नई दिल्ली, 22 सितंबर 2026 : NEET-UG की परीक्षा व्यवस्था में अगले साल से एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में व्यापक ढांचागत और प्रशासनिक सुधार किए जा रहे हैं। इसी सुधार प्रक्रिया के तहत NEET-UG को मौजूदा पेन-एंड-पेपर मोड से कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग (CBT) में बदलने की संभावना पर भी विचार चल रहा है। हालांकि अभी NEET-UG को CBT मोड में कराने का अंतिम फैसला नहीं हुआ है। मगर केंद्र के मुताबिक इस बदलाव से जुड़े बुनियादी ढांचे, परीक्षा के संचालन, ग्रामीण इलाकों में उपलब्ध सुविधाओं और कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों के छात्रों पर पड़ने वाले असर का अध्ययन किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने NTA में किए जा रहे सुधारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल किया है। यह हलफनामा अदालत के उस निर्देश के बाद दाखिल किया गया, जिसमें NTA को मजबूत बनाने के लिए विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया की जानकारी मांगी गई थी।

NTA में बदली जा रही है काम करने की संरचना

केंद्र के मुताबिक, NTA को अब फंक्शनल-वर्टिकल स्ट्रक्चर में पुनर्गठित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य परीक्षा के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए विशेषज्ञता और संस्थागत क्षमता को मजबूत करना है। पहले NTA में कर्मचारियों को अलग-अलग परीक्षाओं के आधार पर वर्टिकल में बांटा जाता था। नई व्यवस्था में तकनीक, परीक्षा सुरक्षा, मूल्यांकन, मानव संसाधन और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए अलग विशेषज्ञता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। केंद्र ने बताया कि अगस्त 2026 में NTA में कुल 14 अधिकारियों की तैनाती की गई। इनमें संयुक्त सचिव, निदेशक, संयुक्त निदेशक, उप सचिव, अवर सचिव, अनुभाग अधिकारी और सहायक अनुभाग अधिकारी स्तर के अधिकारी शामिल हैं।

NTA के शीर्ष पदों को मजबूत करने की तैयारी

सरकार के अनुसार, NTA के महानिदेशक के पद पर अब सचिव स्तर के अधिकारी काम कर रहे हैं। साथ ही महानिदेशक के पद को संयुक्त सचिव स्तर से बढ़ाकर अतिरिक्त सचिव स्तर का करने और पांच वरिष्ठ संयुक्त सचिव स्तर के पद बनाने के प्रस्ताव पर भी विचार चल रहा है। NTA के वरिष्ठ नेतृत्व में अलग-अलग सरकारी सेवाओं के अधिकारियों को शामिल किया गया है। इनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा, भारतीय राजस्व सेवा और भारतीय सांख्यिकी सेवा के अधिकारी शामिल हैं।इसके अलावा तकनीक, मानव संसाधन, मूल्यांकन अनुसंधान, परीक्षा केंद्र, उम्मीदवारों की सुविधाएं, सूचना सुरक्षा, परीक्षा सुरक्षा और सतर्कता जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की नियुक्ति की जा रही है।

नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स कर रही काम

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स (HPTF) ने अपना काम शुरू कर दिया है। टास्क फोर्स ने NTA के महानिदेशक, उच्च शिक्षा विभाग और अन्य संबंधित पक्षों के साथ चर्चा की है। इसके अलावा विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को लागू करने की निगरानी कर रही स्टीयरिंग कमेटी के प्रमुख के. राधाकृष्णन के साथ भी विचार-विमर्श किया गया है। इससे पहले के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति ने NTA में सुधार से जुड़ी 101 सिफारिशें की थीं। इन सिफारिशों में परीक्षा व्यवस्था में सुधार, संस्थागत बदलाव, डिजिटल परीक्षा प्रणाली और शिक्षा मंत्रालय की नियमित निगरानी जैसे मुद्दे शामिल हैं।

NEET-UG को CBT में बदलने पर क्या है योजना ?

सबसे महत्वपूर्ण जानकारी NEET-UG की परीक्षा प्रणाली को लेकर सामने आई है। केंद्र सरकार ने बताया कि HPTF NEET-UG को पेन-एंड-पेपर मोड से कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग में बदलने की संभावना पर विचार कर रही है। हालांकि इसके लिए सिर्फ परीक्षा पैटर्न बदलना पर्याप्त नहीं होगा। केंद्र सरकार के अनुसार, इसके लिए कई पहलुओं का अध्ययन जरूरी है।

इनमें शामिल हैं—

  • CBT परीक्षा के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा
  • परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता
  • ग्रामीण क्षेत्रों में कंप्यूटर सुविधाएं
  • कम इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले जिलों की स्थिति
  • महिला उम्मीदवारों पर संभावित प्रभाव
  • परीक्षा में बदलाव का चरणबद्ध क्रियान्वयन
  • देशभर में समान स्तर के परीक्षा केंद्र तैयार करना

यानी फिलहाल यह एक प्रस्तावित बदलाव है। अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

देशभर में CBT इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की तैयारी

केंद्र ने बताया कि परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता में मौजूद भौगोलिक अंतर को कम करने के लिए राष्ट्रीय स्तर की CBT इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्य ऐसे परीक्षा केंद्र विकसित करना है, जहां निर्धारित मानकों के अनुसार कंप्यूटर आधारित परीक्षाएं कराई जा सकें। NEET-UG को CBT में बदलने से पहले स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के साथ भी चर्चा और सहमति की आवश्यकता होगी।

NTA के नए परिसर में बढ़ाई गई सुरक्षा

केंद्र ने NTA के भौतिक और सुरक्षा ढांचे में किए गए बदलावों की जानकारी भी सुप्रीम कोर्ट को दी। नई दिल्ली के मिंटो रोड स्थित भारत सरकार प्रेस भवन में NTA को करीब 55,524.53 वर्ग फुट कार्यालय क्षेत्र उपलब्ध कराया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक NTA के गोपनीय कार्यों को पिछले महीने इस नए सरकारी परिसर में स्थानांतरित किया गया। इस व्यवस्था का उद्देश्य NTA के महत्वपूर्ण और संवेदनशील कार्यों को अधिक सुरक्षित वातावरण में संचालित करना है।

CISF के 39 जवानों की तैनाती

नई सुविधा में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए CISF के 39 जवान तैनात किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था में प्रवेश नियंत्रण, सामान की एक्स-रे जांच और प्रवेश-निकास पर डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। गोपनीय परीक्षा गतिविधियों से जुड़े क्षेत्रों को अतिरिक्त सुरक्षा देने की व्यवस्था भी की गई है।

प्रश्नपत्र से लेकर रिजल्ट तक SOP लागू

केंद्र ने बताया कि परीक्षा प्रक्रिया के अलग-अलग महत्वपूर्ण चरणों के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार किए गए हैं। इनमें प्रश्नपत्र तैयार करना, अनुवाद, छपाई, पैकिंग, ट्रैकिंग, परिवहन, परीक्षा केंद्र तक पहुंचाना, परीक्षा के दिन की प्रक्रिया, प्रश्नपत्र रखने वाले ट्रंक को खोलना, केंद्र की सुरक्षा, प्रश्नपत्रों की वापसी और परिणामों की गणना जैसे चरण शामिल हैं। हालांकि, सुरक्षा कारणों से इन SOP की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

परीक्षा सुरक्षा में कई स्तरों पर इंतजाम

NTA की परीक्षा व्यवस्था में सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई तकनीकी और भौतिक उपाय किए जा रहे हैं।

इनमें—

  • प्रश्नपत्रों की क्यूआर कोड आधारित ट्रैकिंग
  • आधार प्रमाणीकरण
  • सुरक्षित परिवहन और भंडारण
  • परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा
  • बायोमेट्रिक सत्यापन
  • फेस ऑथेंटिकेशन
  • मल्टी-लेयर फ्रिस्किंग
  • मोबाइल जैमर
  • सीसीटीवी निगरानी
  • एआई आधारित तकनीक
  • पांच स्तरीय निगरानी व्यवस्था

जैसे उपाय शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने NTA की व्यवस्था पर जताई थी चिंता

NTA में सुधारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी संकेत दिया था कि वह जरूरत पड़ने पर NTA के कार्यालय का दौरा कर सकती है। अदालत का उद्देश्य यह देखना है कि परीक्षा आयोजित करने के लिए NTA के पास पर्याप्त मानव संसाधन, तकनीकी व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाएं प्रभावी रूप से मौजूद हैं या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया था कि विशेषज्ञ समितियों द्वारा सुझाए गए सुधार केवल रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू किया जाना चाहिए।

अब नौ अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को NTA में चल रहे सुधारों की विस्तृत जानकारी दे दी है। अब मामले की अगली सुनवाई नौ अक्टूबर 2026 को होगी। फिलहाल NEET-UG को CBT मोड में कराने पर विचार जरूर चल रहा है, लेकिन केंद्र की ओर से दाखिल हलफनामे के मुताबिक इसके लिए बुनियादी ढांचे, परीक्षा केंद्रों, ग्रामीण और कम कनेक्टिविटी वाले इलाकों तथा संबंधित मंत्रालयों के साथ समन्वय जैसे पहलुओं पर आगे काम किया जाना बाकी है। इसलिए छात्रों के लिए अभी यह स्पष्ट करना जरूरी है कि NEET-UG को CBT मोड में कराने का अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।