कोलकाता, 17 सितंबर 2026। पश्चिम बंगाल में प्रार्थना सभाओं और चर्च से जुड़े विवाद लगातार सामने आ रहे हैं। ईसाई संगठनों का दावा है कि पिछले दो महीनों में राज्य में चर्च या प्रार्थना सभाओं से जुड़ी 22 घटनाएं सामने आई हैं। इनमें से नौ मामलों में FIR दर्ज होने की बात कही गई है। दूसरी ओर कुछ हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों की ओर से इन सभाओं में कथित धर्मांतरण को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालिया घटनाओं के बाद कुछ इलाकों में रविवार की सामूहिक प्रार्थना रोककर ऑनलाइन प्रेयर का सहारा लिया जा रहा है। ईसाई संगठनों ने कई पास्टर्स को रविवार की प्रार्थना के बारे में पुलिस को सूचना देने की सलाह दी है। हालांकि सभी मामलों में आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की जांच में कुछ घटनाओं में जबरन धर्मांतरण के आरोपों के समर्थन में सबूत नहीं मिलने की बात भी सामने आई है।
दांतन में प्रार्थना सभा के दौरान हंगामा
13 सितंबर को पश्चिम मेदिनीपुर के दांतन इलाके में एक घर में रविवार की प्रार्थना सभा चल रही थी। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 40-45 लोगों की भीड़ वहां पहुंची और प्रार्थना रोकने की मांग की। ईसाई पक्ष ने महिलाओं के साथ बदसलूकी और घर में तोड़फोड़ के आरोप लगाए। इस घटना के बाद पुलिस की भूमिका को लेकर भी अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में शिकायत/FIR दर्ज होने की बात कही गई, जबकि एक पुलिस अधिकारी ने औपचारिक शिकायत दर्ज होने से इनकार किया था। इसलिए इस मामले में कानूनी स्थिति को जांच पूरी होने तक अंतिम रूप से नहीं कहा जा सकता।
बर्णपुर में प्रार्थना सभा के बाद विवाद
सात जून को आसनसोल के बर्णपुर में एक हॉल में रविवार की प्रार्थना सभा में 60-70 लोग मौजूद थे। पास्टर साएन सेनगुप्ता के अनुसार, दो युवक सभा के दौरान वीडियो बनाने लगे और बाद में धर्मांतरण को लेकर सवाल उठाए गए। पास्टर का कहना है कि सभा समाप्त होने के बाद हॉल के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई और प्रार्थना सभा का विरोध किया गया। पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस के मुताबिक विवाद का केंद्र कथित धर्मांतरण का आरोप था। जांच में जबरन धर्मांतरण का मामला नहीं मिलने के बाद लोगों को शांत कर वापस भेजा गया। इस घटना में पास्टर की ओर से FIR दर्ज नहीं कराई गई। पास्टर के मुताबिक, इसके बाद बर्णपुर में रविवार की सामूहिक प्रार्थना बंद कर दी गई और अब कुछ लोग मोबाइल के जरिए ऑनलाइन प्रार्थना में शामिल हो रहे हैं।
प्रार्थना सभा में शामिल सिख महिला ने भी बताई घटना
बर्णपुर की सभा में मौजूद डॉली कौर ने बताया कि वह सिख धर्म से हैं और अपनी इच्छा से प्रार्थना सभा में जाती थीं। उनके मुताबिक घटना के दौरान कुछ लोगों ने उनसे पूछा कि सिख होने के बावजूद वह चर्च क्यों आती हैं। उनका कहना है कि इस घटना के बाद इलाके में सामूहिक प्रार्थना करना मुश्किल हो गया है।
हिंदू संगठनों का दावा- धर्म के खिलाफ नहीं, जबरन धर्मांतरण के खिलाफ
विरोध में शामिल बताए जा रहे कुछ हिंदू संगठनों का कहना है कि उनका विरोध किसी व्यक्ति के धार्मिक विश्वास से नहीं, बल्कि कथित जबरन या लालच देकर धर्मांतरण से है। पश्चिम बर्धमान में सक्रिय बताए गए उज्ज्वल मोदक ने आरोप लगाया कि कुछ प्रार्थना सभाओं में बीमारी ठीक होने या अन्य लाभ का भरोसा देकर लोगों को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से किसी धर्म को मानता है तो उन्हें इससे आपत्ति नहीं है, लेकिन कथित लालच या दबाव के जरिए धर्म परिवर्तन का वे विरोध करेंगे। विश्व हिंदू परिषद से जुड़े अमिया सरकार ने भी इसी तरह का दावा किया है। उनका कहना है कि उनके कार्यकर्ता उन इलाकों की जानकारी जुटाते हैं जहां प्रार्थना सभाएं आयोजित होती हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग मामलों में नहीं हुई है और धार्मिक सभा में शामिल होना अपने आप में धर्मांतरण का प्रमाण नहीं है।
चर्च की जगह और मकान मिलने में भी परेशानी का दावा
पश्चिम बर्धमान के जामुरिया में जून के अंत में प्रार्थना सभा के दौरान विवाद की घटना सामने आने की बात कही गई है। ईसाई पक्ष के अनुसार पुलिस के पहुंचने के बाद सभा दोबारा शुरू हो सकी।आसनसोल में लंबे समय से एक मैरिज हॉल में रविवार की प्रार्थना सभा और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे। पास्टर के मुताबिक हालिया घटनाओं के बाद हॉल मालिक ने धार्मिक कार्यक्रमों के लिए जगह देने से मना कर दिया। ईसाई समुदाय के लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों के बाद मकान मालिक और हॉल संचालक किसी विवाद की आशंका में धार्मिक सभाओं के लिए जगह देने से बच रहे हैं।
ईसाई संगठनों का दावा- दो महीने में 22 मामले
बंगिया ख्रिष्टन परिषद के जनरल सेक्रेटरी हैरद मल्लिक के मुताबिक, पिछले दो महीनों में चर्च और प्रार्थना सभाओं से जुड़ी 22 घटनाएं सामने आई हैं। संगठन का दावा है कि इनमें सिर्फ 9 मामलों में FIR दर्ज हुई। ईसाई संगठनों का कहना है कि पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में अलग-अलग संप्रदायों के लोग चर्च की स्थायी इमारत उपलब्ध नहीं होने के कारण घरों, कम्युनिटी हॉल और मैरिज हॉल में प्रार्थना सभाएं करते हैं। इन स्थानों पर विवाद होने के कारण कई जगह हाउस चर्च की गतिविधियां रोक दी गई हैं। सितंबर की शुरुआत में भी पश्चिम बंगाल के कई जिलों में प्रार्थना सभाओं को रोकने की घटनाओं की रिपोर्ट सामने आई थी। इससे पहले उलुबेरिया में प्रार्थना सभा के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ की शिकायत के बाद FIR दर्ज होने की जानकारी पुलिस की ओर से दी गई थी।
पुलिस और प्रशासन का क्या कहना है ?
पुलिस का रुख अलग-अलग मामलों में जांच के आधार पर सामने आया है। बर्णपुर मामले में पुलिस ने जबरन धर्मांतरण के आरोपों की पुष्टि नहीं होने की बात कही। वहीं, अन्य मामलों में तोड़फोड़, मारपीट या प्रार्थना सभा में व्यवधान की शिकायतों पर जांच जारी है। पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक मामलों से जुड़े मंत्री क्षुदिराम टुडू ने कहा है कि हर व्यक्ति को शांतिपूर्वक अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है। साथ ही, यदि जबरन धर्मांतरण की शिकायत मिलती है तो कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इन घटनाओं को लेकर दो प्रमुख दावे सामने हैं—ईसाई संगठनों का कहना है कि प्रार्थना सभाओं में लगातार हस्तक्षेप और हमले हो रहे हैं, जबकि विरोध करने वाले पक्ष कथित जबरन धर्मांतरण को लेकर आपत्ति जता रहे हैं। कई मामलों में पुलिस जांच अभी जारी है।




