गयाजी, 16 सितंबर 2026 : पितृपक्ष मेला शुरू होने से पहले गया में ऑनलाइन पिंडदान और पिंडदान के नाम पर चलाए जा रहे टूरिज्म पैकेज को लेकर विवाद तेज हो गया है। गयापाल समाज और 14 सैयां गयापाल समिति ने बुधवार को विष्णुपद मंदिर में प्रेस वार्ता कर ऑनलाइन पिंडदान और निजी पैकेज का विरोध किया। पंडा समाज का कहना है कि गया में पिंडदान सनातन परंपरा और शास्त्रीय विधि के अनुसार किया जाता है। इसमें श्रद्धालु की स्वयं मौजूदगी को महत्वपूर्ण बताया गया है। समाज ने ऑनलाइन माध्यम से कराए जा रहे पिंडदान की धार्मिक मान्यता पर सवाल उठाते हुए श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने की अपील की है।

25 से 51 हजार रुपये तक के पैकेज पर सवाल

पंडा समाज ने पिंडदान के नाम पर चलाए जा रहे कथित 25 हजार से 51 हजार रुपये तक के टूरिज्म पैकेज पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि धार्मिक कर्मकांड को केवल व्यावसायिक पैकेज के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए। समाज के प्रतिनिधियों ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे ऑनलाइन पिंडदान और निजी पैकेज के नाम पर होने वाली संभावित ठगी से सावधान रहें और किसी भी सेवा को लेने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करें।

कोर्ट जाने की चेतावनी

पंडा समाज ने कहा कि यदि ऑनलाइन पिंडदान और पिंडदान के नाम पर चल रहे निजी पैकेज की व्यवस्था पर रोक नहीं लगाई गई, तो जरूरत पड़ने पर कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा। प्रेस वार्ता में पंडा समाज के प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि पितृपक्ष के दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गया पहुंचते हैं। ऐसे में धार्मिक अनुष्ठानों के नाम पर गलत जानकारी या अनधिकृत सेवाओं से श्रद्धालुओं को बचाने के लिए जागरूकता जरूरी है।

क्या कहा पंडा समाज ने ?

14 सैयां पंडा समाज के अध्यक्ष गजाधर लाल कटियार और गयापाल पंडा समाज के राजन सिजुवार ने एक संयुक्त बयान में कहा कि ऑनलाइन पिंडदान समाज और परंपरा के विरुद्ध है। इससे पिंडदान की परंपरा अधूरी ही रहेगी। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि पितृपक्ष मेला शुरू होने से पहले उठा यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित विभाग ऑनलाइन पिंडदान तथा निजी टूरिज्म पैकेज को लेकर क्या कदम उठाते हैं।