नई दिल्ली, 21 सितंबर 2026 : मध्य प्रदेश के इंदौर में 19 सितंबर को आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कार्यक्रम में स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि ने पीएम नरेंद्र मोदी के बोलने के अंदाज और कुछ सार्वजनिक घटनाओं की नकल की थी। इस पर भाजपा समेत कई नेताओं ने आपत्ति जताई है। इसी विवाद के बीच 20 वर्षीय आरुही रेड्डी का एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आया है। मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक आरुही ने खुद को पहली बार वोट देने वाली Gen-Z वोटर बताते हुए कहा है कि उन्होंने पहले राहुल गांधी को अपना पहला वोट देने के बारे में सोचा था, मगर कार्यक्रम में हुई मिमिक्री को देखने के बाद उनका मन अब बदल गया है और आगामी चुनाव में वह प्रधानमंत्री मोदी को वोट देने का फैसला कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अब जब भी चुनाव होगा तो वे भाजपा को वोट देंगी।

आरुही रेड्डी ने क्या कहा ?

आरुही ने अपने पोस्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनके कार्यक्रम में हुई मिमिक्री पर घोर आपत्ति जताई। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के नेता के कार्यक्रम में देश की समस्याओं पर चर्चा के बजाय इस तरह की प्रस्तुति कतई सही नहीं लगी। उन्होंने इसी आधार पर अपनी व्यक्तिगत वोट पसंद बदलने की बात कही। हालांकि, यह आरुही रेड्डी की व्यक्तिगत राय और दावा है। इससे पूरे Gen-Z या युवा मतदाताओं के मूड के बारे में निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगा।

इंदौर में क्या हुआ था ?

19 सितंबर को इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों और युवाओं से शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य मुद्दों पर संवाद किया था। इस कार्यक्रम के दौरान कॉमेडियन पुलकित मणि ने पीएम मोदी की मिमिक्री की, जिसके बाद इसका वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। मिमिक्री को लेकर भाजपा नेताओं ने इसे आपत्तिजनक बताया, जबकि दूसरी ओर कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे राजनीतिक हास्य और अभिव्यक्ति के संदर्भ में देखा। इस विवाद पर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सावधानी

आरुही रेड्डी के कथित वोट-स्विच वाले बयान को व्यक्तिगत प्रतिक्रिया के रूप में रिपोर्ट करना ही सही है। इसे “Gen-Z ने राहुल गांधी को नकार दिया” या “युवाओं का मूड बदल गया” जैसे व्यापक निष्कर्ष के रूप में पेश करने के लिए पर्याप्त स्वतंत्र सर्वे या डेटा उपलब्ध नहीं है।