अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) के तहत लगाए गए टैरिफ को असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद अमेरिका में बड़े पैमाने पर टैरिफ रिफंड की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा (CBP) ने आयातकों के दावों के निपटारे के लिए CAPE (Consolidated Administration and Processing of Entries) नामक विशेष प्रणाली लागू की है। अनुमान है कि कुल 166 अरब डॉलर के रिफंड में भारतीय सामानों से जुड़े लगभग 12 अरब डॉलर भी शामिल हैं।
अमेरिकी कानून के अनुसार विदेश से आयात किए गए सामान पर लगने वाली ड्यूटी या टैरिफ का भुगतान अमेरिका में स्थित ‘इम्पोर्टर ऑफ रिकॉर्ड’ यानी आयातक या उसके कस्टम ब्रोकर द्वारा किया जाता है। इसी कारण अवैध रूप से वसूले गए टैरिफ की वापसी का कानूनी अधिकार भी उन्हीं आयातकों को प्राप्त है, जिन्होंने मूल रूप से यह राशि जमा की थी।
दूसरी ओर, भारतीय निर्यातकों के लिए इस रिफंड का लाभ सीधे प्राप्त करना आसान नहीं होगा। भारतीय कंपनियों का अमेरिकी सरकार से सीधे रिफंड मांगने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। ऐसे मामलों में, जहां निर्यात ‘ड्यूटी-पेड’ आधार पर किया गया था या अनुबंध में टैरिफ का बोझ साझा करने का प्रावधान मौजूद है, वहां भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी खरीदारों के साथ अलग से बातचीत करनी होगी।
कपड़ा, रसायन और इंजीनियरिंग उत्पादों के भारतीय निर्यातक अब अपने अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों के संपर्क में हैं, ताकि रिफंड की राशि में संभावित हिस्सेदारी सुनिश्चित की जा सके।




