नई दिल्ली, 9 सितंबर 2026 : भारत और रूस के बीच 75 Sukhoi-57 Fighter Jets की संभावित डील को लेकर बातचीत चल रही है। सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के बीच सौदे की शर्तों पर चर्चा आगे बढ़ चुकी है। अगर यह समझौता होता है तो इसकी कुल कीमत करीब एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। संभावित पैकेज में सिर्फ लड़ाकू विमान ही नहीं, बल्कि हथियार, स्पेयर पार्ट्स, ट्रेनिंग, सिम्युलेटर और लंबे समय के रखरखाव जैसी सुविधाएं भी शामिल हो सकती हैं।

Su-57 के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भारत का जोर

भारत इस संभावित सौदे में सिर्फ विमान खरीदने के बजाय Technology Transfer पर भी जोर दे रहा है। भारत की कोशिश है कि रूस से ऐसी तकनीक हासिल की जाए, जिसका इस्तेमाल भविष्य में स्वदेशी लड़ाकू विमान विकसित करने में किया जा सके। रूस पहले ही भारत में Su-57 के निर्माण की पेशकश कर चुका है। भारत चाहता है कि इस परियोजना में उसकी घरेलू कंपनियों की पर्याप्त भागीदारी हो और जरूरी तकनीक तक पहुंच भी मिले।

मोदी-पुतिन की मुलाकात में हो सकता है बड़ा फैसला

BRICS समिट से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नई दिल्ली में मुलाकात प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस बैठक में रक्षा सहयोग के साथ-साथ Su-57 Deal पर भी चर्चा हो सकती है। दोनों नेताओं के बीच रक्षा, परमाणु ऊर्जा और भारत-रूस रणनीतिक सहयोग से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।

वायुसेना को अभी Su-57 की क्षमता पर सवाल

हालांकि भारत में Su-57 को लेकर सभी पक्ष पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। भारतीय वायुसेना पहले रूस के साथ पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने वाली परियोजना में शामिल थी, लेकिन बाद में भारत इस प्रोजेक्ट से बाहर हो गया था। उस समय विमान की Stealth Capability, रडार से बचने की क्षमता और जरूरी तकनीक के हस्तांतरण को लेकर सवाल उठे थे। अब भारत Su-57 की वास्तविक क्षमता, उसके सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और अलग-अलग हथियारों के साथ उसकी कार्यक्षमता का आकलन कर रहा है।

Su-57 को क्यों माना जा रहा है अहम ?

Su-57 रूस का पांचवीं पीढ़ी का बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है। इसे हवा, जमीन और समुद्र से जुड़े विभिन्न लक्ष्यों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी खासियतों में Stealth Technology, हाई स्पीड, बेहतर मैन्युवरेबिलिटी और आधुनिक सेंसर सिस्टम शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत Su-57 को अपने मौजूदा लड़ाकू विमानों और एयर डिफेंस नेटवर्क के साथ प्रभावी तरीके से जोड़ पाता है, तो इससे भारतीय वायुसेना की क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हो सकती है। Su-57 को राफेल, सुखोई-30 MKI और AWACS जैसे प्लेटफॉर्म के साथ नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणाली में इस्तेमाल करने की संभावना पर भी चर्चा होती रही है।

Su-57E और अमेरिकी F-35 में क्या अंतर ?

Su-57 का एक्सपोर्ट वर्जन Su-57E है। इसकी तुलना अक्सर अमेरिकी F-35 से की जाती है।उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक Su-57E की अधिकतम गति करीब 2,470 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जाती है, जबकि F-35A की अधिकतम गति लगभग 1,960 किलोमीटर प्रति घंटा है। हालांकि, सिर्फ रफ्तार के आधार पर दोनों विमानों की तुलना करना सही नहीं होगा। Stealth, Sensors, Electronic Warfare और Network Connectivity जैसे क्षेत्रों में F-35 की क्षमताओं को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। Su-57 की डिजाइन में स्टील्थ के साथ हाई स्पीड और बेहतर मैन्युवरेबिलिटी पर भी खास जोर दिया गया है।

सुखोई-30 MKI को भी अपग्रेड कर रहा भारत

भारत अपने मौजूदा Su-30 MKI बेड़े की क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। 63 हजार करोड़ रुपये की परियोजना के तहत 84 Su-30 MKI विमानों को अपग्रेड करने की योजना है। भारत लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को भी Su-30 MKI के साथ जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है। इससे विमान की लंबी दूरी के लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता बढ़ सकती है।

रूस के साथ परमाणु ऊर्जा पर भी होगी बातचीत

मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा सहयोग के अलावा Civil Nuclear Energy भी अहम मुद्दा हो सकता है।रूस तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में भारत का प्रमुख साझेदार है। दोनों देश परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आगे सहयोग बढ़ाने के विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं। परमाणु पनडुब्बियों से जुड़ी तकनीकी सहायता समेत रणनीतिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं भी बातचीत का हिस्सा हो सकती हैं।

S-400 की बाकी सप्लाई भी एजेंडे में

भारत और रूस के बीच S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की बाकी डिलीवरी पर भी चर्चा हो सकती है। भारत ने रूस के साथ पांच S-400 सिस्टम के लिए करीब 5.43 अरब डॉलर का सौदा किया था। इनमें से अधिकांश सिस्टम भारत को मिल चुके हैं और बाकी डिलीवरी को लेकर भी दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है।

यूक्रेन युद्ध पर भी चर्चा की संभावना

मोदी-पुतिन बैठक में यूक्रेन युद्ध का मुद्दा भी उठ सकता है। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से पहले कहा गया है कि मॉस्को युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में भारत की कोशिशों का स्वागत करता है। ऐसे में आगामी बैठक में भारत-रूस रक्षा संबंधों के साथ-साथ Ukraine War, Global Diplomacy और Strategic Partnership जैसे मुद्दे भी चर्चा में रह सकते हैं।