नई दिल्ली, 10 सितंबर 2026। देशभऱ में बच्चों के गुम होने, अपहरण और जबरन उठा ले जाने के मामलों में जांच व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका पर शीर्ष अदालत ने केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा है। इस याचिका में ऐसे मामलों की जांच के लिए पूरे देश में एक समान सिस्टम, तय समय सीमा में जांच और विशेष जांच प्रक्रिया लागू करने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या किया ?
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले में केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत ने शिक्षा मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय, गृह मंत्रालय और विधि आयोग से भी जवाब मांगा है।
क्या है जनहित याचिका ?
यह याचिका अधिवक्ता और याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दाखिल की है। इस याचिका में बच्चों के गुम होने, अपहरण और जबरन ले जाने के मामलों की जांच के लिए देशभर में एक समान व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। याचिका का मुख्य जोर इस बात पर है कि बच्चों से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय हो और कार्रवाई में अनावश्यक देरी न हो।
याचिका में क्या-क्या मांग की गई ?
याचिका में मुख्य रूप से चार बड़ी मांगें रखी गई हैं :
- बच्चों के अपहरण और जबरन ले जाने के मामलों के लिए देशभर में एक समान जांच व्यवस्था बनाई जाए।
- जांच को पूरा करने के लिए समयबद्ध प्रक्रिया लागू की जाए।
- ऐसे मामलों के लिए विशेष जांच प्रक्रिया तैयार की जाए।
- मामलों की जल्द सुनवाई के लिए समर्पित अदालतों की व्यवस्था की जाए।
मौजूदा व्यवस्था पर क्या सवाल?
याचिका में कहा गया है कि लापता और अपहृत बच्चों से जुड़े मामलों में जांच और कार्रवाई के दौरान कई स्तरों पर समन्वय की जरूरत होती है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज और आपस में समन्वित हो, इसके लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है। याचिका का उद्देश्य बच्चों से जुड़े मामलों में तेज जांच, बेहतर समन्वय और समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।
अब आगे क्या होगा ?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। केंद्र, राज्यों और अन्य पक्षों के जवाब मिलने के बाद मामले में आगे की सुनवाई और कार्रवाई होगी।




