नई दिल्ली, 14 सितंबर 2026 : दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच सहयोग को आम नागरिकों तक पहुंचाने पर खास जोर दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई वैश्विक नेताओं ने तकनीक, रोजगार, शहरी विकास, व्यापार, ऊर्जा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने की जरूरत बताई। दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी सामने आए। वहीं, भारत की मेजबानी में हुए इस सम्मेलन का इस्तेमाल विभिन्न देशों ने आपसी रिश्तों और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत के लिए भी किया।

आम लोगों तक पहुंचेगा BRICS का फायदा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि BRICS का सहयोग सिर्फ सरकारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसमें किसानों, उद्यमियों, शोधकर्ताओं, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाई जानी चाहिए। डिजिटल कृषि से जुड़े BRICS नेटवर्क के जरिए AI, भू-स्थानिक तकनीक और डिजिटल बुनियादी ढांचे को किसानों की जरूरतों से जोड़ने की बात सामने आई। इसके अलावा शहरों के बीच बेहतर व्यवस्थाओं और अनुभवों को साझा करने के लिए BRICS Urban Mobility Hub बनाने पर भी जोर दिया गया। स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का प्रस्ताव भी रखा गया।

चार स्तंभों पर सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव

प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS सहयोग के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों पर जोर दिया।

1. लचीलापन : मजबूत और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला के लिए BRICS लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन विकसित करने का प्रस्ताव।

2. नवाचार : BRICS देशों के स्टार्टअप को आपस में जोड़ने के लिए इनक्यूबेटर नेटवर्क और स्टार्टअप इनोवेशन फंड की दिशा में पहल।

3. स्थिरता : MSME क्षेत्र को मजबूत करने के लिए BRICS MSME पोर्टल और कौशल व रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर।

4. सहयोग : संक्रामक बीमारियों की समय रहते पहचान और रोकथाम के लिए एकीकृत अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित करने की दिशा में सहमति।

जिनपिंग ने AI और स्मार्ट फैक्ट्रियों पर दिया जोर

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने BRICS देशों के बीच AI, डिजिटल तकनीक और औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने की बात कही। उन्होंने ओपन-सोर्स AI समुदाय बनाने और साझा डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करने का प्रस्ताव रखा। चीन की ओर से BRICS देशों में स्मार्ट फैक्ट्रियों के विकास में सहयोग और इंजीनियर प्रशिक्षण गठबंधन बनाने की पहल भी सामने आई। युवाओं के बीच वैज्ञानिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। जिनपिंग ने अंतरराष्ट्रीय मामलों में ताकत के बजाय नियमों और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर फैसले लेने की बात कही।

पुतिन ने स्वतंत्र बीमा तंत्र और अनाज बाजार का प्रस्ताव रखा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने BRICS देशों के लिए स्वतंत्र बीमा तंत्र और साझा अनाज बाजार बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए BRICS और ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच बीमा व्यवस्था का मुद्दा मॉस्को के लिए खास महत्व रखता है।

ईरान और UAE के बीच रिश्ते सुधारने के संकेत

BRICS सम्मेलन के दौरान ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच भी बातचीत ने ध्यान खींचा। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद अल नाहयान की मुलाकात में क्षेत्रीय तनाव कम करने और स्थिरता बढ़ाने पर चर्चा हुई। पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान UAE के साथ संबंधों में नई शुरुआत चाहता है और दोनों पक्ष अतीत को पीछे छोड़कर भविष्य की ओर देखने के लिए तैयार हैं।

चीन-रूस से लेकर रूस-ईरान तक हुई अहम द्विपक्षीय बातचीत

BRICS मंच के इतर भी कई देशों के नेताओं ने अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन के बीच पश्चिमी देशों के टैरिफ और प्रतिबंधों से निपटने के साथ-साथ BRICS के भीतर स्थानीय मुद्राओं में भुगतान बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। वहीं रूस और ईरान के बीच उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे, ऊर्जा व्यापार और क्षेत्रीय संकट से जुड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे।चीन और मलेशिया के नेताओं के बीच दक्षिण चीन सागर, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और ASEAN से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई।

स्मार्ट सिटी और दूरस्थ रोजगार के लिए नए प्लेटफॉर्म

BRICS देशों ने स्मार्ट और टिकाऊ शहरों के विकास में एक-दूसरे की मदद करने पर जोर दिया। इसके लिए BRICS Urban Research and Knowledge Network और शहरी गतिशीलता से जुड़े केंद्रों की दिशा में काम करने की बात कही गई। दूरस्थ रोजगार के लिए अंतरराष्ट्रीय डिजिटल मंच विकसित करने की पहल भी सामने आई। इसके साथ ही रेलवे अनुसंधान नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

ऐतिहासिक वस्तुओं की वापसी और सांस्कृतिक सहयोग

BRICS देशों ने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की वस्तुओं को उनके मूल देशों को लौटाने की दिशा में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। कलाकारों और सांस्कृतिक क्षेत्र के पेशेवरों के प्रशिक्षण के साथ कलाकार रजिस्ट्री और सांस्कृतिक महोत्सवों जैसी पहलों पर भी चर्चा हुई। अक्तूबर में BRICS संसदीय मंच आयोजित होने की बात भी सामने आई है। इसमें महिला सांसदों की बैठक के साथ सदस्य देशों की संसदों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।

सम्मेलन में आर्थिक और तकनीकी सहयोग पर जोर

दिल्ली BRICS सम्मेलन में आर्थिक और तकनीकी सहयोग के साथ-साथ शहरी विकास, रोजगार, AI, स्वास्थ्य, ऊर्जा, संस्कृति और आपूर्ति श्रृंखला जैसे मुद्दों को प्रमुखता मिली है। इस सम्मेलन के इतर हुई द्विपक्षीय बैठकों ने भी BRICS को केवल आर्थिक मंच के बजाय व्यापक कूटनीतिक संवाद के मंच के रूप में सामने रखा है।