नई दिल्ला, 19 अक्टूबर 2026 : दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की जमानत को लेकर विवाद काफी गहरा गया है। जमानत मामले की सुनवाई से जुड़े स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को कथित तौर पर धमकी मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। वहीं, CJP ने आरोप लगाया है कि दोनों नेताओं की रिहाई में देरी हो रही है। पार्टी के मुताबिक आशुतोष और सौरव 14 अक्टूबर से तिहाड़ जेल में बंद हैं। हालांकि सोमवार को उन्हें मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में पेश किए जाने की संभावना जताई गई है।

मजिस्ट्रेट को कथित धमकी, दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR

आशुतोष रांका और सौरव दास की जमानत प्रक्रिया के बीच स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को कथित धमकी मिलने का मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने इस संबंध में अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज की है। फिलहाल धमकी देने वाले व्यक्ति की पहचान की जानकारी सामने नहीं आई है। इस घटनाक्रम के बाद CJP ने जमानत प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि धमकी के मामले की जांच होनी चाहिए पर इसका इस्तेमाल दोनों नेताओं की जमानत प्रक्रिया में देरी के लिए नहीं होना चाहिए।

CJP का आरोप- जमानत की सुनवाई के बजाय धमकी वाले संदेश पर चर्चा

CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह के मुताबिक, रविवार को जमानत पर सुनवाई के लिए मजिस्ट्रेट और सरकारी वकील दोपहर 12 बजे से इंतजार के बाद शाम करीब 5:30 बजे पहुंचे। पार्टी का आरोप है कि दोनों नेताओं की रिहाई से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई करने के बजाय मजिस्ट्रेट को मिले कथित धमकी भरे संदेश पर चर्चा की गई। रत्ना सिंह ने सवाल उठाया कि इस संदेश का आशुतोष और सौरव की जमानत से क्या संबंध है। CJP ने संदेश भेजने वाले की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर पुलिस का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

चार जमानतदारों को खारिज करने पर भी उठे सवाल

CJP ने जमानत प्रक्रिया में देरी का आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों नेताओं के जमानतदारों के दस्तावेजों की जांच में समय लगाया गया। पार्टी के मुताबिक, चार जमानतदारों को स्पष्ट कारण बताए बिना खारिज कर दिया गया। CJP ने बैंक की मुहर वाली फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद को दोबारा मंजूरी के लिए प्रस्तुत करने पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि दोनों नेताओं को जेल में रखने के लिए जमानत प्रक्रिया में देरी की जा रही है। हालांकि, जमानतदारों के दस्तावेजों को लेकर उठाए गए सवालों और देरी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

13 अक्टूबर को जंतर-मंतर से हिरासत में लिए गए थे आशुतोष और सौरव

CJP के मुताबिक, आशुतोष रांका और सौरव दास को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया था। पार्टी SIR के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है। इससे पहले 10 अक्टूबर को CJP संस्थापक अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था। अगले दिन उन्हें दिल्ली कैंट की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया, जहां से 50-50 हजार रुपये के जमानती मुचलके पर रिहा किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

अभिजीत को भी किया गया था हिरासत में

आशुतोष और सौरव की गिरफ्तारी के विरोध में CJP ने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में 'लहरा दो तिरंगा' रैली आयोजित की थी। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को रैली से पहले हिरासत में लिया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें 17 अक्टूबर को 50 हजार रुपये के बेल बॉन्ड पर जमानत मिली और बाद में रिहा कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद CJP ने अपने नेताओं की हिरासत और जमानत प्रक्रिया को लेकर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

तिरंगा मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस ने दर्ज कीं तीन FIR

CJP के तिरंगा मार्च के संबंध में दिल्ली पुलिस ने कम से कम तीन FIR दर्ज की थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन मामलों में CJP संस्थापक अभिजीत दीपके, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा और आम आदमी पार्टी के नेताओं समेत कई लोगों के नाम शामिल हैं। FIR कनॉट प्लेस और मंडी हाउस थानों में दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करने, सड़क पर मार्च करने और पुलिस के काम में बाधा डालने के आरोप लगाए थे। इन आरोपों पर संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत फैसला होना बाकी है।

CJP पहले भी कर चुकी है लंबा प्रदर्शन

कॉकरोच जनता पार्टी ने इससे पहले NEET पेपर लीक मामले में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, यह प्रदर्शन 20 जून से 25 जुलाई तक चला था। इस दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी भूख हड़ताल पर बैठे थे। 20 जुलाई को पार्टी ने संसद तक मार्च निकालने की कोशिश की थी। 25 जुलाई को प्रदर्शन समाप्त होने की जानकारी सामने आई थी।

अब आशुतोष और सौरव की जमानत पर नजर

मजिस्ट्रेट को कथित धमकी मिलने के मामले में FIR दर्ज होने और जमानत प्रक्रिया को लेकर CJP के आरोपों के बीच अब आशुतोष रांका और सौरव दास की रिहाई पर सबकी नजर है। दोनों की पेशी और जमानत पर आगे की कार्रवाई के संबंध में अंतिम स्थिति अदालत व पुलिस की जानकारी से ही स्पष्ट होगी। फिलहाल CJP ने दोनों नेताओं की रिहाई के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कही है।