पटना, 14 अगस्त 2026 : बिहार में शराबबंदी कानून को लागू हुए करीब एक दशक पूरा होने वाला है। इस बीच केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने शराबबंदी कानून की समीक्षा की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि समीक्षा का मतलब शराबबंदी कानून को खत्म या कमजोर करना नहीं है, बल्कि इसकी कमियों को दूर कर इसे और प्रभावी बनाना है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि जब बिहार में शराबबंदी कानून लागू किया गया था, तब उनकी पार्टी ने विपक्ष में रहते हुए भी इसका समर्थन किया था। हालांकि, करीब 10 साल बाद अब यह देखना जरूरी है कि जिस उद्देश्य के साथ कानून बनाया गया था, वह जमीन पर कितना सफल रहा है।

शराबबंदी पर चिराग ने उठाए सवाल

चिराग पासवान ने कहा कि बिहार में शराबबंदी के बावजूद जहरीली शराब बनाए जाने और दूसरे राज्यों से शराब की तस्करी की खबरें सामने आती रहती हैं। ऐसे में सिर्फ कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के साथ लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। उन्होंने माना कि शराबबंदी का उद्देश्य समाज को नशे से बचाना है, लेकिन इसके लिए मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा और जरूरी सुधार किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि शराबबंदी की आड़ में कई तरह के धंधे शुरू हो गए हैं।

‘समीक्षा का मतलब कानून कमजोर करना नहीं’

चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग को कानून खत्म करने की मांग के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, बिहार सरकार को यह आकलन करना चाहिए कि कानून लागू होने के बाद क्या बदलाव आए हैं और किन क्षेत्रों में अभी कमियां मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि समीक्षा के बाद जरूरी सुधार किए जा सकते हैं, जिससे कानून को और सख्त, प्रभावी और व्यावहारिक बनाया जा सके। साथ अन्य समस्याओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

सहयोगी दलों से चर्चा की जरूरत

चिराग पासवान ने कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर सरकार को अपने सहयोगी दलों के साथ भी चर्चा करनी चाहिए। सभी पक्षों की राय लेने के बाद अगर व्यवस्था में किसी तरह के बदलाव की जरूरत महसूस होती है तो उस पर विचार किया जाना चाहिए।

जहरीली शराब और तस्करी बड़ी चुनौती

बिहार में शराबबंदी के बावजूद जहरीली शराब और पड़ोसी राज्यों से शराब आने का मुद्दा लगातार चर्चा में रहा है। चिराग पासवान ने भी इसे गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि कानून के साथ-साथ जागरूकता और प्रभावी निगरानी पर जोर देना होगा। उनका कहना है कि शराबबंदी को सफल बनाने की जिम्मेदारी केवल सरकार या पुलिस की नहीं है। समाज की भागीदारी भी बेहद जरूरी है।

विपक्ष पर भी साधा निशाना

चिराग पासवान ने इस दौरान विपक्षी नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अक्सर छात्रों और युवाओं की समस्याओं पर देर से प्रतिक्रिया देता है। उनके मुताबिक, जब छात्रों को समर्थन की जरूरत थी, तब विपक्षी नेता सक्रिय नहीं थे और अब आंदोलन के जरिए राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश की जा रही है। चिराग ने कहा कि आज के युवा अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हैं और अपनी लड़ाई खुद लड़ने में सक्षम हैं।

शराबबंदी पर आगे क्या ?

चिराग पासवान के बयान के बाद बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज होने के आसार हैं। हालांकि उन्होंने कानून खत्म करने की बात नहीं कही है, बल्कि करीब 10 साल के अनुभव के आधार पर इसकी समीक्षा और जरूरी सुधार की वकालत की है।