पटना, 17 सितंबर। नालंदा के नवजीवन शिशु अस्पताल से नवजात के संदिग्ध परिस्थितियों में गायब होने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति सुनील दत्ता मिश्रा की खंडपीठ ने बिहार थाना के थानाध्यक्ष सम्राट दीपक को मामले की विशेष जांच टीम (SIT) से हटाने और तत्काल जिले से बाहर तबादला करने का आदेश दिया।
एफआईआर में देरी पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह बात आई कि नवजात के गायब होने की शिकायत के बाद एफआईआर दर्ज करने में करीब दो महीने की देरी हुई। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर कार्रवाई की बात कही। अदालत ने कहा कि बच्चे के गायब होने जैसे मामलों में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है और पुलिस को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
SIT में नया अधिकारी शामिल करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि मौजूदा थानाध्यक्ष को जांच से हटाकर उनकी जगह निष्पक्ष और सक्षम अधिकारी को SIT में शामिल किया जाए। नालंदा के एसपी हृदय कांत सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद थे और उन्होंने कोर्ट के निर्देश के अनुरूप कार्रवाई का भरोसा दिया।
पिता ने पुलिस पर धमकी देने का लगाया आरोप
सुनवाई के दौरान नवजात के पिता अविनाश कुमार और उनके भाई से भी अदालत ने बातचीत की। पिता ने आरोप लगाया कि एफआईआर दर्ज कराने में परेशानी हुई और DNA जांच की प्रक्रिया के दौरान एक पुलिस अधिकारी ने उन्हें केस वापस लेने का दबाव दिया। इन आरोपों की जांच का निर्देश भी सामने आया है।
बिहार में हर साल 14,500 से अधिक बच्चे लापता
मामले की सुनवाई के दौरान बिहार में हर साल 14,500 से अधिक बच्चों के लापता होने का आंकड़ा भी अदालत के सामने रखा गया। यह आंकड़ा राज्य में बच्चों की सुरक्षा और उनकी तलाश से जुड़े तंत्र पर गंभीर ध्यान की जरूरत को रेखांकित करता है।
मानव तस्करी के मामलों में तुरंत कार्रवाई पर जोर
अदालत ने अपहरण और मानव तस्करी जैसे मामलों में तत्काल एफआईआर और जांच शुरू करने की जरूरत पर जोर दिया। अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 को होगी। तब तक पुलिस और प्रशासन को अदालत के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करनी होगी।




