पटना: शारदीय नवरात्रि और दुर्गा पूजा को लेकर इस वर्ष श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। पूजा की तैयारियां मंदिरों से लेकर विभिन्न पूजा पंडालों तक तेज हो गई हैं। प्रतिमा निर्माण, पंडाल सजावट और मंदिरों के सौंदर्यीकरण का काम अब अंतिम चरण में पहुंचने लगा है।
इस बार दुर्गा पूजा की अवधि को लेकर भी खास बात सामने आई है। तिथियों के क्रम में एक दिन ‘शून्य’ होने के कारण शारदीय नवरात्रि और दुर्गा पूजा की अवधि 10 के बजाय 11 दिनों की होगी। मिथिला पंचांग के अनुसार 11 अक्टूबर से नवरात्रि की शुरुआत होगी।
11 अक्टूबर को कलश स्थापना के साथ शुरुआत
गणेशपुर निवासी ज्योतिषाचार्य पंडित दिनकर झा के अनुसार मिथिला पंचांग में 11 अक्टूबर, रविवार को कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ होगा।
इसके बाद अलग-अलग तिथियों के अनुसार नवरात्रि के प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे। इस बार अष्टमी और नवमी के बीच तिथि के क्रम में एक दिन शून्य रहने के कारण पूजा की अवधि सामान्य से एक दिन अधिक होगी।
18 अक्टूबर को होगी महाष्टमी
पंडित दिनकर झा के मुताबिक 17 अक्टूबर को सप्तमी के बाद 18 अक्टूबर, रविवार को महाष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को दिन-रात रहने के बाद 19 अक्टूबर की सुबह तक जारी रहेगी।
बताया गया है कि 19 अक्टूबर को सुबह 7:34 बजे तक अष्टमी तिथि रहेगी। इसी वजह से महाष्टमी का व्रत 18 अक्टूबर को रखा जाएगा।
20 अक्टूबर को महानवमी का व्रत
अष्टमी के बाद नवमी तिथि 19 अक्टूबर की सुबह 7:34 बजे से शुरू होकर 20 अक्टूबर की सुबह 9:45 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर महानवमी का व्रत 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
इसी दिन बलि प्रदान की परंपरा भी निभाई जाएगी। वहीं, 19 अक्टूबर की तिथि को शून्य माना गया है, जिसके चलते इस बार पूजा की अवधि 11 दिनों तक पहुंच रही है।
21 अक्टूबर को विजयादशमी और मां की विदाई
मिथिला पंचांग के अनुसार 21 अक्टूबर, बुधवार को विजयादशमी मनाई जाएगी। इसी दिन मां दुर्गा अपने पूरे परिवार के साथ विदा होंगी।
हालांकि, अलग-अलग पंचांगों में विजयादशमी की तारीख को लेकर अंतर बताया गया है। अन्य पंचांगों के अनुसार 20 अक्टूबर को भी विजयादशमी मनाई जा सकती है।
गज वाहन पर होगा मां दुर्गा का आगमन और प्रस्थान
इस वर्ष मां दुर्गा के वाहन को लेकर भी धार्मिक मान्यता के अनुसार विशेष संयोग बताया गया है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार मां दुर्गा हाथी यानी गज वाहन पर सवार होकर धरती पर आएंगी और विजयादशमी के दिन गज वाहन पर ही अपने परिवार के साथ प्रस्थान करेंगी।
धार्मिक मान्यताओं में मां का हाथी पर आगमन और प्रस्थान शुभ माना जाता है। गज को ज्ञान, स्थिरता, शांति, ऐश्वर्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
श्रद्धालुओं में बढ़ा उत्साह
मां दुर्गा के गज वाहन पर आगमन और प्रस्थान की मान्यता को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे सुख-समृद्धि और शांति से जोड़कर देखा जाता है।
गणेश और महालक्ष्मी से हाथी के संबंध की धार्मिक मान्यता के कारण इसे शुभ संकेत भी माना जाता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार यह संयोग पूरे वर्ष शुभ कार्यों, शांति और पर्याप्त वर्षा से जुड़ी सकारात्मक मान्यताओं का संकेत माना जाता है।
इधर, दुर्गा पूजा को लेकर पटना और आसपास के इलाकों में पूजा समितियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पंडालों के निर्माण से लेकर प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने और मंदिरों की सजावट तक विभिन्न स्तरों पर काम चल रहा है। 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले नवरात्रि पर्व को लेकर अब श्रद्धालुओं को पूजा के शुभ दिनों का इंतजार है।




