पटना, 3 अक्टूबर 2026 : बिहार में अप्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षकों की सेवा को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से एक बड़ा निर्देश सामने आया है। विभागीय आदेश के मुताबिक 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त ऐसे प्रारंभिक शिक्षक जिन्होंने अनिवार्य शिक्षक प्रशिक्षण हासिल नहीं किया है, उनकी सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी। यह मामला प्राथमिक स्तर के शिक्षकों के लिए निर्धारित प्रशिक्षण योग्यता से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में भी प्राथमिक कक्षाओं के शिक्षकों के लिए D.El.Ed. जैसे प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। अब देखना है कि राज्य सरकार का फैसला क्या होता है।

31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त शिक्षकों पर कार्रवाई

एक रिपोर्ट के अनुसार प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त अप्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षकों के खिलाफ सेवा समाप्ति की कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। यानी जिन शिक्षकों की नियुक्ति तय कटऑफ तारीख के बाद हुई और जिन्होंने निर्धारित शिक्षक प्रशिक्षण पूरा नहीं किया है वे विभागीय कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।

31 मार्च 2015 से पहले नियुक्त शिक्षकों को राहत

विभागीय निर्देश के अनुसार 31 मार्च 2015 से पहले नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षकों के लिए अलग प्रावधान किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे शिक्षकों को प्रशिक्षण योग्यता पूरी करने का अवसर दिया गया है और उन्हें 31 मार्च 2028 तक D.El.Ed. प्रशिक्षण हासिल करना होगा। इसका मतलब यह है कि इस श्रेणी के शिक्षकों को तत्काल सेवा समाप्ति के बजाय निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रशिक्षण योग्यता पूरी करने का मौका दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले में D.El.Ed. की अहमियत

सुप्रीम कोर्ट ने प्राथमिक स्तर की शिक्षण व्यवस्था से जुड़े मामलों में स्पष्ट किया है कि कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए प्राथमिक शिक्षा की विशेष pedagogical training जरूरी है। कोर्ट के एक फैसले में कहा गया कि प्राथमिक स्तर के लिए D.El.Ed. प्रशिक्षण बच्चों को पढ़ाने के लिए आवश्यक कौशल से संबंधित है। अदालत के फैसलों में शिक्षक की न्यूनतम योग्यता और प्रशिक्षण मानकों का पालन करने पर लगातार जोर दिया गया है।

पहले बर्खास्त किए गए शिक्षकों को भी राहत

रिपोर्ट में उन शिक्षकों का भी जिक्र है जिन्हें 30 मार्च 2024 के आदेश के तहत सेवा से हटाया गया था।विभागीय प्रक्रिया के तहत ऐसे शिक्षकों को दोबारा नियुक्त करने की बात कही गई है। साथ ही पहले आयोजित D.El.Ed. परीक्षा का परिणाम जारी करने का निर्देश भी बताया गया है, ताकि संबंधित शिक्षक अपनी प्रशिक्षण योग्यता की स्थिति स्पष्ट कर सकें।

किन शिक्षकों पर क्या असर ?

31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षक : निर्धारित प्रशिक्षण योग्यता पूरी नहीं होने पर सेवा समाप्ति की कार्रवाई हो सकती है।

31 मार्च 2015 से पहले नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षक : रिपोर्ट के मुताबिक, इन्हें 31 मार्च 2028 तक D.El.Ed. प्रशिक्षण पूरा करने का अवसर दिया गया है।

30 मार्च 2024 के आदेश से बर्खास्त शिक्षक : रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित श्रेणी के शिक्षकों की पुनर्नियुक्ति और D.El.Ed. परीक्षा परिणाम से जुड़ी प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है।

शिक्षकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह आदेश ?

बिहार में बड़ी संख्या में प्रारंभिक शिक्षक स्कूलों में नियुक्त हैं। ऐसे में प्रशिक्षण योग्यता को लेकर शिक्षा विभाग की कार्रवाई का सीधा असर संबंधित शिक्षकों की नौकरी पर पड़ सकता है। हालांकि किस शिक्षक की सेवा समाप्त होगी या किसे राहत मिलेगी, यह उसकी नियुक्ति की तारीख, प्रशिक्षण योग्यता और विभागीय रिकॉर्ड पर निर्भर करेगा। इसलिए शिक्षकों को अपने नियुक्ति और प्रशिक्षण से जुड़े दस्तावेजों की स्थिति विभागीय स्तर पर जांच लेनी चाहिए।