कोलकाता, 7 सितंबर 2026 : तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को सेबाश्रय स्वास्थ्य शिविर से जुड़े मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें 30 नवंबर तक गिरफ्तारी से संरक्षण दिया है। इसके साथ ही उनके खिलाफ लगातार FIR दर्ज होने को लेकर हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर एक ही व्यक्ति के खिलाफ लगातार मामले दर्ज होते रहे तो अदालत को इस पर कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से 'बहुत हुआ, अब और नहीं' जैसी टिप्पणी भी की गई। कोर्ट ने इस मामले में सीएम व भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी को पहले मिली राहत का भी विस्तार से जिक्र किया।
गलत इलाज की शिकायत पर कोर्ट के सवाल
यह मामला डायमंड हार्बर में आयोजित सेबाश्रय स्वास्थ्य शिविर से जुड़ा है। शिविर में नियमों का पालन नहीं करने और मरीजों के कथित गलत इलाज को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। भाजपा नेता अभिजीत दास ने जुलाई में विष्णुपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद एक मरीज के परिवार की शिकायत के आधार पर रवींद्रनगर थाने में अभिषेक बनर्जी समेत कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। अभिषेक बनर्जी ने गिरफ्तारी से राहत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल किया कि गलत इलाज की शिकायत को लेकर क्या मरीज या उसके परिवार ने राज्य चिकित्सा परिषद, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग या उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े सक्षम प्राधिकारों का रुख किया था। अदालत ने कहा कि चिकित्सा लापरवाही की जांच के लिए संबंधित संस्थाएं मौजूद हैं। ऐसे में अभिषेक बनर्जी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत क्यों है? कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि अभिषेक खुद किसी मरीज का इलाज नहीं कर रहे थे।
बिना अनुमति स्वास्थ्य शिविर लगाने का आरोप
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि अभिषेक बनर्जी भले ही सीधे तौर पर मरीजों के इलाज में शामिल नहीं थे, लेकिन कथित तौर पर आवश्यक अनुमति के बिना स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया था। सरकार की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि शिविर में एक्स-रे और अल्ट्रासोनोग्राफी जैसी जांच कराई गईं। इस पर अदालत ने फिर सवाल किया कि अगर अभिषेक सीधे इलाज से जुड़े नहीं थे, तो उनकी हिरासत में पूछताछ का औचित्य क्या है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस अपनी जांच जारी रख सकती है और आरोपों की सच्चाई जांच के बाद सामने आएगी। फिलहाल अदालत ने हिरासत में लेकर पूछताछ की आवश्यकता नहीं मानी है।
शुभेंदु अधिकारी के मामले का भी दिया उदाहरण
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सीएम व भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के एक पुराने मामले का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि पिछले कुछ समय में एक व्यक्ति के खिलाफ लगातार कई मामले दर्ज किए जाने को लेकर वह चिंतित है। हाई कोर्ट ने संकेत दिया कि अगर अभिषेक बनर्जी के खिलाफ भी FIR दर्ज होने का सिलसिला जारी रहता है तो उनके मामले में शुभेंदु अधिकारी को मिली राहत जैसी व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ लगातार FIR दर्ज किए जाने के मामले में हाईकोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका है कि अदालत की अनुमति के बिना उनके खिलाफ नई FIR दर्ज नहीं की जा सकती। हालांकि अभिषेक बनर्जी के मामले में अदालत ने अभी अंतिम फैसला नहीं दिया है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि शिकायतों और FIR का सिलसिला जारी रहने की स्थिति में आगे व्यापक निर्देश दिए जा सकते हैं। इसके साथ ही मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और आरोपों की अंतिम सच्चाई पर फिलहाल कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।




