नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026 : भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का समापन साझा घोषणापत्र जारी होने के साथ हुआ है। नई दिल्ली घोषणापत्र में आतंकवाद, वैश्विक व्यापार, आर्थिक प्रतिबंध, पश्चिम एशिया संकट और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे कई अहम मुद्दों पर सदस्य देशों ने अपना रुख स्पष्ट किया। इस घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की अपील की गई। इसके साथ ही एकतरफा टैरिफ और आर्थिक प्रतिबंधों पर भी चिंता जताई गई। BRICS ने संयुक्त राष्ट्र, IMF, विश्व बैंक और WTO जैसी वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया है।

पहलगाम आतंकी हमले पर BRICS का कड़ा रुख

साझा घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। BRICS देशों ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की अपील की। घोषणापत्र में कहा गया कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। सदस्य देशों ने सीमा पार आतंकवाद, आतंकियों की आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और उनके सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जरूरत बताई। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र के तहत Comprehensive Convention on International Terrorism (CCIT) को जल्द अंतिम रूप देने की मांग भी दोहराई गई।

टैरिफ नीति पर BRICS ने जताई चिंता

BRICS घोषणापत्र में किसी देश का नाम सीधे लिए बिना एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापार बाधाओं पर गंभीर चिंता जताई गई। समूह ने कहा कि संरक्षणवादी नीतियों और मनमाने व्यापारिक प्रतिबंधों से वैश्विक व्यापार व्यवस्था प्रभावित हो रही है। घोषणापत्र के मुताबिक, ऐसी नीतियों से वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ता है और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं के सामने नई चुनौतियां खड़ी होती हैं। BRICS ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के अनुरूप एक खुली, पारदर्शी और निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था का समर्थन किया।

एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों का विरोध

साझा घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के बिना लगाए जाने वाले एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों का भी विरोध किया गया। BRICS देशों का कहना है कि इस तरह के प्रतिबंधों का सीधा असर आम लोगों के मानवाधिकार, स्वास्थ्य सेवाओं, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक विकास पर पड़ सकता है। घोषणापत्र में ऐसे कदमों और सेकेंडरी प्रतिबंधों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप बनाए जाने की जरूरत पर जोर दिया गया।

पश्चिम एशिया संकट और परमाणु सुरक्षा पर चिंता

BRICS नेताओं ने पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई। सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की गई। घोषणापत्र में शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियों से जुड़े प्रतिष्ठानों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा की गई। नेताओं ने कहा कि सशस्त्र संघर्ष के दौरान भी परमाणु सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है।

गाजा और फलस्तीन के मुद्दे पर क्या कहा ?

BRICS देशों ने गाजा में जारी मानवीय संकट को लेकर भी चिंता जताई। घोषणापत्र में नागरिकों और अस्पतालों पर हमलों तथा युद्ध में भुखमरी को हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने की निंदा की गई। सदस्य देशों ने फलस्तीनी लोगों के जबरन विस्थापन का विरोध किया और 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र एवं संप्रभु फलस्तीन राष्ट्र के गठन का समर्थन किया, जिसकी राजधानी पूर्वी यरूशलम हो।

UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी

घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग को भी प्रमुखता दी गई। BRICS ने सुरक्षा परिषद को अधिक लोकतांत्रिक, प्रभावी और प्रतिनिधित्व वाला बनाने पर जोर दिया। चीन और रूस ने सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका और स्थायी सदस्यता की आकांक्षा के समर्थन को दोहराया। साथ ही अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों को संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व देने की बात कही गई।

IMF और World Bank में सुधार की मांग

BRICS देशों ने IMF और World Bank जैसी ब्रेटन वुड्स संस्थाओं में भी बदलाव की जरूरत बताई। घोषणापत्र में कहा गया कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं की हिस्सेदारी और मतदान अधिकार उनकी वास्तविक आर्थिक स्थिति के अनुरूप होने चाहिए। विकासशील देशों की वोटिंग पावर बढ़ाने और सबसे गरीब देशों के हितों की रक्षा पर भी जोर दिया गया।

WTO को मजबूत करने पर जोर

BRICS ने विश्व व्यापार संगठन की विवाद निपटान व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की। समूह ने WTO की दो-स्तरीय बाध्यकारी विवाद समाधान प्रणाली को जल्द पूरी तरह सक्रिय करने और अपील निकाय के नए सदस्यों की नियुक्ति की मांग की। BRICS का कहना है कि विवाद समाधान तंत्र के कमजोर होने से खासकर विकासशील देशों के व्यापारिक हित प्रभावित हो रहे हैं।

भारत की अध्यक्षता की भी हुई सराहना

घोषणापत्र में 2026 में भारत की BRICS अध्यक्षता की भी सराहना की गई। भारत ने अध्यक्षता के दौरान 30 शहरों में 400 से ज्यादा बैठकों का आयोजन किया। घोषणापत्र में समानता, स्वतंत्रता और दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने जैसे बांडुंग सिद्धांतों को भी याद किया गया। कुल मिलाकर, BRICS के साझा घोषणापत्र ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख, वैश्विक व्यापार में निष्पक्षता और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की मांग के जरिए विकासशील देशों की सामूहिक आवाज को मजबूत करने का संदेश दिया है।