नई दिल्ली, 8 सितंबर 2026 : भारत की मेजबानी में होने वाले BRICS Summit 2026 में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के शामिल होने को लेकर संशय के बीच भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। एक रिपोर्ट्स के मुताबिक तारिक रहमान नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होने का फैसला कर सकते हैं। इसी मुद्दे पर पूर्व राजनयिक और जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट कंवल सिब्बल ने बांग्लादेश के मौजूदा रुख पर सवाल उठाए हैं।

‘दोस्ती थोपी नहीं जा सकती’

कंवल सिब्बल ने कहा कि किसी भी देश के साथ दोस्ती जबरदस्ती नहीं की जा सकती। उनके मुताबिक, मैत्रीपूर्ण संबंधों की बुनियाद तर्कसंगत और व्यावहारिक सोच पर होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मित्र देशों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन व्यापक राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए इन मतभेदों को मैनेज करना जरूरी होता है। कंवल सिब्बल के मुताबिक, भारत ने बांग्लादेश की नई सरकार के साथ संबंध बेहतर करने के लिए कई पहल की हैं। ऐसे में जरूरत से ज्यादा आक्रामक या अड़ियल रवैया अपनाना बांग्लादेश के हित में भी नहीं है।

BRICS Summit में शामिल होना क्यों अहम ?

कंवल सिब्बल ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत BRICS का ‘मालिक’ नहीं है। उनके अनुसार, BRICS Summit में शामिल होना किसी एक देश के साथ रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया के प्रमुख नेताओं से बातचीत और अपने देश का दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखने का अवसर है। ऐसे में अगर बांग्लादेश इस सम्मेलन से दूरी बनाता है, तो इससे उसके सामने मौजूद एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर छूट सकता है।

BIMSTEC की वजह से मिला विशेष निमंत्रण

भारत की अध्यक्षता में 18वां BRICS Summit 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होना है। बांग्लादेश को इस सम्मेलन में विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया है। बांग्लादेश को यह निमंत्रण BIMSTEC के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर मिला है। ऐसे में सम्मेलन में तारिक रहमान की मौजूदगी क्षेत्रीय सहयोग और भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।

शेख हसीना का मुद्दा बना चुनौती ?

तारिक रहमान के संभावित फैसले को बांग्लादेश की घरेलू राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। भारत में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की मौजूदगी दोनों देशों के बीच एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि शेख हसीना के मुद्दे पर बांग्लादेश की मौजूदा सरकार पर घरेलू राजनीतिक और कट्टरपंथी समूहों का दबाव है। इसी वजह से सरकार भारत के साथ रिश्तों को लेकर कुछ कड़े फैसले ले रही है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच बड़ा सवाल यही है कि क्या घरेलू राजनीतिक दबाव के कारण बांग्लादेश BRICS जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मंच से दूरी बनाकर अपने ही कूटनीतिक हितों को नुकसान पहुंचा रहा है ?

भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर क्या असर ?

भारत और बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक, भौगोलिक और आर्थिक संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में BRICS Summit से संभावित दूरी दोनों देशों के बीच पहले से चल रही कूटनीतिक खींचतान को और चर्चा में ला सकती है। फिलहाल तारिक रहमान के BRICS Summit में शामिल होने को लेकर अंतिम स्थिति पर नजर बनी हुई है, मगर कंवल सिब्बल की टिप्पणी ने साफ कर दिया है कि भारत-बांग्लादेश संबंधों में कूटनीति, राष्ट्रीय हित और क्षेत्रीय सहयोग आने वाले दिनों में अहम मुद्दे बने रहेंगे।