नई दिल्ली, 24 सितंबर। यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाए जाने के प्रस्ताव के विरोध में देश के कई कारोबारी संगठन 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने की तैयारी कर रहे हैं। इस दौरान व्यापारी प्रतीकात्मक रूप से यूपीआई QR कोड को काले कपड़े से ढककर डिजिटल भुगतान का विरोध जताने और ग्राहकों से नकद भुगतान की अपील करने की योजना बना रहे हैं।
2 अक्टूबर को क्यों मनाया जाएगा ‘नो UPI डे’?
कारोबारी संगठनों का कहना है कि यूपीआई देश में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है। ऐसे में यूपीआई लेनदेन पर MDR लागू करने से कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है। महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के व्यापारिक संगठनों ने इस मुद्दे पर विरोध जताया है।
महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) के अध्यक्ष रवींद्र मंगवे ने कहा है कि यूपीआई ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया है। उनके मुताबिक शुल्क लगाए जाने के विरोध में 2 अक्टूबर को सांकेतिक रूप से ‘नो UPI डे’ मनाया जाएगा।
15 अक्टूबर से MDR लागू होने की बात
दिए गए विवरण के मुताबिक 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के कारोबारी यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाए जाने की घोषणा की गई है। MDR वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले कारोबारी से लिया जाता है। यह शुल्क सीधे ग्राहक से वसूलने की व्यवस्था नहीं बताई गई है।
सरकार के अनुसार रोजमर्रा के व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) भुगतान और छोटे लेनदेन इस शुल्क के दायरे में नहीं होंगे।
कई शहरों में QR कोड ढककर विरोध
मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रतलाम और अन्य शहरों में भी कुछ व्यापारिक संगठनों ने ‘नो UPI डे’ के तहत विरोध दर्ज कराया है। कई जगह व्यापारियों ने यूपीआई QR कोड को काले कपड़े से ढककर ग्राहकों से नकद भुगतान की अपील की।
सरकार और व्यापारियों के बीच अलग-अलग दावे
वित्त मंत्रालय के मुताबिक 2,000 रुपये से अधिक के कारोबारी यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित MDR का सीधा बोझ ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। वहीं व्यापारिक संगठनों का कहना है कि शुल्क से कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है।
कुछ संगठनों ने संकेत दिया है कि यदि 15 अक्टूबर से पहले फैसला वापस नहीं लिया गया, तो वे आगे भी विरोध जारी रख सकते हैं।




