नई दिल्ली, 30 सितंबर 2026 : पाकिस्तान के एयरस्पेस पर जारी प्रतिबंध के बीच भारत अब लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए वैकल्पिक हवाई मार्ग तलाश रहा है। इसी क्रम में भारत और चीन के बीच शिनजियांग के होटन क्षेत्र से होकर वैकल्पिक एयर रूट शुरू करने को लेकर बातचीत चल रही है। नागर विमानन मंत्री राममोहन नायडू ने इसकी भी पुष्टि कर दी है। उन्होंने बताया कि होटन रूट को लेकर दोनों देशों के बीच चर्चा जारी है और विदेश मंत्रालय भी इस प्रक्रिया में चीन के साथ बातचीत कर रहा है। हालांकि अभी इस रूट को लेकर कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और इसके शुरू होने की समय सीमा भी तय नहीं है।

पाकिस्तान के एयरस्पेस से बचने की कोशिश

पाकिस्तान ने अप्रैल 2025 में भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था। इसके बाद पश्चिम की ओर जाने वाली कई भारतीय उड़ानों को पाकिस्तान से बचने के लिए अरब सागर और ओमान की दिशा में लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस डायवर्जन से कुछ उड़ानों के समय में करीब 45 मिनट से दो घंटे तक की बढ़ोतरी हुई है। इससे ईंधन खपत और एयरलाइंस की परिचालन लागत पर भी असर पड़ता है।

क्या है होटन एयर रूट ?

प्रस्तावित रूट चीन के शिनजियांग क्षेत्र के होटन के आसपास से गुजर सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली और मुंबई से पश्चिम की ओर जाने वाली कुछ उड़ानों को भारत के उत्तरी हिस्से से होते हुए चीनी एयरस्पेस में प्रवेश कराने और फिर मध्य एशिया की दिशा में आगे बढ़ाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। संभावित रूट आगे चलकर यूरोप, ब्रिटेन और उत्तरी अमेरिका की ओर जाने वाले मौजूदा एयर कॉरिडोर से जुड़ सकता है। इससे पाकिस्तान के एयरस्पेस पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ

होटन रूट को लेकर बातचीत जारी है, मगर अभी भारत और चीन के बीच कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है। इस तरह के एयर कॉरिडोर के लिए दोनों देशों के बीच सहमति के साथ एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट, सुरक्षा और अन्य परिचालन संबंधी व्यवस्थाओं पर भी समन्वय जरूरी होगा। इसलिए फिलहाल इसे प्रस्तावित वैकल्पिक एयर रूट के तौर पर ही देखा जा रहा है। यह कब से भारतीय विमानों के लिए उपलब्ध होगा, इस बारे में सरकार की ओर से कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई है।

भारत-चीन संबंधों के बीच नया विमानन पहलू

होटन रूट पर बातचीत ऐसे समय हो रही है जब भारत और चीन के बीच संबंधों में धीरे-धीरे सुधार की कोशिशें जारी हैं। हालांकि, इस प्रस्ताव को फिलहाल किसी व्यापक रणनीतिक बदलाव के रूप में देखने के बजाय भारतीय विमानन कंपनियों के लिए पाकिस्तान के एयरस्पेस प्रतिबंध से पैदा हुई परिचालन चुनौतियों के समाधान के तौर पर देखा जा रहा है। यदि भविष्य में इस रूट पर सहमति बनती है, तो भारतीय एयरलाइंस को पश्चिमी देशों की उड़ानों के लिए पाकिस्तान से अलग एक अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है।