पटना, 10 सितंबर 2026 : बिहार की सम्राट सरकार ने संविदा पर कार्यरत मेडिकल शिक्षकों और रेजिडेंट डॉक्टरों के मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी का फैसला किया है। स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले से मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में संविदा पर कार्यरत प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, सीनियर रेजिडेंट और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को लाभ मिलेगा। राज्य सरकार ने अलग-अलग पदों के मानदेय में 10 हजार रुपये से लेकर 27 हजार रुपये प्रति माह तक की बढ़ोतरी की है। सबसे अधिक वृद्धि मेडिकल प्रोफेसरों के मानदेय में हुई है। अब प्रोफेसरों को हर महीने 2.07 लाख रुपये मानदेय मिलेगा, जबकि पहले यह राशि 1.80 लाख रुपये थी।
प्रोफेसर के मानदेय में 27 हजार रुपये की बढ़ोतरी
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, संविदा पर कार्यरत मेडिकल प्रोफेसरों के मानदेय में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी की गई है। उनका मानदेय 1.80 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.07 लाख रुपये प्रति माह कर दिया गया है। यानी प्रोफेसरों को पहले की तुलना में हर महीने 27 हजार रुपये अधिक मिलेंगे।
एसोसिएट प्रोफेसर को अब 1.55 लाख
मेडिकल कॉलेजों में संविदा पर कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसरों के मानदेय में भी इजाफा किया गया है। उनका मानदेय 1.35 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.55 लाख रुपये प्रति माह कर दिया गया है। इस तरह एसोसिएट प्रोफेसरों के मानदेय में 20 हजार रुपये प्रति माह की बढ़ोतरी हुई है।
असिस्टेंट प्रोफेसर और रेजिडेंट डॉक्टरों का भी बढ़ा मानदेय
बिहार सरकार ने संविदा पर कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसरों के मानदेय में 15 हजार रुपये की बढ़ोतरी की है। अब उन्हें 1.10 लाख रुपये के बजाय 1.25 लाख रुपये प्रति माह मिलेंगे। वहीं, सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का मानदेय बढ़ाकर 1.15 लाख रुपये प्रति माह कर दिया गया है। सबसे जूनियर स्तर पर कार्यरत जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को भी राहत मिली है। उनका मानदेय 65 हजार रुपये से बढ़ाकर 75 हजार रुपये प्रति माह कर दिया गया है।
एक नजर में नया मानदेय
पद ————— पुराना मानदेय——-नया मानदेय——बढ़ोतरी
प्रोफेसर —-— ₹1.80 लाख——— ₹2.07 लाख—- ₹27,000
एसोसिएट प्रोफेसर— ₹1.35 लाख—— ₹1.55 लाख—-₹20,000
असिस्टेंट प्रोफेसर——₹1.10 लाख—— ₹1.25 लाख—- ₹15,000
सीनियर रेजिडेंट —— ₹1.15 लाख
जूनियर रेजिडेंट——₹65,000—— ₹75,000—- ₹10,000
एक सितंबर 2026 से मिलेगा बढ़े हुए मानदेय का लाभ
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के अनुसार, बढ़ा हुआ मानदेय एक सितंबर 2026 से प्रभावी माना जाएगा। इसका मतलब है कि संविदा पर कार्यरत मेडिकल शिक्षक और रेजिडेंट डॉक्टर सितंबर महीने से संशोधित मानदेय के हकदार होंगे। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मेडिकल शिक्षक और रेजिडेंट डॉक्टर राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार उनके योगदान को सम्मान और प्रोत्साहन देने की दिशा में काम कर रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल एजुकेशन को मिलेगा फायदा
सरकार का मानना है कि संविदा पर कार्यरत मेडिकल शिक्षकों और डॉक्टरों के मानदेय में बढ़ोतरी से राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों और रेजिडेंट डॉक्टरों की भूमिका मरीजों के इलाज के साथ-साथ मेडिकल छात्रों के प्रशिक्षण में भी अहम होती है। ऐसे में मानदेय बढ़ने से चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
JDU ने फैसले की सराहना की
सरकार के इस फैसले की जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने भी सराहना की है। जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के फैसले को स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि बिहार में लोगों तक बेहतर और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। डॉक्टरों और मेडिकल शिक्षकों के मानदेय में बढ़ोतरी से स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
डॉक्टरों के लिए क्या बदला ?
- संविदा मेडिकल प्रोफेसर का मानदेय ₹27 हजार बढ़ा
- प्रोफेसर को अब ₹2.07 लाख प्रति माह
- एसोसिएट प्रोफेसर को ₹1.55 लाख प्रति माह
- असिस्टेंट प्रोफेसर को ₹1.25 लाख प्रति माह
- सीनियर रेजिडेंट को ₹1.15 लाख प्रति माह
- जूनियर रेजिडेंट को ₹75 हजार प्रति माह
- नया मानदेय एक सितंबर 2026 से प्रभावी




