नई दिल्ली, 25 सितंबर। दिवाली और त्योहारी सीजन से पहले केंद्र सरकार ने खाने के तेल की कीमतों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने कच्चे सूरजमुखी, सोयाबीन और पाम ऑयल पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी (BCD) घटा दी है। इसका मकसद घरेलू बाजार में खाद्य तेल की कीमतों को नियंत्रित करना और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के असर से उपभोक्ताओं को राहत देना है।

सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी हुई शून्य

सरकार के मुताबिक कच्चे सूरजमुखी तेल पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दी गई है। वहीं कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे पाम ऑयल पर ड्यूटी 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है। साथ ही कच्चे और रिफाइंड तेल के बीच 19.25 प्रतिशत का आयात शुल्क अंतर बनाए रखा गया है, ताकि घरेलू रिफाइनिंग को बढ़ावा मिलता रहे।

क्या तुरंत सस्ता होगा खाने का तेल?

ड्यूटी घटने से आयातित कच्चे तेल की लागत कम होने की संभावना है। सरकार ने संबंधित उद्योगों से इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की बात कही है। हालांकि, दुकानों पर तेल की कीमत कितनी घटेगी, यह अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमत, रुपये की विनिमय दर, मालभाड़े और घरेलू उपलब्धता जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।

त्योहारों से पहले क्यों लिया गया फैसला?

दिवाली और अन्य त्योहारों के दौरान घरों के अलावा मिठाई, नमकीन, होटल और रेस्तरां कारोबार में खाने के तेल की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में आयात लागत कम होने से बाजार में आपूर्ति और कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।

आम परिवार के बजट पर क्या असर?

सूरजमुखी, सोयाबीन और पाम ऑयल की कीमतों में कमी आने पर इसका असर रसोई के मासिक बजट पर पड़ सकता है। हालांकि, कितने रुपये प्रति लीटर की कमी होगी, इसका कोई निश्चित आंकड़ा सरकार ने नहीं बताया है। इसलिए उपभोक्ताओं को आने वाले दिनों में खुदरा बाजार की कीमतों पर नजर रखनी होगी।