नई दिल्ली, 31 अगस्त 2026 : भारत की कूटनीतिक सक्रियता के बीच 2026 का BRICS शिखर सम्मेलन काफी अहम माना जा रहा है। नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को प्रस्तावित BRICS Summit से पहले SCO बैठक में होने वाली नेताओं की मुलाकातों पर भी दुनिया की नजर है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने और उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत करने की संभावना है। इन मुलाकातों को भारत, रूस और चीन के बीच बदलते क्षेत्रीय और वैश्विक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर अमेरिका, चीन और रूस के बीच बन रहे नए कूटनीतिक समीकरणों के बीच भारत की भूमिका पर भी नजर रहेगी।

पुतिन पहले जिनपिंग, फिर पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात

जानकारी के मुताबिक, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बिश्केक में पहले शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात प्रस्तावित है। भारत ने भी इन बैठकों की तैयारी के तहत अपनी कूटनीतिक गतिविधियां तेज की हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की रूस यात्रा और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की चीन यात्रा को भी इसी व्यापक कूटनीतिक प्रयास से जोड़कर देखा जा रहा है।

भारत-चीन रिश्तों में दूरी कम करने पर जोर

विदेश नीति के जानकारों के मुताबिक, रूस भारत और चीन के बीच संवाद और तालमेल बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। ऐसे में पुतिन की मोदी और जिनपिंग के साथ होने वाली बातचीत से क्षेत्रीय स्थिरता का संदेश सामने आ सकता है। भारत भी चीन के साथ अपने संबंधों को लेकर सतर्क है। सीमा और व्यापार समेत कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच संवाद जारी है। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर होने वाली मुलाकातें आने वाले समय की दिशा तय करने में अहम हो सकती हैं।

पाकिस्तान भी रहेगा नजर में

SCO और BRICS की बैठकों के दौरान पाकिस्तान की मौजूदगी भी भारत के लिए महत्वपूर्ण होगी। पाकिस्तान SCO का सदस्य है और 2027 में SCO शिखर सम्मेलन की मेजबानी भी उसे करनी है। भारत की प्राथमिकता क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने की है। साथ ही नई दिल्ली की ओर से पाकिस्तान से लगातार यह अपेक्षा की जाती रही है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए न होने दे। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की SCO यात्रा के दौरान विभिन्न देशों के नेताओं के साथ होने वाली बैठकों को केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं माना जा रहा है।

BRICS Summit 2026 पर दुनिया की नजर

नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर भी तैयारियां महत्वपूर्ण चरण में हैं। BRICS के विस्तार और वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका बढ़ने के बीच भारत की मेजबानी में होने वाला यह सम्मेलन काफी अहम माना जा रहा है। रूस BRICS और SCO दोनों मंचों को मजबूत करने की दिशा में लगातार सक्रिय रहा है। वहीं भारत भी इन बहुपक्षीय मंचों के जरिए विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने और वैश्विक कूटनीति में अपनी भूमिका बढ़ाने पर जोर देता रहा है।

चीन-अमेरिका संबंधों में बदलाव पर भी भारत की नजर

इस पूरे घटनाक्रम के बीच चीन और अमेरिका के रिश्तों में संभावित सुधार भी भारत के रणनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। अमेरिका और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच प्रस्तावित मुलाकातों को दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। अगर अमेरिका और चीन के संबंधों में स्थिरता आती है, तो इसका असर वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और एशियाई भू-राजनीति पर पड़ सकता है। भारत ऐसे बदलते समीकरणों के बीच अमेरिका, रूस और चीन के साथ अपने संबंधों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

भारत के लिए कूटनीतिक अवसर

भारत के सामने इस समय एक साथ कई रणनीतिक चुनौतियां और अवसर हैं। रूस के साथ पारंपरिक रणनीतिक संबंध, चीन के साथ सीमा और व्यापार से जुड़े मुद्दे तथा अमेरिका के साथ बढ़ती साझेदारी—इन सभी के बीच नई दिल्ली की कूटनीति का संतुलन महत्वपूर्ण है। ऐसे में पुतिन, शी जिनपिंग और पीएम मोदी की संभावित मुलाकातों से क्षेत्रीय स्थिरता, आपसी सहयोग और बहुपक्षीय कूटनीति को लेकर कोई बड़ा संदेश सामने आने की उम्मीद की जा रही है।