पटना, 21 सितंबर 2026 : बिहार की राजनीति में इन दिनों स्वास्थ्य मंत्री और JDU नेता निशांत कुमार की भूमिका को लेकर काफी चर्चा हो रही है। 18 सितंबर को JDU के विधायकों और विधान पार्षदों के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग सामने आने के बाद से ही राजनीतिक हलकों में उनके भविष्य को लेकर अटकलें बढ़ गई हैं। निशांत कुमार, पूर्व मुख्यमंत्री और JDU के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार के एकलौते बेटे हैं। नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद अप्रैल 2026 में सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री बने, जबकि मई में निशांत कुमार को स्वास्थ्य मंत्री के रूप में राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। हाल के महीनों में JDU के कार्यक्रमों में निशांत कुमार की सक्रियता भी बढ़ी है। 18 सितंबर के कार्यक्रम में उन्होंने पार्टी की विचारधारा और नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की बात कही। इस घटनाक्रम को कुछ राजनीतिक विश्लेषक JDU में भविष्य के नेतृत्व को लेकर महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देख रहे हैं।

निशांत को CM बनाने की मांग से फिर गरम हुई सियासत

18 सितंबर को JDU के कार्यक्रम में विधायक मंजीत सिंह की ओर से निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग रखी गई। इसके बाद पार्टी के भीतर उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा और तेज हो गई। इससे पहले भी JDU के कुछ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से निशांत को नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत से जोड़कर बयान दिए हैं। अगस्त में उनके 100 दिन के मंत्री कार्यकाल के दौरान भी JDU नेताओं की ओर से निशांत की भूमिका और भविष्य को लेकर बयान सामने आए थे। हालांकि, इन बयानों से यह निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी कि JDU ने निशांत कुमार को मुख्यमंत्री पद का आधिकारिक चेहरा घोषित कर दिया है।

JDU में निशांत की भूमिका क्यों बढ़ रही है ?

निशांत कुमार के सक्रिय होने के साथ JDU की संगठनात्मक गतिविधियों में भी उनका सार्वजनिक प्रोफाइल बढ़ा है। पार्टी के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी और संबोधन इसी दिशा में देखा जा रहा है। इस कार्यक्रम में विधायी कामकाज, सदन की प्रक्रिया, बजट और समितियों से जुड़े विषयों पर भी विधायकों को प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया गया। निशांत ने पार्टी कार्यकर्ताओं से क्षेत्र में सक्रिय रहने और सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने की बात कही।

क्या BJP निशांत को CM बनने देगी ?

यह सवाल अभी राजनीतिक अटकलों के दायरे में है। फिलहाल बिहार में भाजपा और जदयू एनडीए सरकार में साथ हैं और सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री हैं। निशांत कुमार के मुख्यमंत्री बनने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा या समय सीमा सामने तो नहीं आई है। मगर भाजपा-जदयू संबंधों में सत्ता का संतुलन भविष्य में किस तरह बदलता है, यह कई राजनीतिक और चुनावी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। महाराष्ट्र जैसे दूसरे राज्यों के पुराने गठबंधन उदाहरणों को बिहार की मौजूदा स्थिति से सीधे जोड़कर भविष्य का निश्चित निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगा, मगर दबाव की राजनीति दिख रही है।

बिना BJP के JDU के पास क्या विकल्प होंगे ?

243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 122 है। 2025 विधानसभा चुनाव में BJP को 89, JDU को 85 और RJD को 25 सीटें मिली थीं। कांग्रेस के पास 6, AIMIM के 5, HAM(S) के 5, RLM के 4 और IIP के 1 विधायक हैं। इस लिहाज से सरकार बनाने के किसी भी वैकल्पिक समीकरण में केवल JDU और RJD की संख्या पर्याप्त नहीं होगी। दूसरे दलों और विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। लेकिन विधानसभा में मौजूदा संख्या को देखते हुए किसी संभावित राजनीतिक बदलाव को अभी केवल संभावित समीकरण के रूप में ही देखा जा सकता है। किसी दल के समर्थन या पाला बदलने की पुष्टि के बिना ऐसे समीकरण को संभावित सरकार के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

निशांत के सामने क्या चुनौतियां होंगी ?

अगर भविष्य में निशांत कुमार JDU के प्रमुख राजनीतिक चेहरे के रूप में आगे बढ़ते हैं, तो उनके सामने कई राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौतियां होंगी।

1. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ समन्वय

JDU में लंबे समय से सक्रिय वरिष्ठ नेताओं के साथ समन्वय बनाए रखना उनके लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होगा। संगठन में अलग-अलग नेताओं और सामाजिक समूहों के बीच संतुलन JDU की राजनीति का अहम हिस्सा रहा है।

2. संगठन को मजबूत करना

निशांत कुमार को केवल मंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि संगठन और चुनावी राजनीति में भी अपनी भूमिका स्थापित करनी होगी। बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इसके साथ कार्यकर्ताओं में जोश और एकता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।

3. नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत

निशांत कुमार के सामने सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यह होगा कि वे पूर्व सीएम नीतीश कुमार की विरासत को किस तरह आगे बढ़ाते हैं। JDU के लिए सामाजिक समीकरण, संगठन और गठबंधन राजनीति तीनों काफी महत्वपूर्ण रहेंगे।

क्या 2030 में निशांत बन सकते हैं CM ?

फिलहाल तो ऐसा कुछ समीकरण बनते नहीं दिख रहा है। 2030 में मुख्यमंत्री पद की संभावित तस्वीर उस समय JDU की ताकत, NDA के भीतर सीटों और सत्ता-साझेदारी, विपक्षी दलों की स्थिति और निशांत कुमार की अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता पर निर्भर करेगी। अभी उपलब्ध तथ्यों से इतना जरूर कहा जा सकता है कि निशांत कुमार JDU के भीतर तेजी से दिखाई देने वाले राजनीतिक चेहरों में शामिल हो रहे हैं, मगर उन्हें सीएम पद का आधिकारिक उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया गया है। इसलिए फिलहाल सवाल यह नहीं है कि निशांत कुमार निश्चित रूप से मुख्यमंत्री बनेंगे या नहीं, बल्कि यह है कि आने वाले वर्षों में JDU उन्हें किस भूमिका में आगे बढ़ाती है और NDA की राजनीति में उनकी स्थिति क्या बनती है।