष कोर्ट का रुख फिलहाल ऐसे समाधान की ओर है, जिसमें लोगों को त्योहार मनाने का अवसर मिले और साथ ही वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की कोशिश की जाए।
बेरियम वाले पटाखों पर CPCB की रिपोर्ट का इंतजार
सुनवाई के दौरान बेरियम आधारित पटाखों का मुद्दा भी उठा। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि बेरियम आधारित पटाखों का आउटडोर परीक्षण अभी पूरा नहीं हुआ है। केंद्र ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 15 अक्टूबर तक का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। रिपोर्ट के बाद बेरियम आधारित पटाखों को लेकर आगे की व्यवस्था पर विचार किया जाएगा।
जॉइंट पटाखों पर भी चर्चा
सुनवाई में जॉइंट पटाखों यानी लड़ी का मुद्दा भी सामने आया। केंद्र की ओर से सुझाव दिया गया कि कुछ शर्तों के साथ ऐसे पटाखों के निर्माण और इस्तेमाल की अनुमति पर विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने इस सुझाव पर सकारात्मक रुख के संकेत दिए हैं। हालांकि, अंतिम नियम और शर्तें अभी तय होना बाकी हैं।
अभी अंतिम आदेश का इंतजार
सुप्रीम कोर्ट की 30 सितंबर की सुनवाई के बाद फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि दिल्ली-NCR में दिवाली पर पटाखों के लिए कोई अंतिम समय तय हो गया है। कोर्ट ने न पूर्ण प्रतिबंध लगाया है और न ही 24 घंटे पटाखे चलाने की अनुमति दी है। आगे की व्यवस्था में पटाखों के प्रकार, इस्तेमाल की अवधि और पर्यावरणीय प्रभाव जैसे पहलुओं पर विचार किया जाएगा। CPCB की रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम सामने आ सकता है।




