पूर्णिया, 14 अगस्त 2026 : देशभर में 15 अगस्त की सुबह स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया जाता है, लेकिन बिहार के पूर्णिया में आजादी का उत्सव आधी रात से शुरू होता है। झंडा चौक पर 14-15 अगस्त की मध्यरात्रि 12:01 बजे तिरंगा फहराने की 75 साल पुरानी परंपरा आज भी कायम है। स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति का रंग पूरे देश में देखने को मिलता है, लेकिन बिहार के पूर्णिया का अंदाज बिल्कुल अलग है। यहां हर साल 14 और 15 अगस्त की मध्यरात्रि ठीक 12:01 बजे तिरंगा फहराकर आजादी का जश्न शुरू किया जाता है। पूर्णिया के ऐतिहासिक झंडा चौक पर इस अनोखी परंपरा को निभाने के लिए शुक्रवार रात बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की तैयारी है। यह परंपरा वर्ष 1947 से चली आ रही है।
1947 की आधी रात से शुरू हुई परंपरा
बताया जाता है कि 14 अगस्त 1947 की रात जब रेडियो पर भारत की आजादी की घोषणा हुई, तब पूर्णिया के स्वतंत्रता सेनानियों ने सुबह होने का इंतजार नहीं किया। आधी रात को ही स्वतंत्रता सेनानी बाजार पहुंचे और एक दुकान से तिरंगा खरीदा। इसके बाद रात 12:01 बजे तिरंगा फहराकर आजादी का जश्न मनाया गया। यही ऐतिहासिक क्षण आगे चलकर पूर्णिया की एक अनोखी परंपरा बन गया।
ऐसे पड़ा जगह का नाम ‘झंडा चौक’
जिस स्थान पर आजादी की पहली रात आधी रात को तिरंगा फहराया गया था, वह जगह आगे चलकर ‘झंडा चौक’ के नाम से मशहूर हो गई। भट्ठा बाजार स्थित यह स्थान आज भी पूर्णिया के लिए देशभक्ति और स्वतंत्रता आंदोलन की यादों से जुड़ा हुआ है।
वाघा बॉर्डर की तरह आधी रात में तिरंगा
स्वतंत्रता दिवस पर आमतौर पर देश में 15 अगस्त की सुबह ध्वजारोहण होता है। लेकिन पूर्णिया में आधी रात को तिरंगा फहराने की यह परंपरा इसे अलग पहचान देती है। इसी वजह से यहां का मध्यरात्रि ध्वजारोहण वाघा बॉर्डर के जश्न की याद दिलाता है। आधी रात को राष्ट्रगान के बीच तिरंगा फहराया जाता है और पूरा इलाका देशभक्ति के नारों से गूंज उठता है।
इस बार भी झंडा चौक पर उमड़ेगा जनसैलाब
इस साल भी झंडा चौक पर मध्यरात्रि के आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आयोजन स्थल की साफ-सफाई और लाइटिंग की विशेष व्यवस्था की गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, जैसे ही रात 12:01 बजे तिरंगा फहराया जाता है और राष्ट्रगान की धुन गूंजती है, वहां मौजूद लोगों के लिए वह पल बेहद भावुक और गौरवपूर्ण होता है।
75 साल से ज्यादा पुरानी विरासत
1947 में शुरू हुई यह परंपरा अब 75 साल से ज्यादा समय से पूर्णिया की पहचान बनी हुई है। पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन आधी रात को तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता दिवस मनाने का उत्साह आज भी बरकरार है। पूर्णिया का झंडा चौक इसलिए सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि आजादी की उस पहली रात की याद है, जब लोगों ने सुबह का इंतजार किए बिना ही तिरंगे को सलामी देकर स्वतंत्र भारत का स्वागत किया था।




