कोलकाता, 14 सितंबर 2026 : पश्चिम बंगाल में सड़कों, पुलों और सार्वजनिक स्थानों के नाम बदलने को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। राज्य सरकार की ओर से गठित 10 सदस्यीय कमेटी अलग-अलग नाम बदलने के प्रस्तावों की समीक्षा कर रही है। इन प्रस्तावों में कोलकाता की चर्चित लेनिन सरणी, कार्ल मार्क्स सरणी और हो ची मिन्ह सरणी के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं।हालांकि अभी किसी भी सड़क या सार्वजनिक स्थान का नाम आधिकारिक तौर पर नहीं बदला गया है। कमेटी अपनी जांच और विचार-विमर्श के बाद सरकार को अपनी सिफारिशें देगी। इसके बाद ही इस पर अंतिम निर्णय होने की संभावना है।
किसकी अध्यक्षता में बनी है कमेटी ?
इस 10 सदस्यीय कमेटी की अध्यक्षता भारत सेवाश्रम संघ के स्वामी प्रदीप्तानंद कर रहे हैं, जिन्हें कार्तिक महाराज के नाम से भी जाना जाता है। कमेटी में मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय भी शामिल हैं। कोलकाता नगर निगम से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, कमेटी की पहली बैठक दुर्गा पूजा के बाद होने की संभावना है। इस बैठक में शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों के नाम बदलने से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हो सकती है।
लेनिन, मार्क्स और हो ची मिन्ह के नाम पर भी विचार
कमेटी के अध्यक्ष कार्तिक महाराज के मुताबिक, समिति उन ऐतिहासिक और राजनीतिक व्यक्तित्वों की प्रासंगिकता पर विचार करेगी, जिनके नाम पर शहर की सड़कें और सार्वजनिक स्थान हैं। इस दौरान भारतीय और बंगाली इतिहास, संस्कृति तथा विरासत को भी ध्यान में रखा जाएगा। इसी प्रक्रिया के तहत लेनिन सरणी, कार्ल मार्क्स सरणी और हो ची मिन्ह सरणी के नाम बदलने के प्रस्ताव भी विचाराधीन बताए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि कमेटी के सामने केवल इन्हीं सड़कों के नाम बदलने के प्रस्ताव नहीं हैं, बल्कि कई अन्य स्थानों के नाम को लेकर भी सुझाव मिले हैं।
तथागत रॉय ने सुझाए नए नाम
कमेटी के सदस्य तथागत रॉय ने कुछ सड़कों के लिए वैकल्पिक नामों के सुझाव दिए हैं। उनके सुझाव के मुताबिक, लेनिन सरणी का नाम पूर्व भारतीय जनसंघ अध्यक्ष और गणितज्ञ देबप्रसाद घोष के नाम पर रखा जा सकता है। वहीं किडरपुर की कार्ल मार्क्स सरणी के लिए बंगाली साहित्यकार माइकल मधुसूदन दत्त या रंगलाल बंद्योपाध्याय के नाम पर विचार करने का सुझाव दिया गया है। बताया गया है कि इन दोनों का इस इलाके से संबंध रहा है। इसी तरह हो ची मिन्ह सरणी के लिए अमेरिकी नागरिक अधिकार आंदोलन के प्रमुख नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर का नाम सुझाया गया है।
लेनिन की प्रतिमा हटाने का भी सुझाव
तथागत रॉय की ओर से कोलकाता में लगी लेनिन की प्रतिमा को हटाने का सुझाव भी दिया गया है। यह प्रतिमा जवाहरलाल नेहरू रोड और सिद्धो-कान्हू डाहर के चौराहे पर स्थित बताई जाती है। इसके अलावा शहर की किसी प्रमुख सड़क का नाम सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर रखने का सुझाव भी सामने आया है।
लेनिन सरणी का पुराना नाम क्या था ?
लेनिन सरणी का पुराना नाम धर्मतला स्ट्रीट था। वर्ष 1970 में लेनिन की जन्म शताब्दी के अवसर पर इसका नाम बदलकर लेनिन सरणी किया गया था। इसी तरह सर्कुलर गार्डन रीच रोड का नाम 1971 में बदलकर कार्ल मार्क्स सरणी किया गया था। इन नामों का संबंध कोलकाता के राजनीतिक इतिहास और खास तौर पर वामपंथी राजनीति के लंबे प्रभाव से रहा है। ऐसे में नाम बदलने के प्रस्ताव ने राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस को भी जन्म दिया है।
मुस्लिम हस्तियों के नामों को लेकर भी सुझाव
तथागत रॉय ने कुछ ऐसे सार्वजनिक स्थानों के नाम बदलने के सुझाव भी दिए हैं, जो मुस्लिम ऐतिहासिक हस्तियों के नाम पर हैं। इनके विकल्प के तौर पर उन्होंने लेखक काजी अब्दुल वदूद, शिक्षाविद बेगम रुकैया और लेखक एस. वाजेद अली जैसे नामों का सुझाव दिया है। बारासात के पास तितुमीर के नाम वाले बस स्टैंड के लिए भी इन नामों में से किसी एक को विकल्प के तौर पर रखने का सुझाव सामने आया है।
अभी नहीं हुआ कोई अंतिम फैसला
सड़कों और सार्वजनिक स्थानों के नाम बदलने को लेकर फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। कमेटी अभी विभिन्न प्रस्तावों की समीक्षा कर रही है। कमेटी की सिफारिशें सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लेनिन सरणी, कार्ल मार्क्स सरणी और हो ची मिन्ह सरणी समेत किन-किन स्थानों के नाम वास्तव में बदले जाएंगे। अगर प्रस्ताव लागू होते हैं तो यह कोलकाता के लंबे राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास से जुड़े कई प्रमुख नामों में बड़ा बदलाव होगा।




