नई दिल्ली, 29 सितंबर 2026 : तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के भगवान राम और भगवान शिव को लेकर दिए बयान पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। दिल्ली में आयोजित मीडिया सम्मेलन में रेवंत रेड्डी ने कहा कि भगवान शिव गरीबों के और भगवान राम अमीरों के भगवान हैं। उन्होंने भाजपा पर भगवान राम को अपने राजनीतिक विमर्श से जोड़ने का आरोप लगाया। सीएम रेवंत रेड्डी से कांग्रेस के दक्षिण भारत में मजबूत रहने और उत्तर भारत में अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन को लेकर सवाल पूछा गया था। जवाब में उन्होंने दक्षिण और उत्तर भारत की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान का जिक्र करते हुए कहा कि दक्षिण में लोग शिव के भक्त हैं, जबकि उत्तर भारत में राम की भक्ति अधिक दिखाई देती है। उन्होंने खुद को द्रविड़ और उत्तर भारतीयों को आर्य बताते हुए भी टिप्पणी की।

भाजपा पर राम को राजनीतिक नैरेटिव से जोड़ने का आरोप

रेवंत रेड्डी ने भाजपा पर भगवान राम को राजनीतिक प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने राम को अपने राजनीतिक नैरेटिव से जोड़ लिया है और इसी वजह से उत्तर भारत में उसे राजनीतिक लाभ मिला। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि भाजपा नेता ‘जय श्री राम’ का नारा लगाते हैं, लेकिन ‘हर हर महादेव’ का नारा उसी तरह क्यों नहीं लगाया जाता। हालांकि, रेवंत रेड्डी ने यह भी कहा कि भगवान राम और भगवान शिव दोनों ही उनके लिए पूजनीय हैं।

केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार का पलटवार

रेवंत रेड्डी के बयान पर केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवान राम और भगवान शिव के बीच राजनीतिक विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। बंदी संजय कुमार ने कहा कि तेलंगाना में वेमुलावाड़ा को ‘दक्षिण काशी’ और भद्राचलम को ‘दक्षिण अयोध्या’ कहा जाता है। ऐसे में उन्होंने रेवंत रेड्डी से भगवान राम और भगवान शिव को उत्तर और दक्षिण के आधार पर अलग नहीं करने की अपील की।

उत्तर-दक्षिण की राजनीति का मुद्दा भी उठा

रेवंत रेड्डी ने अपने बयान में उत्तर और दक्षिण भारत के बीच राजनीतिक अंतर का भी जिक्र किया। उन्होंने कांग्रेस के दक्षिण भारत में प्रदर्शन और उत्तर भारत में उसके राजनीतिक प्रदर्शन को धार्मिक तथा सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर समझाने की कोशिश की। उनकी इस टिप्पणी के बाद भाजपा नेताओं ने उत्तर और दक्षिण भारत के बीच धार्मिक आधार पर अंतर बताने पर आपत्ति जताई है। इस बयान को लेकर राजनीतिक बहस अब भगवान राम और भगवान शिव के साथ-साथ क्षेत्रीय पहचान के मुद्दे तक पहुंच गई है।

पहले भी धार्मिक मुद्दों पर बयान देते रहे हैं रेवंत

सीएम रेवंत रेड्डी के ताजा बयान से पहले भी कांग्रेस नेताओं के धार्मिक मुद्दों पर दिए बयान राजनीतिक बहस का विषय रहे हैं। मालूम हो कि 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने खुद को भगवान शिव का भक्त बताया था। 2024 में लोकसभा में राहुल गांधी ने भगवान शिव की तस्वीर दिखाते हुए अपने भाषण में शिव के संदेश का उल्लेख भी किया था। इन बयानों पर भाजपा की ओर से भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।

अब बयान पर बढ़ी राजनीतिक बहस

रेवंत रेड्डी की टिप्पणी के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर रेवंत रेड्डी ने अपने बयान में भाजपा की राजनीति और उत्तर-दक्षिण के राजनीतिक अंतर को मुद्दा बनाया है, वहीं भाजपा नेताओं ने उनके बयान पर आपत्ति जताते हुए इसे धार्मिक विभाजन से जोड़कर देखा है।