मुंबई, 12 सितंबर 2026 : मुंबई के अंधेरी इलाके में फिल्म ‘स्पेशल 26’ की तर्ज पर फर्जी इनकम टैक्स रेड डालकर एक कारोबारी से एक करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हैरानी की बात यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में दो सेवारत आयकर कर्मचारी भी शामिल हैं। पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि दोनों असली आयकर अधिकारियों ने कथित तौर पर फर्जी रेड की पूरी साजिश में मदद की। आरोप है कि उन्होंने रेड के लिए अपने विभाग से छुट्टी ली और गैंग के अन्य सदस्यों को खुद को आयकर अधिकारी की तरह पेश करने की पूरी ट्रेनिंग भी दी।

पहले भी 65 लाख रुपये की वसूली का आरोप

जांच में यह भी पता चला है कि अंधेरी की घटना से पहले यही गैंग ठाणे के मानपाड़ा इलाके में फर्जी आयकर छापा मारकर करीब 65 लाख रुपये ऐंठ चुका था। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गैंग ने इससे पहले कितनी और वारदातों को अंजाम दिया है। पुलिस ने दोनों आयकर कर्मचारियों के संबंधित कार्यालयों को पत्र भेजकर उनके छुट्टी लेने और ड्यूटी रिकॉर्ड की जानकारी मांगी है। अधिकारियों के अटेंडेंस रजिस्टर को भी जांच के दायरे में लिया गया है।

पूर्व ड्राइवर ने रची थी साजिश

अंधेरी की घटना का कथित मास्टरमाइंड कारोबारी राजकुमार कंडासामी का पूर्व ड्राइवर संतोष खोपटकर बताया जा रहा है। कंडासामी की चाकाला, अंधेरी में ‘टू-एम-ऑप्थोट्रोनिक्स प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कंपनी है। बताया जा रहा है कि नौकरी से निकाले जाने के बाद संतोष ने कारोबारी से कथित तौर पर बदला लेने की योजना बनाई। उसे कारोबारी के पैसों और कारोबार से जुड़ी अंदरूनी जानकारी भी थी। इसी जानकारी के आधार पर उसने आयकर अधिकारियों और अन्य साथियों के साथ मिलकर कथित तौर पर फर्जी रेड की योजना बनाई।

कारोबारी और पत्नी को जबरन कैब में बैठाया

पुलिस के मुताबिक, 17 जुलाई की सुबह फर्जी आयकर अधिकारियों की टीम कारोबारी के अंधेरी स्थित दफ्तर पहुंची। सादे कपड़ों में आए दो आरोपियों ने कारोबारी और उनकी पत्नी को उनके घर के पास रोका और खुद को आयकर अधिकारी बताते हुए आईकार्ड दिखाया। इसके बाद दोनों को जबरन कैब में बैठाकर ऑफिस ले जाया गया। कार्यालय पहुंचने के बाद कर्मचारियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए। आरोपियों ने एक कथित फर्जी सर्च वारंट पर कारोबारी से हस्ताक्षर भी करवाए।

1.44 करोड़ के जुर्माने का डर दिखाकर मांगे ₹1 करोड़

फर्जी टीम ने कारोबारी पर नकद लेनदेन का आरोप लगाते हुए दावा किया कि उन पर 1.44 करोड़ रुपये का जुर्माना बन सकता है। इसके बाद मामला खत्म करने के नाम पर आरोपियों ने कथित तौर पर 1 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी। आरोपियों ने कारोबारी को धमकी दी कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हालांकि, कारोबारी ने दबाव में आने के बजाय आरोपियों से आधिकारिक कानूनी नोटिस और अथॉरिटी लेटर दिखाने को कहा। उन्होंने साफ कर दिया कि कोई भी भुगतान नकद नहीं किया जाएगा और वैध भुगतान सीधे संबंधित विभाग को ही किया जाएगा।

तीन घंटे तक चला ‘फर्जी रेड’ का नाटक

जब आरोपी कोई वैध आधिकारिक दस्तावेज पेश नहीं कर सके और कारोबारी अपने रुख पर कायम रहे, तो करीब तीन घंटे बाद फर्जी टीम खाली हाथ लौट गई। इसके बाद कारोबारी ने अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट से संपर्क किया। सीए से जानकारी मिलने पर पता चला कि आयकर विभाग की ओर से ऐसी किसी रेड का आदेश ही नहीं दिया गया था। इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस से की गई। पुलिस ने किडनैपिंग, उगाही और आपराधिक साजिश समेत संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू की। कई हफ्तों की जांच के बाद पुलिस ने इस मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गैंग ने फर्जी आयकर अधिकारी बनकर इससे पहले और कितने लोगों को निशाना बनाया था।