बेगूसराय, 21 सितंबर 2026 : बिहार के बेगूसराय स्थित बरौनी सुधा डेयरी में खरीद, टेंडर, नियुक्तियों, बैंक लोन, दूध के हिसाब और संपत्तियों के इस्तेमाल से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर पूर्व प्रभारी एमडी सह सहायक महाप्रबंधक रविंद्र प्रसाद और वर्तमान चेयरमैन विजय शंकर सिंह के खिलाफ फुलवड़िया थाने में FIR दर्ज की गई है। पुलिस अब ऑडिट रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है। जांच के लिए 2023 से 27 फरवरी 2026 तक की गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले गए। रिपोर्ट तैयार करने वाली टीम ने 1,311 पन्नों की छह मुख्य फाइलों समेत बड़ी संख्या में दस्तावेजों की जांच की। रिपोर्ट में खरीद प्रक्रिया, टेंडर, नियुक्ति, वित्तीय लेनदेन और डेयरी की संपत्तियों के इस्तेमाल में नियमों के उल्लंघन के कई आरोपों का उल्लेख किया गया है।

तीन iPad की डिलीवरी में ट्रक का रिकॉर्ड, नंबर ट्रैक्टर का निकला

जांच रिपोर्ट में तीन Apple iPad की खरीद और डिलीवरी से जुड़ी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, iPad की डिलीवरी ट्रक से दिखाए जाने का रिकॉर्ड मिला। डिलीवरी के लिए दर्ज वाहन नंबर BR01GA4412 की जांच की गई तो वह ट्रक के बजाय ट्रैक्टर का नंबर पाया गया। इस मामले में गेट रजिस्टर और डिलीवरी से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई। रिपोर्ट में बरौनी से बनारस अधिकारियों के दौरे से जुड़े खर्च पर भी सवाल उठाया गया है। इसमें यात्रा की दूरी करीब 1,100 किलोमीटर दिखाकर लगभग 66 हजार रुपये का किराया दर्ज किए जाने का उल्लेख है।

एक ही फर्म से कोटेशन और पहले ही जारी हुआ Purchase Order

वनस्पति तेल और गेहूं के आटे की खरीद में भी जांच रिपोर्ट में प्रक्रिया संबंधी अनियमितता का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, मल्टी-फर्म कोटेशन लेने के बजाय एक ही फर्म से कोटेशन लिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक संबंधित फर्म ने नौ अगस्त 2024 को कोटेशन भेजा, जबकि इसे आठ अगस्त को ही स्वीकार किए जाने का रिकॉर्ड मिला। इसी तारीख को ₹10.48 लाख से अधिक का Purchase Order भी जारी किया गया था।

ठेकुआ में वनस्पति तेल के इस्तेमाल पर भी सवाल

जांच रिपोर्ट में सुधा ब्रांड के ठेकुआ से जुड़े एक मामले का भी उल्लेख है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, उत्पाद में रिफाइंड/वनस्पति तेल के इस्तेमाल को लेकर जरूरी अनुमति और पैकेजिंग पर इसकी जानकारी से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। इस मामले में FIR में BNS की धारा 274 के तहत कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद स्पष्ट होगी।

डेयरी के पैसे से Apple लैपटॉप खरीदने का आरोप

रिपोर्ट में डेयरी के फंड से Apple लैपटॉप खरीदे जाने का भी उल्लेख है। जांच के अनुसार, खरीद से पहले जरूरी स्वीकृति का रिकॉर्ड नहीं मिला। लैपटॉप की तकनीकी जांच में उसका लॉगिन किसी अधिकारी या कर्मचारी से जुड़ा नहीं पाया गया। रिपोर्ट में इसके किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किए जाने की आशंका/उल्लेख किया गया है।

दूध के हिसाब में ₹14.30 करोड़ से ज्यादा के Handling Loss पर सवाल

बरौनी डेयरी के दूध और दुग्ध उत्पादों के हिसाब की जांच में ₹14.30 करोड़ से ज्यादा के Handling Loss का आंकड़ा सामने आया। जांच रिपोर्ट में रिकॉर्ड में दर्ज नुकसान और वास्तविक नुकसान के बीच अंतर का उल्लेख किया गया है। पुलिस अब इस हिस्से की भी जांच करेगी।

रिश्तेदारों की गाड़ियों और नियुक्तियों पर उठे सवाल

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, चेयरमैन विजय शंकर सिंह के बेटे को सुधा उत्पादों की डिस्ट्रीब्यूटर एजेंसी दिए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में चेयरमैन और मार्केटिंग अधिकारी के रिश्तेदारों की निजी गाड़ियों को बिना टेंडर प्रक्रिया के डेयरी में किराए पर लगाए जाने का भी उल्लेख है। चेयरमैन पर डेयरी की सरकारी गाड़ियों के निजी या पारिवारिक इस्तेमाल से जुड़े आरोप रिपोर्ट में दर्ज हैं। इसके अलावा पूर्व प्रभारी एमडी रविंद्र प्रसाद पर बोर्ड की मंजूरी, विज्ञापन और चयन समिति की प्रक्रिया के बिना नौ नियुक्तियां करने का आरोप जांच रिपोर्ट में लगाया गया है।

₹110 करोड़ से ज्यादा के ओवरड्राफ्ट और कम कीमत पर मिल्क पाउडर बिक्री

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, बरौनी डेयरी ने निदेशक मंडल की पूर्व मंजूरी के बिना अलग-अलग बैंकों से ₹110 करोड़ से ज्यादा का ओवरड्राफ्ट लिया। रिपोर्ट में मिल्क पाउडर की बिक्री में भी निर्धारित दरों से कम कीमत पर माल बेचने का उल्लेख है। WMP की निर्धारित दर ₹338 प्रति किलो के मुकाबले इसे ₹201 से ₹257 प्रति किलो और SMP की ₹297 रुपये की निर्धारित दर के मुकाबले ₹222 से ₹234 रुपये प्रति किलो में बेचे जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 लाख रुपये से अधिक के सौदों में ई-टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इससे करीब ₹8.48 लाख के नुकसान का उल्लेख भी जांच में है। इसके अलावा मेसर्स आरएस फूड के पास डेयरी के करीब ₹2.83 करोड़ के TS स्टॉक और ₹6.39 करोड़ के IUT स्टॉक के बकाया होने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।

बड़े ऑर्डर को छोटे हिस्सों में बांटने का आरोप

खरीद प्रक्रिया की जांच में आरोप है कि 10 लाख रुपये से अधिक की खरीद को ई-टेंडर से बचाने के लिए कुछ बड़े ऑर्डर को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा गया। रिपोर्ट में सीमित टेंडर में सिर्फ पांच दिन का समय देने, बिना मांग पत्र के कुछ सामान खरीदने और कुछ वस्तुओं को बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर खरीदने जैसे मामलों का भी उल्लेख है। इनमें मशीनरी, बिजली के सामान, फर्नीचर, दवाइयां, AC, पानी के कूलर और खाद्य सामग्री समेत कई चीजें शामिल हैं। FPO लखीसराय से चावल और FPO बेगूसराय से मखाना खरीदने की प्रक्रिया पर भी जांच रिपोर्ट में सवाल उठाए गए हैं।

संपत्तियों की बिक्री और भुगतान प्रक्रिया पर भी सवाल

रिपोर्ट में डेयरी की पुरानी गाड़ियों और अन्य संपत्तियों की बिक्री में बोर्ड की मंजूरी और पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने का आरोप है। कुछ भुगतान बिल, रसीद या वाउचर के बजाय केवल पेमेंट स्लिप के आधार पर किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। इसके अलावा एक लाख रुपये के कैश एडवांस के हिसाब को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

बोर्ड बैठकों की रिकॉर्डिंग नहीं मिली

जांच रिपोर्ट में बोर्ड बैठकों की कार्यवाही और प्रस्तावों में बदलाव किए जाने के आरोपों का भी उल्लेख है। कुछ बैठकों की जरूरी वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई है। इसके अलावा बल्क मिल्क कूलिंग सेंटरों की संचालन लागत, दूध से बनने वाले Total Solids (TS) के रिकॉर्ड, निर्माण कार्यों में भुगतान और JICA परियोजनाओं से जुड़े वित्तीय मामलों में भी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। ठेकेदारों की सिक्योरिटी राशि और डेयरी की जमीन से जुड़े रिकॉर्ड पर भी जांच रिपोर्ट में सवाल उठाए गए हैं।

10 बार बुलाने पर दो बार ही पेश हुए अधिकारी

जांच अधिकारी फूल कुमार झा की 1 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व प्रभारी एमडी रविंद्र प्रसाद को अपना पक्ष रखने के लिए 10 बार बुलाया गया, लेकिन वे दो बार ही उपस्थित हुए। इनमें एक बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होने की बात रिपोर्ट में कही गई है। जांच टीम ने शुरुआती 115 पन्नों के दस्तावेजों के अलावा 1,311 पन्नों की छह मुख्य फाइलों की जांच की।

अब फॉरेंसिक ऑडिट और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच

मामले में पुलिस अब कथित ₹14.30 करोड़ के Handling Loss, ₹110 करोड़ से अधिक के ओवरड्राफ्ट और कथित फर्जी बिलिंग से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करेगी। लैपटॉप, iPad, कंप्यूटर, गेट रजिस्टर, CCTV फुटेज और कथित रूप से डिलीट किए गए वीडियो की फॉरेंसिक जांच भी प्रस्तावित है। टेंडर पाने वाली फर्मों, संबंधित कर्मचारियों और चेयरमैन के परिजनों से पूछताछ की जा सकती है।फिलहाल ये सभी मामले जांच और आरोपों के स्तर पर हैं। FIR दर्ज होने का मतलब आरोप साबित होना नहीं है। पुलिस जांच और आगे की फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही कथित वित्तीय अनियमितताओं की वास्तविक प्रकृति और जिम्मेदारी स्पष्ट होगी।