मुजफ्फरपुर, 30 अगस्त। उत्तर बिहार में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ी परियोजना सामने आई है। भगवानपुर-कर्पूरीग्राम वाया महुआ-ताजपुर करीब 60 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाने की योजना को मंजूरी मिली है। इस परियोजना पर अनुमानित 1692 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मंजूरी के बाद अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
महुआ समेत कई इलाकों को मिलेगा सीधा रेल संपर्क
नई रेल लाइन बनने से महुआ समेत वैशाली और समस्तीपुर के कई इलाकों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। यह नया रेल कॉरिडोर मुजफ्फरपुर-हाजीपुर रेल मार्ग के लिए वैकल्पिक संपर्क भी उपलब्ध कराएगा।
परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र के यात्रियों को आने-जाने के लिए नया रेल विकल्प मिलेगा और कई इलाकों की दूरी कम हो सकती है।
मुजफ्फरपुर होकर जाने की जरूरत होगी कम
नई लाइन के बनने के बाद हाजीपुर की ओर से आने वाली ट्रेनें भगवानपुर से महुआ और ताजपुर होते हुए सीधे कर्पूरीग्राम जा सकेंगी। इसके लिए उन्हें मुजफ्फरपुर होकर जाने की जरूरत नहीं होगी।
वहीं मुजफ्फरपुर की ओर से भी भगवानपुर के रास्ते महुआ तक रेल संपर्क विकसित होगा। भविष्य में भगवानपुर स्टेशन को जंक्शन के रूप में विकसित करने की योजना बताई गई है।
पांच नए स्टेशन और सात बड़े पुल बनेंगे
करीब 60 किलोमीटर लंबे इस रेल रूट पर यात्री सुविधाओं और सुरक्षित आवागमन के लिए कई निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं। महुआ जलालपुर, मुकंदपुर, सुल्तानपुर हक, हरिहर और ताजपुर में पांच नए स्टेशन बनाए जाएंगे।
इसके अलावा भगवानपुर और कर्पूरीग्राम स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। रेल लाइन पर सात बड़े पुल और सड़क यातायात के लिए 51 अंडरपास बनाने की योजना है। ताजपुर में एनएच-28 को पार करने के लिए रोड ओवरब्रिज भी प्रस्तावित है। पूरे रूट पर रेल गुमटी नहीं रखने की योजना है।
किसानों और कारोबारियों को भी फायदा
नई रेल लाइन का असर स्थानीय कृषि और कारोबार पर भी पड़ सकता है। ताजपुर, मोरवा, सरायरंजन, गोरौल और सराय जैसे क्षेत्रों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है।
ताजपुर सब्जी मंडी के पास स्टेशन बनने से किसानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक भेजने में सुविधा मिल सकती है। इससे सड़क परिवहन पर निर्भरता और माल ढुलाई की लागत कम होने की संभावना है।
80 KM की जगह करीब 60 KM का सफर
फिलहाल भगवानपुर से मुजफ्फरपुर होकर कर्पूरीग्राम जाने में करीब 80 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। नई रेल लाइन बनने के बाद यह दूरी करीब 60 किलोमीटर रह जाएगी। यानी लगभग 20 किलोमीटर की दूरी कम होगी। साथ ही सड़क मार्ग पर मालवाहक वाहनों का दबाव घटने की उम्मीद है।




