भागलपुर: बिहार के भागलपुर स्थित विश्वविख्यात विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन आश्रयणी को अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नई पहचान मिलेगी। राष्ट्रीय जलीय जीव गांगेय डॉल्फिन के प्राकृतिक पर्यावास के रूप में प्रसिद्ध इस अभयारण्य की आधिकारिक वेबसाइट का वन्यप्राणी सप्ताह-2026 के समापन अवसर पर प्रमोशन किया गया। गुरुवार को सुंदरवन स्थित अरण्य विहार में आयोजित कार्यक्रम में वेबसाइट के साथ जैव-विविधता पर आधारित एक विशेष पुस्तिका का भी विमोचन किया गया।
क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक एस. कुमारासामी ने हाइब्रिड मोड में बटन दबाकर वेबसाइट और पुस्तिका को जनहित में लोकार्पित किया। पुस्तिका का शीर्षक ‘विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन आश्रयणी, भागलपुर की जैव-विविधता और गंगा के किनारे का जीवन’ है। इस पहल का उद्देश्य अभयारण्य की प्राकृतिक संपदा, जलीय जीवों और गंगा के आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ी जानकारी को अधिक लोगों तक पहुंचाना है।
डॉल्फिन संरक्षण में स्थानीय लोगों की भागीदारी जरूरी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक एस. कुमारासामी ने कहा कि भागलपुर वन्यजीवों, विशेषकर जलीय जीवों और पक्षियों की जैव-विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन, कछुए और अन्य जलीय जीवों का संरक्षण केवल वन विभाग के प्रयासों से संभव नहीं है।
उन्होंने स्थानीय मछुआरों, नाविकों और गंगा किनारे रहने वाले ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी को जरूरी बताया। उनके अनुसार, स्थानीय समुदायों के सहयोग से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की रक्षा करने और संरक्षण संबंधी प्रयासों को प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।
अवैध शिकार और बालू खनन पर सख्ती के निर्देश
कार्यक्रम के समापन सत्र में वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) आशुतोष राज ने वनकर्मियों और वनरक्षियों को उनके वैधानिक अधिकारों एवं जिम्मेदारियों की जानकारी दी। इस दौरान बिहार वन नियमावली के संबंधित प्रावधानों, वन्यजीवों के अवैध शिकार की रोकथाम, गंगा क्षेत्र में अवैध बालू खनन पर कार्रवाई और हरे पेड़ों की अवैध कटाई से जुड़े मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई।
डीएफओ ने निर्देश दिया कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की कार्रवाई करते समय कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया जाए। इसका उद्देश्य वन अपराधों के मामलों में ठोस कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना और दोषियों के खिलाफ अदालत में प्रभावी पैरवी का आधार तैयार करना है।
इस दौरान डॉल्फिन अभयारण्य क्षेत्र के लिए तैयार माइक्रो-एक्शन प्लान की भी समीक्षा की गई।
BNHS के विशेषज्ञों ने सिखाई बर्ड रिंगिंग की तकनीक
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) के विशेषज्ञ अभिलाष और भूमिका रजोरिया ने वनकर्मियों को पक्षियों की वैज्ञानिक निगरानी और बर्ड रिंगिंग यानी पक्षी छल्लाकरण की जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने बताया कि भागलपुर वन प्रमंडल में डॉल्फिन, घड़ियाल, मगरमच्छ, ग्रेटर एडजुटेंट स्टॉर्क यानी दुर्लभ गरुड़, शीतकालीन प्रवासी पक्षियों, सांपों और तितलियों की विविधता पाई जाती है। इन प्रजातियों की वैज्ञानिक निगरानी से क्षेत्र की जैव-विविधता को समझने और संरक्षण की रणनीति तैयार करने में मदद मिलती है।
प्रवासी पक्षियों की गतिविधियों पर रखी जाएगी नजर
तकनीकी सत्र में बताया गया कि बर्ड रिंगिंग और वैज्ञानिक डेटा मॉनिटरिंग के माध्यम से प्रवासी पक्षियों के आने-जाने के रास्तों, मौसमी चक्र और प्रवास की अवधि से जुड़ी जानकारी जुटाई जा सकती है। इससे जलवायु परिवर्तन का पक्षियों और उनके प्राकृतिक आवास पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने में भी सहायता मिलती है।
वनकर्मियों को आधुनिक उपकरणों की मदद से फील्ड में निगरानी करने और वैज्ञानिक तरीके से डेटा एकत्र करने के बारे में भी जानकारी दी गई।
मो. मोनू बने 'माह के सर्वश्रेष्ठ कर्मी'
कार्यक्रम के अंत में विभागीय कार्यों में बेहतर योगदान देने वाले कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। डीएफओ आशुतोष राज ने उत्कृष्ट प्रशासनिक और क्षेत्रीय कार्यशैली के लिए निम्नवर्गीय लिपिक मो. मोनू को ‘माह का सर्वश्रेष्ठ कर्मी’ घोषित किया। उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
अधिकारियों ने कहा कि कर्मचारियों के अच्छे कार्यों को पहचान और सम्मान देने से टीम में उत्साह बढ़ता है तथा विभागीय जिम्मेदारियों के प्रति समर्पण को प्रोत्साहन मिलता है।
विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन आश्रयणी की वेबसाइट का प्रमोशन और जैव-विविधता पर आधारित पुस्तिका का विमोचन भागलपुर की प्राकृतिक विरासत को व्यापक स्तर पर सामने लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके साथ ही डॉल्फिन संरक्षण, वन्यजीवों की निगरानी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।




