नई दिल्ली, 14 सितंबर 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के आलोचकों में शामिल रहे पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने भारत की अध्यक्षता में हुए BRICS शिखर सम्मेलन की सफलता की जमकर तारीफ की है। हजारीबाग में एक बातचीत के दौरान यशवंत सिन्हा ने सम्मेलन में भारत की भूमिका को प्रभावी बताते हुए कहा कि देश ने अपनी अध्यक्षता की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है। यशवंत सिन्हा ने BRICS सम्मेलन की सफलता के पीछे कई अहम पहलुओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में जिन राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया गया था, वे सभी पहुंचे। इसके अलावा बैठक के बाद सर्वसम्मति से संयुक्त घोषणापत्र (Joint Declaration) जारी होना भी बड़ी उपलब्धि रही।

BRICS में भारत की कूटनीति की तारीफ

पूर्व विदेश मंत्री ने कहा कि इससे पहले मतभेदों के कारण संयुक्त घोषणापत्र जारी नहीं हो पाया था, लेकिन इस बार भारतीय अधिकारियों ने काफी मेहनत की और सभी देशों की सहमति से साझा घोषणापत्र जारी हुआ। सिन्हा ने सम्मेलन के दौरान हुई द्विपक्षीय बैठकों को भी महत्वपूर्ण बताया। खास तौर पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति की मौजूदगी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण नेताओं के बीच हुई बातचीत का असर सम्मेलन के साझा दस्तावेज में भी दिखाई दिया।

चीन को लेकर यशवंत सिन्हा ने दी सावधानी की सलाह

हालांकि, चीन के मामले में यशवंत सिन्हा का रुख काफी सतर्क रहा। उन्होंने कहा कि भारत को चीन के साथ बातचीत जारी रखनी चाहिए, लेकिन उस पर आसानी से भरोसा नहीं किया जा सकता। सिन्हा ने भारत-चीन संबंधों के पुराने अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि चीन ने भारत के साथ कई बार विश्वासघात किया है। उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच बातचीत जरूरी है, लेकिन भरोसे को लेकर सावधानी बरतनी होगी। उन्होंने BRICS के मौजूदा परिणामों को समझाते हुए कहा कि इसे केवल आधा खाली या आधा भरा गिलास देखने के बजाय पूरे परिदृश्य के तौर पर देखना चाहिए। उनके अनुसार, उपलब्धियों के साथ कुछ चुनौतियां भी मौजूद हैं।

फिलिस्तीन और पश्चिम एशिया पर भी बोले सिन्हा

यशवंत सिन्हा ने पश्चिम एशिया की स्थिति और फिलिस्तीन के मुद्दे पर भारत के रुख का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन के सवाल पर भारत अपने पारंपरिक रुख की ओर लौटता हुआ दिखाई दे रहा है, जिसे उन्होंने सकारात्मक संकेत बताया। उन्होंने ईरान को लेकर बनी कूटनीतिक परिस्थितियों का भी विस्तार से जिक्र किया और कहा कि इस पूरे दौर में भारत की विदेश नीति के सामने कई चुनौतियां थीं।

कभी मोदी सरकार के मुखर आलोचक रहे हैं सिन्हा

यशवंत सिन्हा लंबे समय तक भाजपा में रहे और नरेंद्र मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों के मुखर आलोचक रहे हैं। वर्ष 2017 के बाद उन्होंने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर खुलकर सवाल उठाए। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने बीजेपी छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने विपक्षी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार भी बने। ऐसे राजनीतिक और वैचारिक मतभेदों के बीच BRICS सम्मेलन को लेकर उनकी ओर से भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों की सकारात्मक सराहना को महत्वपूर्ण राजनीतिक बयान के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि चीन को लेकर सिन्हा ने अपनी चिंता साफ तौर पर जाहिर की और भारत को पड़ोसी देश के साथ संबंधों में सतर्क रहने की सलाह दी।