वॉशिंगटन, 2 अक्टूबर 2026 : साल 2019 में भारत के मिशन शक्ति एंटी-सैटेलाइट (ASAT) परीक्षण ने अंतरिक्ष में भारत की रणनीतिक क्षमता को दुनिया के सामने रखा था। अब अमेरिका के पूर्व खुफिया अधिकारी David Grusch ने उस परीक्षण के दौरान अमेरिकी इंटेलिजेंस कम्युनिटी की प्रतिक्रिया को लेकर कई दावे किए हैं। ग्रुश के मुताबिक, 27 मार्च 2019 को भारत ने अचानक अपने एक सैटेलाइट को एंटी-सैटेलाइट मिसाइल से निशाना बनाया। उनका दावा है कि अमेरिका को भारत के मिसाइल परीक्षण की जानकारी तो थी, लेकिन यह अनुमान नहीं था कि परीक्षण का उद्देश्य किसी सैटेलाइट को नष्ट करना होगा।

2019 में भारत ने किया था 'मिशन शक्ति

भारत ने 27 मार्च 2019 को मिशन शक्ति के तहत ASAT टेस्ट किया था। परीक्षण में भारत की मिसाइल ने लो अर्थ ऑर्बिट में मौजूद Microsat-R सैटेलाइट को सफलतापूर्वक निशाना बनाया था। इस परीक्षण के बाद भारत उन देशों के समूह में शामिल हो गया, जिन्होंने अंतरिक्ष में सैटेलाइट को नष्ट करने की क्षमता का प्रदर्शन किया है।

David Grusch ने क्या दावा किया ?

अमेरिकी पूर्व खुफिया अधिकारी David Grusch ने पॉडकास्टर Joe Rogan के साथ एक बातचीत में 2019 की घटना को याद किया। उनके मुताबिक उस समय वह अमेरिकी National Reconnaissance Office (NRO) के ऑपरेशन्स सेंटर में ड्यूटी पर थे। ग्रुश ने दावा किया कि भारत ने परीक्षण से पहले NOTAM जारी किया था इसलिए अमेरिका को यह जानकारी थी कि भारत मिसाइल टेस्ट करने वाला है। हालांकि, उनके अनुसार अमेरिकी खुफिया तंत्र को यह पता नहीं था कि मिसाइल का इस्तेमाल ASAT परीक्षण के लिए किया जाएगा। उनके मुताबिक परीक्षण के बाद NRO में अमेरिकी सैटेलाइट्स की सुरक्षा और संभावित अंतरिक्ष मलबे को लेकर तत्काल आकलन शुरू किया गया।

अमेरिकी सैटेलाइट्स के मलबे को लेकर चिंता

ASAT परीक्षण के बाद सबसे बड़ी चिंताओं में से एक अंतरिक्ष में पैदा हुआ मलबा था। किसी सैटेलाइट को नष्ट करने पर उसके टुकड़े कक्षा में फैल सकते हैं और दूसरे अंतरिक्ष यानों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। ग्रुश ने बताया कि उन्होंने उस समय ऑर्बिटल एनालिस्ट से मलबे के संभावित क्षेत्र का आकलन करने और यह जांचने को कहा कि क्या किसी अमेरिकी सैटेलाइट को अपनी कक्षा बदलने की जरूरत पड़ सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि उस समय वह NRO डायरेक्टर को जानकारी देने के लिए तेजी से उनके कार्यालय पहुंचे थे।

क्या अमेरिका को पहले से पता था ?

भारत के ASAT टेस्ट को लेकर उस समय अमेरिका की सार्वजनिक प्रतिक्रिया में यह बात सामने आई थी कि वॉशिंगटन को भारत के परीक्षण की जानकारी थी। हालांकि, ग्रुश के हालिया दावे का फोकस इस बात पर है कि अमेरिका को परीक्षण के वास्तविक ASAT स्वरूप की जानकारी पहले से नहीं थी। इसलिए उनके बयान से यह अंतर सामने आता है कि अमेरिकी अधिकारियों को मिसाइल परीक्षण की सूचना होने और उसके वास्तविक उद्देश्य की जानकारी होने के बीच अंतर था।

अंतरिक्ष में भारत की रणनीतिक क्षमता

मिशन शक्ति भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रदर्शन था। इस परीक्षण के जरिए भारत ने लो अर्थ ऑर्बिट में किसी उपग्रह को इंटरसेप्ट करने की क्षमता का प्रदर्शन किया। ASAT परीक्षणों को लेकर अंतरिक्ष मलबे और अंतरिक्ष की दीर्घकालिक सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठती रही हैं। भारत ने उस समय कहा था कि परीक्षण का उद्देश्य देश की अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा के लिए क्षमता प्रदर्शित करना था। David Grusch के ताजा बयान ने 2019 के मिशन शक्ति टेस्ट के दौरान अमेरिकी खुफिया तंत्र की तैयारियों और प्रतिक्रिया पर नया दावा सामने रखा है।