नई दिल्ली, 16 सितंबर 2026 : OTT प्लेटफॉर्म पर दिखाए जाने वाले कंटेंट को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने एक अनौपचारिक एक्सपर्ट पैनल बनाया है। यह समूह OTT कंटेंट से जुड़े मुद्दों का अध्ययन कर उसे नियंत्रित और नियमित करने के उपाय सुझाएगा। रिपोर्टों के मुताबिक, पैनल OTT के लिए फिल्म सेंसर बोर्ड जैसी किसी व्यवस्था की जरूरत पर भी सुझाव दे सकता है। हालांकि अभी ऐसी किसी सरकारी संस्था के गठन का फैसला नहीं हुआ है। RSS की ओर से OTT कंटेंट को लेकर 'सांस्कृतिक प्रदूषण' और 'नैतिक भ्रष्टाचार' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। पैनल की पहली बैठक हो चुकी है और अब प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले कानूनी विशेषज्ञों से भी सलाह लेने की तैयारी है।
RSS के पैनल में कौन-कौन शामिल ?
रिपोर्ट के अनुसार, यह पैनल कुछ महीने पहले गठित किया गया था। इसमें पूर्व कुलपति और शिक्षा एवं संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े RSS प्रचारक शामिल हैं। समूह आगे कानून के जानकारों और संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों से भी चर्चा करेगा। पैनल के पास अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए फिलहाल कोई तय समय-सीमा नहीं है। सुझाव तैयार होने के बाद इन्हें केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और केंद्र सरकार से जुड़े अन्य संबंधित संस्थानों के सामने रखा जा सकता है।
सेंसर बोर्ड जैसी व्यवस्था का दिया जा सकता है सुझाव
RSS से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, OTT पर मौजूद ऐसे कंटेंट को लेकर चिंता जताई गई है, जिसे संगठन परिवारों और खासकर युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाला मानता है। इसी संदर्भ में OTT के लिए सेंसर बोर्ड जैसी निगरानी व्यवस्था की जरूरत का सुझाव सामने आया है। हालांकि, यह RSS पैनल की प्रस्तावित सिफारिश होगी। इसे लागू करने के लिए केंद्र सरकार को अलग से नीतिगत या कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी।
मोहन भागवत पहले भी उठा चुके हैं OTT का मुद्दा
OTT कंटेंट को लेकर RSS की चिंता नई नहीं है। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अक्टूबर 2024 में विजयादशमी संबोधन के दौरान OTT प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाले कुछ कंटेंट पर सवाल उठाए थे और कानूनी नियंत्रण की जरूरत की बात कही थी। मौजूदा पैनल की पहल को उसी बहस की आगे की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
OTT पर अभी क्या नियम लागू हैं ?
फिलहाल थिएटर में रिलीज होने वाली फिल्मों की तरह OTT कंटेंट के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से पहले से सेंसर सर्टिफिकेट लेना जरूरी नहीं है। OTT प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत आने वाले डिजिटल मीडिया फ्रेमवर्क और अन्य लागू कानूनों के दायरे में आते हैं। इनमें कंटेंट की सेल्फ-क्लासिफिकेशन, आयु-आधारित रेटिंग और शिकायत निवारण की व्यवस्था शामिल है।
सरकार भी OTT कंटेंट पर कर चुकी है कार्रवाई
OTT कंटेंट को लेकर केंद्र सरकार की ओर से पहले भी कार्रवाई की गई है। जुलाई 2026 में सरकार ने संसद को बताया था कि अश्लील कंटेंट से जुड़े मामलों में पिछले दो वर्षों के दौरान 50 OTT प्लेटफॉर्म को ब्लॉक किया गया। ऐसे में RSS का नया पैनल OTT कंटेंट की निगरानी और नियमन को लेकर चल रही व्यापक बहस के बीच सामने आया है। अब देखना होगा कि पैनल अपनी रिपोर्ट में किस तरह के कानूनी और नियामकीय बदलावों की सिफारिश करता है और सरकार उस पर क्या रुख अपनाती है।




