पटना: नेपाल के पहाड़ी इलाकों में एक बार फिर प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है। रविवार सुबह नेपाल के गोरखा जिले में बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ से कई इलाके प्रभावित हुए। तेज बहाव में घर, पुल और 341 मेगावाट की बूढ़ी गंडकी हाइड्रोपावर परियोजना का निर्माण कैंप बह गया। कई मशीनें भी पानी में समा गईं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस घटना के बाद चार लोग लापता हैं, जिनकी तलाश में बचाव दल जुटे हैं।
नेपाल में आई इस बाढ़ के बाद बिहार में भी संभावित असर को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसकी वजह नेपाल से भारत की ओर आने वाली नदियों का जुड़ा हुआ जलप्रवाह है। हालांकि, बिहार में बाढ़ का खतरा कितना बढ़ेगा, इसे लेकर फिलहाल कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। स्थिति का आकलन नदी के जलस्तर, पानी की मात्रा और प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों के आधार पर ही किया जा सकता है।
नेपाल में सुबह-सुबह मची अफरा-तफरी, घर और पुल बहे
नेपाल के गोरखा जिले में रविवार सुबह करीब चार बजे बाढ़ का पानी अचानक बस्तियों में घुस गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा। कई जगहों पर नदी का पानी अपने साथ मकान, पुल और निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली मशीनें बहाकर ले गया।
बाढ़ से प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन किया जा रहा है। वहीं, लापता लोगों की तलाश के लिए बचाव अभियान जारी है। अचानक आए तेज बहाव ने स्थानीय लोगों के बीच दहशत पैदा कर दी है।
भूस्खलन से रुका नदी का रास्ता, फिर अचानक आया तेज बहाव
शुरुआती जानकारी के अनुसार, ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाके में भूस्खलन के कारण चुन्चुब्री स्यारी नदी का रास्ता अवरुद्ध हो गया था। इससे पानी एक स्थान पर जमा होने लगा। पानी का दबाव बढ़ने के बाद रुकावट टूट गई और पानी तेजी से नीचे की ओर बहने लगा।
इस तरह की घटनाओं में पहाड़ से आने वाला पानी अपने साथ मिट्टी, पत्थर, पेड़ और मलबा भी बहाकर लाता है। इससे नदी के आसपास बसे गांवों, सड़कों, पुलों और अन्य निर्माणों को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
ऐसी स्थिति में प्रभावित क्षेत्र में उसी समय बारिश होना जरूरी नहीं है। ऊपरी इलाके में भूस्खलन से नदी का रास्ता बंद होने और बाद में रुकावट टूटने से भी अचानक बाढ़ आ सकती है।
SMS अलर्ट भेजकर लोगों को किया गया सतर्क
बाढ़ के खतरे को देखते हुए नेपाल प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
गोरखा जिला पुलिस कार्यालय के इंस्पेक्टर आकाश कंडेल के मुताबिक, सिरदिबास और धारचे ग्रामीण नगरपालिका के खोर्लाबेसी, माछाखोला, सोती, अरखेत और आरुघाट में रहने वाले लोगों को अलर्ट किया गया है।
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुख्य कार्यकारी डॉ. धर्मराज उप्रेती के अनुसार, ऊपरी इलाके से बाढ़ का पानी आरुघाट पहुंचने में करीब तीन घंटे लगते हैं। इस समय का इस्तेमाल निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए किया जा सकता है।
प्रशासन ने SMS के जरिए भी चेतावनी भेजी है। सिरदिबास, जगत, यारी, तातोपानी, सोती और अरुखोला जैसे नदी किनारे बसे इलाकों के लोगों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
नेपाल की बाढ़ का बिहार पर कैसे पड़ सकता है असर?
बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ के बाद बिहार में संभावित असर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसे समझने के लिए नेपाल से भारत की ओर आने वाली नदियों के प्रवाह को जानना जरूरी है।
बूढ़ी गंडकी आगे त्रिशूली नदी से मिलती है। इसके बाद पानी देवघाट के पास नारायणी नदी के प्रवाह में शामिल होता है। नारायणी नदी भारत में गंडक के नाम से प्रवेश करती है और आगे गंगा में मिल जाती है।
ऐसे में यदि बाढ़ के पानी की बड़ी मात्रा निचले इलाकों की ओर बढ़ती है और नदी के प्रवाह में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, तो गंडक नदी के जलस्तर पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव पानी की मात्रा, बहाव की गति, नदी की मौजूदा स्थिति और अन्य जलप्रवाहों पर निर्भर करेगा।
बिहार के किन जिलों पर रखनी होगी नजर?
नेपाल में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बिहार में गंडक नदी के आसपास के इलाकों में जलस्तर की निगरानी महत्वपूर्ण है। इनमें मुख्य रूप से पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और वैशाली जैसे जिले शामिल हैं।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बूढ़ी गंडकी में आई बाढ़ का बिहार में जलस्तर पर कितना असर पड़ेगा। केवल नेपाल में बाढ़ आने के आधार पर बिहार के इन जिलों में बाढ़ आने की पुष्टि नहीं की जा सकती।
लोगों को सलाह दी जाती है कि वे बिहार के जल संसाधन विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें। नदी के किनारे रहने वाले लोगों को चेतावनी मिलने पर प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
अगस्त की बाढ़ की तबाही से अभी नहीं उबरा नेपाल
नेपाल के पहाड़ी इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं पहले भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा चुकी हैं। खबर में उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र में आई बाढ़ ने भी भारी तबाही मचाई थी। इस आपदा में घरों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा था।
नेपाल सरकार की पांच अक्टूबर की जानकारी के अनुसार, उस आपदा में 1,400 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और हजारों लोग लापता बताए गए थे। करीब 13,795 लोगों को बचाया गया था, जबकि 12 हाइड्रोपावर परियोजनाएं भी प्रभावित हुई थीं।
इन आंकड़ों और पिछली आपदा के विवरण को प्रकाशित करने से पहले नेपाल सरकार या संबंधित आधिकारिक एजेंसी के मूल बयान से सत्यापित करना जरूरी है।
फिलहाल राहत और बचाव अभियान पर नजर
बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ ने एक बार फिर नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ के खतरे को उजागर किया है। फिलहाल नेपाल में लापता लोगों की तलाश, नुकसान का आकलन और प्रभावित आबादी को सुरक्षित रखने की चुनौती है।
दूसरी ओर, बिहार में संभावित प्रभाव को लेकर नदी के जलस्तर और प्रशासनिक अलर्ट पर नजर रखना जरूरी होगा। आने वाले समय में आधिकारिक आंकड़ों से ही स्पष्ट हो सकेगा कि नेपाल में आई इस बाढ़ का गंडक नदी और बिहार के निचले इलाकों पर कितना असर पड़ता है।




