कोलकाता, 17 सितंबर। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के संगठनात्मक नियंत्रण और चुनाव चिह्न ‘जोड़ाफूल’ को लेकर चल रहा विवाद अब चुनाव आयोग के सामने है। आयोग ने 17 सितंबर को ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी से जुड़े दोनों गुटों को अलग-अलग समय पर सुनवाई के लिए बुलाया है। यह प्रक्रिया ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं।

दोनों गुटों को अलग-अलग समय दिया गया

रिपोर्टों के मुताबिक, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को दोपहर 3 बजे और ममता बनर्जी गुट को शाम 4 बजे अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया है। इससे पहले भी आयोग दोनों पक्षों की दलीलें सुन चुका है और अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए थे।

संगठन और अधिकृत प्रतिनिधित्व भी मुद्दा

चुनाव आयोग फिलहाल सिर्फ चुनाव चिह्न पर ही नहीं, बल्कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे, अधिकृत पदाधिकारियों और हस्ताक्षरकर्ताओं से जुड़े दावों की भी जांच कर रहा है। आयोग ने अब तक यह औपचारिक रूप से घोषित नहीं किया है कि किसी एक गुट को TMC का आधिकारिक प्रतिनिधि माना गया है।

उपचुनाव की वजह से बढ़ी अहमियत

दोनों गुटों ने 6 अक्टूबर के उपचुनाव के लिए उम्मीदवार उतारे हैं और ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है। 16 सितंबर नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख थी, जबकि 19 सितंबर तक नामांकन पत्रों की जांच पूरी होनी है। ऐसे में आयोग की प्रक्रिया का अगला कदम उम्मीदवारों और चुनावी दस्तावेजों के लिए महत्वपूर्ण होगा।

आयोग के सामने क्या विकल्प हैं?

मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग संभावनाओं का उल्लेख किया गया है, लेकिन अंतिम फैसला चुनाव आयोग ही करेगा। फिलहाल दोनों पक्षों के दस्तावेज, संगठनात्मक दावे और अधिकृत प्रतिनिधित्व से जुड़े तर्क आयोग के विचाराधीन हैं। इसलिए सुनवाई पूरी होने और औपचारिक आदेश आने से पहले यह कहना उचित नहीं होगा कि ‘जोड़ाफूल’ चिह्न किस गुट को मिलेगा।

आगे क्या होगा?

17 सितंबर की सुनवाई के बाद आयोग आगे की प्रक्रिया और संभावित आदेश पर निर्णय लेगा। तब तक दोनों गुट अपने-अपने दावों के समर्थन में दिए दस्तावेजों और तर्कों के आधार पर आयोग के समक्ष स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल के उपचुनावों को देखते हुए इस मामले पर राजनीतिक और कानूनी नजर बनी हुई है।