डिब्रूगढ़, असम, 28 सितंबर 2026 : करीब आठ दशक बाद असम के डिब्रूगढ़ से ब्रह्मपुत्र नदी के रास्ते अंतरराष्ट्रीय कार्गो मूवमेंट फिर शुरू होने की खबर है। डिब्रूगढ़ के बोगीबील इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट टर्मिनल से दो मालवाहक जहाज बांग्लादेश के लिए रवाना किए जा रहे हैं। इन दोनों जहाजों पर 1,080 टन मेथेनॉल लदा है,जिसे असम पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (APL) ने नमरूप में तैयार किया है। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि यह आजादी के बाद डिब्रूगढ़ से ब्रह्मपुत्र के जरिए किसी विदेशी गंतव्य के लिए पहला commercial cargo movement बताया जा रहा है। इससे ब्रह्मपुत्र को एक बार फिर असम और अंतरराष्ट्रीय बाजार के बीच माल ढुलाई के रास्ते के रूप में विकसित करने की संभावना बढ़ी है।
दो जहाजों पर 1,080 टन मेथेनॉल
इस पहली खेप में दो cargo vessels शामिल हैं। दोनों जहाजों पर 27-27 कंटेनर रखे गए हैं और प्रत्येक कंटेनर में करीब 20 टन मेथेनॉल है।
यानी —
- कुल जहाज: 2
- कुल कंटेनर: 54
- प्रति कंटेनर: करीब 20 टन मेथेनॉल
- प्रति जहाज: करीब 540 टन
- कुल खेप: करीब 1,080 टन
- मेथेनॉल का उत्पादन: Assam Petro-Chemicals Limited, Namrup
दोनों जहाज करीब 30 साल पुराने बताए गए हैं और इस ऑपरेशन के लिए तैयार किए गए हैं।
ब्रह्मपुत्र पर 783 KM का सफर
बोगीबील से बांग्लादेश सीमा तक इन जहाजों को ब्रह्मपुत्र के रास्ते लगभग 783 किलोमीटर की दूरी तय करनी है। इस यात्रा में करीब सात दिन लगने का अनुमान है। यह सिर्फ एक कार्गो खेप नहीं है। इसके जरिए National Waterway-2 यानी ब्रह्मपुत्र पर अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई की व्यावसायिक संभावनाओं का भी परीक्षण हो रहा है।
बोगीबील टर्मिनल क्यों है खास ?
बोगीबील में विकसित किया जा रहा इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट टर्मिनल अब अंतरराष्ट्रीय कार्गो के लिए तैयार हो रहा है। यहां कस्टम्स ऑफिस, जेट्टी और वेयरहाउस जैसी सुविधाएं तैयार की गई हैं। वहीं लाइटहाउस और Regional Centre of Excellence का काम भी आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार के मुताबिक बोगीबील National Waterway-2 पर विकसित किए जा रहे महत्वपूर्ण जलमार्ग बुनियादी ढांचे का हिस्सा है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 2025 में IWAI और Assam Petro-Chemicals Ltd. के बीच हुए समझौते का उद्देश्य मेथेनॉल और फॉर्मेलिन को Indo-Bangladesh Protocol Route और National Waterways के जरिए ले जाना भी था। यानी मौजूदा खेप के पीछे जलमार्ग आधारित लॉजिस्टिक्स को विकसित करने की पहले से चल रही योजना है।
सिर्फ मेथेनॉल नहीं, आगे और क्या जा सकता है ?
अगर बोगीबील से अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग परिवहन नियमित और व्यावसायिक रूप से सफल होता है, तो असम और आसपास के इलाकों के कई उत्पादों को इस नेटवर्क से जोड़ने की संभावना है।
IWAI के अधिकारियों के मुताबिक भविष्य में ब्रह्मपुत्र के रास्ते—
- BCPL के उत्पाद
- पॉलिमर्स
- पेट्रोलियम उत्पाद
- कोयला
- चाय उद्योग से जुड़ा माल
- कृषि उत्पाद
जैसी वस्तुओं को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की संभावना है। असम के कृषि उत्पादों, जैसे काजी नींबू, भूत जोलोकिया और काली मिर्च, के लिए भी नए बाजार खुलने की संभावना बताई गई है। हालांकि इसका वास्तविक आर्थिक लाभ नियमित commercial operations और logistics cost पर निर्भर करेगा।
बांग्लादेश तक कैसे पहुंचेगा माल?
बोगीबील से जहाज ब्रह्मपुत्र के रास्ते नीचे की ओर बढ़ेंगे और अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग नेटवर्क के जरिए बांग्लादेश की ओर जाएंगे। रिपोर्टों में इस खेप को आगे ढाका तक ले जाने की योजना बताई गई है।इससे पूर्वोत्तर भारत के लिए समुद्री बंदरगाहों पर निर्भरता कम करने और जलमार्ग आधारित logistics को बढ़ाने की संभावना बनती है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रूट?
पूर्वोत्तर भारत भौगोलिक रूप से देश के बाकी हिस्सों से अलग स्थिति में है। ऐसे में सड़क और रेल के साथ इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट एक अतिरिक्त logistics option उपलब्ध करा सकता है। सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में National Waterway-2 पर fairway development, terminals, navigation aids और अन्य infrastructure पर निवेश बढ़ाया है। आर्थिक सर्वे से जुड़े सरकारी दस्तावेज में 2020-21 से 2024-25 के बीच NW-2 के comprehensive development पर करीब ₹498 करोड़ खर्च होने और बोगीबील तथा जोगीघोपा में terminal development का उल्लेख है। PIB के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में ब्रह्मपुत्र जलमार्ग पर cargo movement में 53% की वृद्धि दर्ज की गई थी।
डिब्रूगढ़ का पुराना नदी व्यापार फिर लौटेगा ?
डिब्रूगढ़ का ब्रह्मपुत्र से व्यापारिक रिश्ता नया नहीं है। ब्रिटिश दौर में यह क्षेत्र नदी आधारित व्यापार के महत्वपूर्ण केंद्रों में शामिल था और ब्रह्मपुत्र से भारत के दूसरे हिस्सों के साथ-साथ विदेशी बाजारों तक माल पहुंचाया जाता था। आजादी के बाद धीरे-धीरे यह नदी मार्ग अंतरराष्ट्रीय commercial cargo movement के लिए सक्रिय नहीं रहा। अब बोगीबील के जरिए शुरू हो रहा यह नया ऑपरेशन उस पुराने river-trade network को आधुनिक infrastructure के साथ फिर से सक्रिय करने की कोशिश है।
क्या बदलेगा ?
अगर यह मॉडल नियमित commercial service में बदलता है, तो आने वाले समय में असम से बांग्लादेश और दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक माल पहुंचाने का नया विकल्प विकसित हो सकता है। फिलहाल 1,080 टन मेथेनॉल की यह खेप उस दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआती कदम है। आगे इस route की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि cargo volume, navigation, transit time, safety और overall logistics cost के लिहाज से यह कितना व्यावहारिक साबित होता है।




