पटना, 21 सितंबर 2026 : बिहार में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने चुनाव और पंचायतों के परिसीमन को लेकर एक अहम जानकारी दी है। मुख्यमंत्री के मुताबिक राज्य में पंचायत चुनाव नए परिसीमन के बाद ही कराए जाएंगे। परिसीमन की प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से कराई जा रही है। ग्राम संवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों की जवाबदेही को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जनप्रतिनिधियों से यह पूछा जाएगा कि उनके क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों के दौरान विकास और आर्थिक गतिविधियों में कितनी वृद्धि हुई।

पांच साल के GDP का हिसाब पूछे जाने की बात

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि जिला परिषद, प्रखंड, ग्राम पंचायत, प्रखंड प्रमुख और मुखिया जैसे स्थानीय जनप्रतिनिधियों से उनके क्षेत्र के विकास को लेकर सवाल किया जाएगा। उनसे पूछा जाएगा कि पांच वर्षों में क्षेत्र की GDP कितनी बढ़ी और विकास के स्तर में क्या बदलाव आया। यह बयान पंचायत प्रतिनिधियों की जवाबदेही को आर्थिक और विकास संबंधी आंकड़ों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

7500 आबादी के आधार पर होगा पंचायतों का परिसीमन

मुख्यमंत्री ने बताया कि पंचायतों के परिसीमन के लिए 7500 की आबादी का मानक तय किया गया है। इसके तहत आबादी और भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए पंचायतों की सीमाओं को नए सिरे से व्यवस्थित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अपने गांव का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके गांव की आबादी करीब 20 हजार है, लेकिन इसके साथ तीन अन्य गांव भी जुड़े हुए हैं और सभी एक ही पंचायत का हिस्सा हैं। उनके मुताबिक, ऐसे मामलों को देखते हुए पंचायतों के परिसीमन की आवश्यकता है।

CM बोले- जमीनी स्तर पर मुखिया की भूमिका सबसे अहम

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आम तौर पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को सबसे शक्तिशाली पद माना जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर मुखिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। सीएम ने कहा कि मुखिया के पास बड़ी संख्या में स्थानीय स्तर के काम होते हैं और मुखिया का चुनाव भी आसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि स्थानीय चुनावों में सामाजिक संबंध और स्थानीय समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र की जमीनी ताकत से जोड़ते हुए कहा कि कई बार परिवार या पड़ोस के लोगों को भी यह पता नहीं होता कि कोई व्यक्ति किस उम्मीदवार को वोट देने वाला है।

पंचायत भवन को मिनी सचिवालय की तरह विकसित करने की तैयारी

पंचायत सरकार भवनों को लेकर भी सरकार की ओर से योजना की जानकारी दी गई है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के मुताबिक, पंचायत सरकार भवनों को मिनी सचिवालय की तर्ज पर विकसित करने की योजना है, ताकि ग्रामीणों को एक ही स्थान पर विभिन्न सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। ग्राम संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पंचायतों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि गरीबों पर टैक्स का बोझ नहीं डाला जाएगा मगर गांवों में चलने वाली व्यावसायिक गतिविधियों से पंचायतों को टैक्स वसूलना चाहिए। उन्होंने ईंट-भट्ठे, निजी स्कूल और मोबाइल टावर जैसी व्यावसायिक गतिविधियों का उदाहरण दिया।

कब होंगे बिहार पंचायत चुनाव?

फिलहाल पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान के अनुसार, पहले पंचायतों का परिसीमन पूरा होगा और उसके बाद चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। चुनाव कार्यक्रम और तारीखों की घोषणा राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से की जाएगी।