पटना: नेपाल में पर्यटक वीजा पर रहकर कथित तौर पर धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में 24 दक्षिण कोरियाई नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। मामला सामने आने के बाद भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े कथित संपर्कों की भी जांच की चर्चा हो रही है। नेपाल के मोरंग जिला प्रशासन ने सभी 24 विदेशी नागरिकों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए काठमांडू स्थित अध्यागमन विभाग को सौंप दिया है।
प्रशासन के मुताबिक, संबंधित नागरिक पर्यटक वीजा पर नेपाल आए थे। उन पर वीजा की शर्तों के विपरीत धार्मिक कक्षाओं, प्रशिक्षण और प्रचार संबंधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।
नेपाल के सुन्दरहरैंचा में हुई कार्रवाई
मोरंग के सहायक प्रमुख जिला अधिकारी पवनराज कोइराला के अनुसार, सुन्दरहरैंचा नगरपालिका-7 स्थित नेपाल न्यू कोभेनेन्ट कॉलेज में धार्मिक अध्यापन, प्रशिक्षण और दीक्षांत समारोह के नाम पर गतिविधियां संचालित होने की सूचना मिली थी।
इसके बाद जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने संबंधित संस्थान की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई। जांच के दौरान कथित वीजा उल्लंघन का मामला सामने आने पर 24 दक्षिण कोरियाई नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
मोरंग जिला प्रशासन ने सभी आरोपियों को आगे की जांच और संभावित निष्कासन संबंधी प्रक्रिया के लिए अध्यागमन विभाग भेज दिया है।
‘लभ नेपाल मिशन’ के अध्यक्ष भी गिरफ्तार
गिरफ्तार किए गए लोगों में ‘लभ नेपाल मिशन’ के अध्यक्ष डॉ. पार्क गुइ ह्वान भी शामिल बताए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह संस्था ‘रत्न बाप्टिस फाउंडेशन’ नामक गुठी के तहत संचालित होती है।
संस्थान में धर्मशास्त्र से जुड़े सर्टिफिकेट, स्नातक, परास्नातक और पीएचडी स्तर तक के पाठ्यक्रम चलाए जाने का दावा किया गया है। यहां 300 से अधिक विद्यार्थियों के अध्ययनरत होने की जानकारी भी सामने आई है।
इसके अलावा, करीब 45 जरूरतमंद विद्यार्थियों को छात्रावास में रखकर धार्मिक शिक्षा दिए जाने की बात कही गई है। संस्था को दक्षिण कोरिया स्थित ‘लभ नेपाल मिशन’ से आर्थिक सहयोग मिलने की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है।
हालांकि, संस्थान की गतिविधियों और उससे जुड़े लोगों की भूमिका को लेकर सामने आए दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों से कथित संपर्कों की जांच
इस मामले में भारत-नेपाल सीमा से जुड़े कुछ कथित संपर्कों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे हैं। नेपाल पुलिस के अपराध अनुसंधान से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि सीमावर्ती भारतीय क्षेत्रों के कुछ लोगों से संबंधित जानकारियों की जांच की जरूरत है।
दावे के मुताबिक, एक स्थानीय व्यक्ति के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों के दलित और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को नेपाल ले जाने की बात सामने आई है।
हालांकि, इस कथित नेटवर्क, संबंधित लोगों और उनकी भूमिका को लेकर स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि स्पष्ट नहीं है। इसलिए इन दावों को जांच के दायरे में आई जानकारी के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। किसी व्यक्ति या संस्था की संलिप्तता जांच में प्रमाणित होने के बाद ही कोई ठोस निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
अध्यागमन विभाग करेगा आगे की कानूनी कार्रवाई
मोरंग जिला प्रशासन के अनुसार, सभी 24 दक्षिण कोरियाई नागरिकों को विदेशी नागरिक अनुगमन निर्देशिका, 2075 के प्रावधानों के तहत आगे की जांच के लिए काठमांडू स्थित अध्यागमन विभाग भेजा गया है।
अब संबंधित विभाग वीजा नियमों के कथित उल्लंघन, संस्थान की गतिविधियों और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच करेगा। जांच के निष्कर्षों और लागू कानूनों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई या संभावित निष्कासन पर निर्णय लिया जा सकता है।
फिलहाल मामले में आरोपों और कथित संपर्कों की जांच जारी है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति या संस्था की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही निकाला जाना चाहिए।




