नई दिल्ली, 21 सितंबर 2026 : भारत के BRICS देशों के साथ व्यापारिक संबंधों में हाल के महीनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान भारत का चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका को निर्यात 34 प्रतिशत बढ़कर करीब 19.9 अरब डॉलर पहुंच गया। इनमें चीन भारत के लिए सबसे बड़ा बाजार रहा, जहां निर्यात 39 प्रतिशत बढ़कर करीब 9.6 अरब डॉलर हो गया। यह आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं जब अमेरिका रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ा रहा है। इसी बीच अमेरिकी संसद ने रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़ा एक व्यापक विधेयक पारित किया है, जिसमें राष्ट्रपति को रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर अभी 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो चुका है।

BRICS देशों को भारत का Export कितना बढ़ा ?

वाणिज्य मंत्रालय से जुड़े आंकड़ों के आधार पर सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों में चार मूल BRICS देशों—चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका—को भारत का निर्यात 34 प्रतिशत बढ़ा। इन चारों देशों में चीन सबसे बड़ा योगदान देने वाला बाजार रहा। चीन को भारत का निर्यात करीब 39 प्रतिशत बढ़कर 9.6 अरब डॉलर हो गया। दक्षिण अफ्रीका को निर्यात में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई, जबकि ब्राजील और रूस को भेजे जाने वाले सामान में भी बढ़ोतरी हुई। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिकी व्यापार दबाव के बीच भारत के अन्य बड़े बाजारों के साथ व्यापारिक संबंध भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

अमेरिका का Russia Sanctions Bill क्या है ?

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने सितंबर 2026 में रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों और टैरिफ से जुड़ा विधेयक पारित किया। इससे पहले इसे अमेरिकी सीनेट की मंजूरी मिल चुकी थी। विधेयक का उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। इस कानून में राष्ट्रपति को उन देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की शक्ति देने का प्रावधान है जो रूस से तेल और गैस की खरीद जारी रखते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, चीन और भारत इस प्रावधान के संभावित प्रभाव वाले प्रमुख देश हैं, क्योंकि दोनों रूस से ऊर्जा का आयात करते हैं।हालांकि, 100 प्रतिशत टैरिफ भारत पर स्वतः लागू नहीं हुआ है। इसके लिए अमेरिकी प्रशासन की ओर से अलग कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया की जरूरत होगी।

India-US Relations पर क्या असर पड़ सकता है ?

रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच मतभेद पहले से मौजूद हैं। नई अमेरिकी प्रतिबंध नीति दोनों देशों के व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों के लिए एक नया मुद्दा बन सकती है। भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों और व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए रूस समेत अलग-अलग देशों से ऊर्जा खरीद जारी रखी है। नई दिल्ली का तर्क रहा है कि ऊर्जा खरीद के फैसले उपलब्धता, कीमत, बाजार की परिस्थितियों और आर्थिक जरूरतों जैसे कारकों पर आधारित होते हैं। ऐसे में आने वाले समय में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में टैरिफ, रूस से तेल खरीद और रणनीतिक साझेदारी तीन अहम मुद्दे बने रह सकते हैं।

China के साथ India का Trade क्यों अहम है ?

दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ अमेरिका रूस के साथ व्यापार को लेकर भारत पर दबाव बढ़ा रहा है, वहीं भारत का चीन को निर्यात भी बढ़ रहा है। अप्रैल-अगस्त 2026 के दौरान चीन को भारत का निर्यात 39 प्रतिशत बढ़कर 9.6 अरब डॉलर पहुंचा। यह वृद्धि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों के आकार को दिखाती है, भले ही भारत और चीन के बीच कई रणनीतिक और आर्थिक मतभेद मौजूद हों।भारत की विदेश नीति में अलग-अलग देशों के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों के अनुसार संबंध बनाए रखने की नीति को अक्सर Strategic Autonomy के रूप में वर्णित किया जाता है। इसलिए रूस से ऊर्जा खरीद, अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी और चीन के साथ व्यापार—इन तीनों को एक साथ देखना जरूरी है।

Trump-Xi Meeting पर भी दुनिया की नजर

इसी बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 23 से 25 सितंबर 2026 तक अमेरिका की राजकीय यात्रा पर जा रहे हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। यह यात्रा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर हो रही है। ऐसे समय में जब अमेरिका रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है और भारत-चीन के व्यापार आंकड़ों में बढ़ोतरी दिख रही है, Trump-Xi बातचीत पर भी वैश्विक बाजारों और कूटनीतिक हलकों की नजर रहेगी।

10% का आंकड़ा क्या बताता है ?

भारत के कुल निर्यात में चार मूल BRICS देशों की हिस्सेदारी अप्रैल-अगस्त 2026 के दौरान करीब 9.2 प्रतिशत रही, जो पिछले साल की समान अवधि में करीब 8.1 प्रतिशत थी। यानी BRICS के इन प्रमुख बाजारों का भारत के निर्यात में महत्व बढ़ा है। इसलिए मौजूदा तस्वीर को केवल भारत-अमेरिका तनाव के तौर पर देखना पर्याप्त नहीं होगा। भारत एक तरफ अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ व्यापार एवं रणनीतिक संबंध बनाए हुए है, तो दूसरी तरफ BRICS देशों और अन्य बाजारों के साथ भी अपने आर्थिक रिश्ते बढ़ा रहा है।