कोलकाता, 19 सितंबर 2026 : पश्चिम बंगाल में छह अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव से पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट के सामने लगातार दो सीटों पर मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। रेजीनगर से ममता गुट के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने शनिवार को अपना नामांकन वापस ले लिया। इससे एक दिन पहले नंदीग्राम से ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे भी नामांकन वापस ले चुकी हैं। रेजीनगर उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी के नामांकन वापस लेने के बाद सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने पार्टी के पुराने चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर पाने और प्रचार से जुड़ी दिक्कतों का हवाला दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं पर दबाव और प्रचार की अनुमति नहीं मिलने की बात भी कही है। इन आरोपों पर विरोधी प्रत्याशी की कोई प्रतिक्रिया अब तक सामने नहीं आई है।
नंदीग्राम में भी ममता गुट की उम्मीदवार ने नाम वापस लिया
शुक्रवार को नंदीग्राम से ममता बनर्जी के गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। इसके कुछ घंटे बाद मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले में उनके खिलाफ वारंट लंबित था। कांग्रेस और ममता बनर्जी ने गिरफ्तारी के समय को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि गिरफ्तारी पुलिस की कार्रवाई के रूप में दर्ज हुई है।
TMC का पुराना नाम और चुनाव चिन्ह इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे दोनों गुट
पश्चिम बंगाल के उपचुनाव से पहले TMC के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद चल रहा है। चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को आगामी उपचुनाव में मूल All India Trinamool Congress नाम और पारंपरिक Flowers and Grass यानी जोड़ा फूल/घास-फूल चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया है। दोनों गुटों को अलग नाम और चुनाव चिन्ह दिए गए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को Mamata All India Trinamool Congress नाम और नया चुनाव चिन्ह दिया गया है, जबकि दूसरे गुट को Democratic Trinamool Congress नाम आवंटित किया गया है। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी है।
छह अक्टूबर को मतदान, नौ अक्टूबर को आएगा परिणाम
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर छह अक्टूबर 2026 को मतदान होगा। दोनों सीटों की मतगणना नौ अक्टूबर को की जाएगी। चुनाव आयोग ने दोनों सीटों के उपचुनाव का कार्यक्रम 7 सितंबर को घोषित किया था। नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई। 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी और बाद में भवानीपुर सीट अपने पास रखते हुए नंदीग्राम से इस्तीफा दिया। वहीं रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई। कबीर ने 2026 के विधानसभा चुनाव में रेजीनगर और नवदा दोनों सीटों से जीत हासिल की थी और बाद में रेजीनगर सीट छोड़ दी।
नंदीग्राम में मुकाबला क्यों अहम है ?
नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण सीट रही है। 2007 का भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन इस क्षेत्र की राजनीति में बड़ा मोड़ माना जाता है। 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव जीता था। उन्होंने भवानीपुर सीट बरकरार रखी और नंदीग्राम से इस्तीफा दिया, जिसके बाद यहां उपचुनाव की जरूरत पड़ी। इस उपचुनाव में BJP ने हसीरानी रथ को नंदीग्राम से उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने मिलन प्रधान को उम्मीदवार बनाया था। रेजीनगर में कांग्रेस ने मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफ़ी को उम्मीदवार बनाया है।अब ममता गुट के दोनों उम्मीदवारों के नाम वापस लेने के बाद नंदीग्राम और रेजीनगर में चुनावी समीकरण एक बार फिर बदल गए हैं। अंतिम उम्मीदवार सूची के बाद दोनों सीटों पर मुकाबले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।




