पटना, 10 सितंबर 2026 : बिहार की सियासत में NDA के भीतर समीकरणों को लेकर चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं। बीते कुछ हफ्तों में JDU की ओर से उठाए गए कदमों को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या JDU अब BJP के साथ सत्ता में अपनी हिस्सेदारी को नए सिरे से तय करने की रणनीति पर काम कर रही है ? या फिर कुछ नया हो रहा है। हालांकि इन घटनाक्रमों से JDU और BJP के बीच किसी संभावित टकराव या भविष्य के गठबंधन में बदलाव की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। मगर पार्टी की गतिविधियों और नेताओं के बयानों ने बिहार की राजनीति में चर्चा जरूर बढ़ा दी है।

JDU के 4 कदमों से क्यों बढ़ी राजनीतिक चर्चा?

गंगा जल संधि पर JDU का आक्रामक रुख

बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि को लेकर JDU ने बिहार के हितों का मुद्दा जोर-शोर से उठाना शुरू किया है। JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने पांच सितंबर से नीतीश संवाद कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम के तहत संजय झा 12 जिलों में जाकर पार्टी कार्यकर्ताओं और लोगों के बीच गंगा जल संधि को लेकर JDU का पक्ष रख रहे हैं। इनमें बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार शामिल हैं। बेगूसराय में आठ सितंबर को संजय झा ने कहा कि सत्ता रहे या न रहे, JDU बिहार के हित की बात नहीं छोड़ेगी। स्रोत में राजनीतिक विश्लेषक प्रियदर्शी रंजन ने इसे JDU के लिए बिहार-केंद्रित राजनीतिक मुद्दा बनाने की रणनीति के तौर पर देखा है।

JDU की गंगा जल संधि पर 4 प्रमुख मांगें

JDU की ओर से लीन पीरियड में 1500 क्यूमेक पानी छोड़ने की बाध्यता खत्म करने, बिहार में पानी का इस्तेमाल औद्योगिक विकास, पेयजल और सिंचाई के लिए करने, फरक्का बराज से जुड़े सिल्ट और बाढ़-कटाव के मुद्दे पर सभी दलों को साथ आने तथा भविष्य की संधि में 2050 तक बिहार की जल जरूरतों को ध्यान में रखने की मांग बताई गई है।

विधान परिषद सभापति की कुर्सी पर JDU का दावा

दूसरा बड़ा संकेत बिहार विधान परिषद के सभापति पद को लेकर सामने आया है। स्रोत के मुताबिक, JDU ने BJP से सभापति का पद अपने खाते में देने की मांग की है। फिलहाल बिहार विधान परिषद के सभापति BJP के MLC अवधेश नारायण सिंह हैं। रिपोर्ट के अनुसार JDU का तर्क है कि विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद सभापति दोनों संवैधानिक पद BJP के पास हैं, इसलिए इनमें से एक पद JDU को मिलना चाहिए। इसी बीच अगस्त के अंतिम सप्ताह में अवधेश नारायण सिंह के दिल्ली जाकर गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इस मुलाकात को JDU की मांग से जोड़ने की कोई आधिकारिक पुष्टि स्रोत में नहीं है।

निशांत कुमार की सियासी ब्रांडिंग ?

तीसरा संकेत JDU के भीतर निशांत कुमार की बढ़ती राजनीतिक मौजूदगी से जुड़ा है। 22 अगस्त को स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के मंत्री के तौर पर 100 दिन पूरे होने पर JDU कार्यालय में कार्यक्रम आयोजित किया गया। पार्टी नेताओं ने उनके कामकाज की रिपोर्ट पेश की और सोशल मीडिया के जरिए भी उपलब्धियां बताई गईं। रिपोर्ट में इसे किसी मंत्री के 100 दिन पूरे होने पर JDU की ओर से किए गए अलग तरह के कार्यक्रम के रूप में बताया गया है। संजय झा के 8 सितंबर के बयान ने इस चर्चा को और हवा दी। उन्होंने कहा कि निशांत कुमार अभी मंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं और आगे संगठन की जिम्मेदारी संभालेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आगे निशांत बिहार भर में घूमेंगे।

सम्राट से निशांत तक बदला उत्तराधिकारी का नैरेटिव ?

चौथा और सबसे अहम राजनीतिक संकेत JDU के नेताओं के बयानों से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 22 अगस्त को मंत्री मदन सहनी ने निशांत कुमार को नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत संभालने में सक्षम बताया। 24 अगस्त को मंत्री श्रवण कुमार ने भी निशांत को JDU का भविष्य बताया। इसी दिन JDU नेता अशोक चौधरी ने भी कहा कि नीतीश कुमार की विरासत निशांत कुमार संभालेंगे।वहीं, इससे पहले 16 मई को केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा था कि नीतीश कुमार ने खुद सम्राट चौधरी को अपना उत्तराधिकारी तय किया था और उन्हें आशीर्वाद दिया था। यही विरोधाभासी राजनीतिक संदेश अब चर्चा का बड़ा कारण बन रहा है।

सम्राट चौधरी के बयान से बढ़ी सियासी चर्चा

इन घटनाक्रमों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का आठ सितंबर का इंटरव्यू भी चर्चा में है। सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार के संबंध NDA से हैं, मगर BJP का सीएम कौन होगा, इसका फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि BJP का नेता कौन होगा, यह BJP का आंतरिक मामला है। उन्होंने नीतीश कुमार या किसी सहयोगी दल के कहने पर सीएम बनाए जाने की बात को खारिज किया। हालांकि नीतीश कुमार के आशीर्वाद को स्वीकार किया।

क्या सच में NDA में सब ठीक नहीं ?

JDU की गंगा जल संधि पर सक्रियता, विधान परिषद सभापति पद की कथित मांग, निशांत कुमार की राजनीतिक ब्रांडिंग और उत्तराधिकारी को लेकर पार्टी नेताओं के बदलते बयानों ने बिहार NDA के भीतर समीकरणों पर चर्चा जरूर बढ़ा दी है। मगर इन घटनाओं को सीधे BJP-JDU गठबंधन में दरार या किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत मानना अभी जल्दबाजी होगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी से इतना जरूर साफ है कि JDU अपने राजनीतिक एजेंडे और भविष्य के नेतृत्व को लेकर सार्वजनिक रूप से अधिक सक्रिय दिखाई दे रही है।