नई दिल्ली/न्यूयॉर्क, 24 सितंबर 2026 : भारत ने वैश्विक कूटनीति में एक नई बहुपक्षीय पहल P4M यानी Partners for Multilateralism, International Law, Peace and Prosperity के जरिए अपनी भूमिका काफी मजबूत कर ली है। यह पहल 21 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई-लेवल वीक के दौरान लॉन्च की गई। P4M को यूरोपीय संघ, भारत, ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा और केन्या ने मिलकर शुरू किया है। इसका मकसद अलग-अलग क्षेत्रों और राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले देशों को एक मंच पर लाकर बहुपक्षीय व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय कानून, शांति, समावेशी विकास और वैश्विक सहयोग को मजबूत करना है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में हुए पहले P4M Summit की सह-अध्यक्षता की। उन्होंने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था पर दबाव, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और संघर्षों के बीच multilateralism को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।
P4M क्या है और इसका मकसद क्या है ?
P4M को किसी पारंपरिक सैन्य या आर्थिक गठबंधन के तौर पर नहीं, बल्कि flexible और issue-based multilateral initiative के रूप में देखा जा रहा है। इसके संस्थापक देशों ने संयुक्त घोषणा में कहा है कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे अधिक प्रभावी, प्रतिनिधित्वपूर्ण, समावेशी और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।
P4M के एजेंडे में कई बड़े मुद्दे शामिल हैं—
- UN और Multilateral Institutions में Reform
- International Law और Peace
- Global Supply Chains की मजबूती
- International Trade
- Global Financial Architecture
- Artificial Intelligence और Digital Transformation
- Climate Change
- Global Health
- Sustainable और Inclusive Development
यानी इस पहल का दायरा सिर्फ संयुक्त राष्ट्र सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और नई तकनीक से जुड़े मुद्दे भी इसके एजेंडे में हैं।
क्या इससे UN Security Council Reform का रास्ता साफ होगा?
यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि भारत लंबे समय से UN Security Council में सुधार और स्थायी सदस्यता के विस्तार की मांग करता रहा है। मौजूदा Security Council में 15 सदस्य हैं। इनमें अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन पांच स्थायी सदस्य हैं और इनके पास veto power है। बाकी 10 सदस्य अस्थायी होते हैं। भारत का तर्क रहा है कि मौजूदा UN संस्थागत ढांचा आज की दुनिया की राजनीतिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करता। P4M की संयुक्त घोषणा में भी multilateral institutions को अधिक representative और effective बनाने की बात कही गई है। इसलिए यह मंच भारत के reformed multilateralism के एजेंडे के साथ मेल खाता है। लेकिन यहां एक अहम बात समझना जरूरी है—P4M बनने से भारत को Security Council की स्थायी सदस्यता अपने आप नहीं मिलती और न ही इससे UN Charter में बदलाव हो जाता है। Security Council की संरचना बदलने के लिए अलग अंतरराष्ट्रीय और संस्थागत प्रक्रिया की जरूरत होगी। इसलिए P4M को UN reform के लिए एक कूटनीतिक मंच और समर्थन जुटाने के अतिरिक्त माध्यम के रूप में देखना अधिक सटीक होगा।
जयशंकर ने क्या कहा?
P4M Summit में जयशंकर ने कहा कि दुनिया ऐसे दौर से गुजर रही है जब वैश्विक व्यवस्था पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने संघर्ष, geopolitical competition और आर्थिक disruptions के बीच multilateral cooperation को मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने supply-chain disruptions, emerging technologies और fuel, food, fertiliser तथा finance यानी 4F crisis जैसे मुद्दों पर भी ध्यान आकर्षित किया। जयशंकर के मुताबिक, बदलती दुनिया में देशों को ऐसे frameworks की जरूरत है जो emerging technologies के जोखिमों से निपट सकें और global supply chains को अधिक resilient बना सकें।
भारत के लिए P4M क्यों अहम है ?
भारत के लिए इस पहल की अहमियत कई स्तरों पर है।
1. UN Reform के लिए नया मंच
भारत को उन देशों के साथ काम करने का एक और मंच मिला है जो multilateral institutions को अधिक representative और effective बनाने की बात कर रहे हैं।
2. Global South की आवाज
भारत लंबे समय से Global South के देशों की चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अधिक जगह देने की बात करता रहा है। P4M में एशिया, अफ्रीका, यूरोप, लैटिन अमेरिका और प्रशांत क्षेत्र से जुड़े देश शामिल हैं।
3. Supply Chain पर सहयोग
कोविड महामारी, युद्धों और geopolitical tensions के बाद global supply chains को लेकर चिंता बढ़ी है। P4M ने diversified और resilient supply chains को अपने प्रमुख सहयोग क्षेत्रों में शामिल किया है।
4. AI और नई Technology
Artificial Intelligence और digital transformation भी P4M के एजेंडे में हैं। ऐसे समय में जब AI governance और emerging technologies को लेकर दुनिया में अलग-अलग regulatory approaches सामने आ रही हैं, यह सहयोग का एक अहम क्षेत्र बन सकता है।
5. भारत की Strategic Autonomy
P4M में शामिल देशों का समूह किसी एक पारंपरिक geopolitical bloc तक सीमित नहीं है। इससे भारत को अलग-अलग देशों के साथ issue-based cooperation बढ़ाने का एक और मंच मिलता है।
क्या P4M अमेरिका-चीन के बीच नया शक्ति केंद्र है?
P4M को सीधे अमेरिका या चीन के खिलाफ बने किसी नए गुट के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।आधिकारिक घोषणा का जोर multilateral cooperation, international law, UN system reform और shared global challenges पर है। समूह ने किसी एक देश को लक्ष्य बनाकर गठबंधन बनाने की घोषणा नहीं की है। यही वजह है कि भारत के लिए इसका महत्व किसी नए power bloc का हिस्सा बनने के बजाय अलग-अलग मुद्दों पर साझेदारी बढ़ाने में हो सकता है।
असली चुनौती अब आगे है
P4M की शुरुआत कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सदस्य देश घोषणाओं को कितनी तेजी से ठोस नीतियों और संयुक्त पहलों में बदलते हैं। UN reform, supply-chain resilience, AI governance, climate change और global finance जैसे मुद्दों पर अलग-अलग देशों के हित हमेशा समान नहीं होते। इसलिए P4M के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी—साझा एजेंडे को वास्तविक परिणामों में बदलना।
भारत के लिए आगे का रास्ता
P4M भारत को UN reform के मुद्दे पर नए देशों के साथ संवाद बढ़ाने का अवसर देता है। लेकिन Security Council reform की प्रक्रिया अपनी अलग संस्थागत चुनौतियों के साथ आगे बढ़ेगी। इसलिए फिलहाल P4M को भारत की स्थायी UNSC सदस्यता का सीधा रास्ता कहने के बजाय, भारत की multilateral diplomacy और UN reform campaign को समर्थन देने वाले एक नए मंच के रूप में देखना अधिक तथ्यात्मक होगा। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि P4M किन मुद्दों पर ठोस संयुक्त कार्रवाई करता है और क्या यह पहल UN system में सुधार को लेकर व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन को प्रभावित कर पाती है।




