नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026 : भारत की राजधानी नई दिल्ली में शनिवार से 18वें BRICS Summit की शुरुआत हो गई है। इस सम्मेलन में करीब 10 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ नजर आएंगे। तीनों नेता इससे पहले 2016 में गोवा में आयोजित BRICS Summit में एक साथ शामिल हुए थे। भारत की अध्यक्षता में हो रहे इस सम्मेलन में BRICS के 11 सदस्य देशों के अलावा 10 पार्टनर देशों के प्रतिनिधि और नेता भी शामिल होंगे। ऐसे में यह सम्मेलन वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
BRICS की ताकत कितनी बड़ी ?
BRICS के 11 सदस्य देशों में दुनिया की करीब 49.5% आबादी रहती है। यानी दुनिया के लगभग हर दो में से एक व्यक्ति इन देशों में रहता है। PPP यानी Purchasing Power Parity के आधार पर BRICS देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था दुनिया की करीब 39% है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक यह अमेरिका की अर्थव्यवस्था के मुकाबले करीब तीन गुना है। BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं।
मोदी-जिनपिंग की अहम मुलाकात
BRICS Summit से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इनमें इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद और वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग शामिल हैं। वहीं, शाम के समय प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की उम्मीद है। गलवान संघर्ष के बाद यह भारत में दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने मुलाकात होगी।शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत दौरे पर आए हैं। इससे पहले उनकी आखिरी भारत यात्रा 2019 में हुई थी, जब उन्होंने महाबलीपुरम में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी।
LAC और व्यापार पर होगी नजर
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और व्यापार इस मुलाकात के अहम मुद्दे हो सकते हैं। गलवान संघर्ष के बाद कई वर्षों तक LAC पर तनाव की स्थिति रही। अब दोनों देश सीमा प्रबंधन और सैन्य संवाद को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। व्यापार के मोर्चे पर भी दोनों देशों के बीच बड़ा असंतुलन है। भारत चीन से बड़ी मात्रा में सामान आयात करता है, जिसके चलते दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा लगातार चर्चा का विषय रहा है।
BRICS की अपनी करेंसी अभी नहीं
BRICS देशों की ओर से फिलहाल कोई साझा नई करेंसी लॉन्च करने की आधिकारिक योजना नहीं है। हालांकि सदस्य देश डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए आपसी व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहे हैं। रुपया, रूबल और युआन जैसी स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन बढ़ाने के साथ डिजिटल पेमेंट सिस्टम और CBDC को आपस में जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे भविष्य में BRICS देशों के बीच व्यापार में डॉलर की भूमिका कुछ हद तक कम हो सकती है। हालांकि डॉलर के वैश्विक दबदबे को तुरंत खत्म करना आसान नहीं माना जा रहा है।
BRICS का गठन कैसे हुआ ?
BRICS की शुरुआत किसी सरकार के फैसले से नहीं, बल्कि 2001 में अमेरिकी निवेश बैंक Goldman Sachs की रिपोर्ट से हुई थी। अर्थशास्त्री Jim O'Neill ने Brazil, Russia, India और China की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं को BRIC नाम दिया था। बाद में इन देशों ने एक साथ काम करना शुरू किया। 2006 में BRIC समूह बना और 2009 में रूस के Yekaterinburg में पहली आधिकारिक बैठक हुई। 2010 में South Africa के शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हो गया। इसके बाद समूह का विस्तार हुआ और आज इसमें 11 सदस्य देश शामिल हैं। भारत की अध्यक्षता में हो रहा 2026 BRICS Summit वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, डिजिटल पेमेंट, स्थानीय मुद्राओं और बहुपक्षीय सहयोग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




