मुंबई, 8 सितंबर 2026 : महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण की एक विशेष फास्ट-ट्रैक अदालत ने करीब 15 साल पुराने मामले में आरोपी को 10 साल की कैद की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2011 में 15 वर्षीय एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और उसके धर्म परिवर्तन से जुड़ा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी. पी. मुले ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपी अजहर उर्फ बदू मुश्ताक कुरैशी को दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया। हालांकि अदालत ने उसे अपहरण के आरोप से बरी कर दिया, क्योंकि पीड़िता अपनी इच्छा से उसके साथ लखनऊ गई थी।

नाबालिग होने के कारण धर्म परिवर्तन को स्वेच्छा नहीं माना

अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि जिस समय पीड़िता ने आरोपी के साथ रहते हुए इस्लाम धर्म अपनाया, उस समय उसकी उम्र 18 वर्ष से कम थी। इसलिए धर्म परिवर्तन से जुड़ी उसकी भागीदारी को स्वतंत्र इच्छा से लिया गया फैसला नहीं माना जा सकता और यह कानून की नजर में अपराध है।

लखनऊ जाने को लेकर आरोपी को मिली राहत

इस मामले में पीड़िता डोंबिवली की रहने वाली थी और वह अपनी इच्छा से आरोपी के साथ लखनऊ गई थी। इसी तथ्य के आधार पर अदालत ने आरोपी को अपहरण के आरोप से बरी कर दिया। हालांकि अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी की भूमिका को काफी गंभीर माना।

अलग नाम से टिकट खरीदना बना अहम सबूत

अदालत के मुताबिक आरोपी द्वारा अलग नाम से टिकट खरीदना उसके पूर्व नियोजित इरादे की ओर संकेत करता है। कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर माना कि आरोपी का उद्देश्य पीड़िता के साथ यौन संबंध बनाना था। अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पीड़िता समेत कुल सात गवाहों से पूछताछ की।

नाबालिग से यौन संबंध पर कोर्ट की अहम टिप्पणी

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध बनाना दुष्कर्म के दायरे में आ सकता है। अदालत ने आरोपी को उस कानूनी अपवाद का लाभ देने से भी इनकार किया, जिसका उसने बचाव के तौर पर सहारा लिया था।

जेल में बिताया समय सजा में होगा समायोजित

अदालत ने आरोपी को 5 फरवरी से 12 सितंबर 2012 तक हिरासत में बिताई अवधि का लाभ उसकी सजा में देने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, पीड़िता को मुआवजा दिलाने के लिए मामले को जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (DLSA) के पास भेजने की सिफारिश भी की गई है।

मामले की बड़ी बातें

  • मामला वर्ष 2011 का है।
  • पीड़िता घटना के समय 15 वर्ष की थी।
  • आरोपी अजहर उर्फ बदू मुश्ताक कुरैशी को 10 साल की कठोर कैद।
  • अपहरण के आरोप से आरोपी को बरी किया गया।
  • नाबालिग होने के कारण धर्म परिवर्तन को स्वतंत्र इच्छा नहीं माना गया।
  • अभियोजन पक्ष ने कुल सात गवाहों से पूछताछ की।
  • पीड़िता के मुआवजे के लिए मामला DLSA को भेजा गया।