नई दिल्ली, 29 सितंबर 2026 : विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग के खिलाफ अपना रुख और कड़ा कर दिया है। मंगलवार यानी 29 सितंबर को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की एक बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए और उन्हें पद से हटाने की मांग कर दी। खड़गे ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर केंद्र सरकार का दबाव है और SIR के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग भी की। ये कांग्रेस के आरोप हैं, जिन पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग का अब तक कोई पक्ष सामने नहीं आया है।

CWC बैठक में SIR पर बनी रणनीति

दिल्ली में हुई CWC बैठक में SIR, मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस बीच कांग्रेस ने तय किया है कि वह इन मुद्दों को संसद में उठाएगी और देशभर में विरोध-प्रदर्शन के जरिए अपनी मांगें सामने रखेगी। कांग्रेस का साफ कहना है कि मतदाता सूची में किए गए बदलावों की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए और जहां गंभीर अनियमितताओं के प्रमाण मिले हैं, वहां स्वतंत्र और समयबद्ध जांच हर हाल में होनी चाहिए।

खड़गे ने CEC ज्ञानेश कुमार पर लगाए आरोप

खड़गे ने अपने संबोधन में CEC ज्ञानेश कुमार को मोदी सरकार की ‘कठपुतली’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से भाजपा को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी के दबाव में मुख्य चुनाव आयुक्त ने काम किया है। इन आरोपों के आधार पर मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग की।

मतदाता सूची और फॉर्म-6 को लेकर विवाद

कांग्रेस ने SIR के साथ नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े फॉर्म-6 के नियमों में बदलाव पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। वहीं, चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को कानूनी प्रक्रिया के तहत बताया है। आयोग ने अपने भीतर मतभेदों की खबरों पर कहा है कि अलग-अलग राय होना स्वाभाविक है और अंतिम फैसले प्रक्रिया के अनुसार लिए गए।

चुनाव आयोग में मतभेद की रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद

चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट सामने आने के बाद SIR को लेकर राजनीतिक विवाद और बढ़ गया। रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई मौकों पर आयोग के फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। बताया गया कि इन आपत्तियों में मतदाता सूची, SIR और चुनावी डेटा से जुड़े मुद्दे शामिल थे। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन मतभेदों को निर्णय प्रक्रिया को अवैध बनाने वाला आधार मानने से इनकार किया है।

महाराष्ट्र में चार अक्टूबर को राज-उद्धव ठाकरे का मार्च

SIR को लेकर विपक्षी दलों की गतिविधियां महाराष्ट्र में भी तेज हुई हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने चार अक्टूबर को मुंबई में संयुक्त मार्च निकालने की घोषणा की है। दोनों दलों ने SIR और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अपनी आपत्तियां जताई हैं। मार्च में अन्य राजनीतिक दलों को भी शामिल होने का न्योता देने की बात कही गई है।

अब संसद और सड़क पर कांग्रेस की लड़ाई

CWC की बैठक के बाद कांग्रेस ने साफ किया है कि वह SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को संसद के साथ-साथ सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शनों में उठाएगी। इस पूरे विवाद में एक ओर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची में बदलाव पर सवाल उठा रहे हैं वहीं चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को कानूनी और निर्धारित नियमों के अनुरूप बता रहा है। आने वाले दिनों में संसद और राज्यों में होने वाले विरोध-प्रदर्शनों के बीच यह मुद्दा और चर्चा में रहने की संभावना है।