भोजपुर, 10 सितंबर 2026। भोजपुरी फिल्म स्टार और बीजेपी एमएलसी पवन सिंह से जुड़े तलाक और गुजारा भत्ता मामले में बलिया की पारिवारिक अदालत ने एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। बुधवार को ज्योति सिंह की मेंटेनेंस पिटिशन पर सुनवाई के दौरान पवन सिंह को अपना बयान दर्ज कराने के लिए अदालत में पेश होना था, मगर वह कोर्ट नहीं पहुंच सके। पवन सिंह के अधिवक्ता हरिवंश सिंह के मुताबिक, पटना में बाढ़ की स्थिति के कारण पवन सिंह अदालत में उपस्थित नहीं हो पाए। उनकी ओर से सुनवाई स्थगित करने के लिए प्रार्थना पत्र भी दिया गया था। इसके बावजूद अदालत ने अनुपस्थित रहने पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तारीख तय की है।

ज्योति सिंह भी कोर्ट पहुंचीं

ज्योति सिंह अपने अधिवक्ता के साथ बुधवार को अदालत पहुंचीं। उनके वकील ने कहा कि पवन सिंह इससे पहले भी 11 अगस्त को अपना पक्ष रखने के लिए अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे। इस मामले में अदालत में पवन सिंह का बयान दर्ज किया जाना था।

क्या है पवन सिंह और ज्योति सिंह का तलाक विवाद ?

ज्योति सिंह, पवन सिंह की दूसरी पत्नी हैं। जानकारी के मुताबिक दोनों ने मार्च 2018 में बलिया में शादी की थी। शादी के कुछ समय बाद दोनों के रिश्तों में विवाद की खबरें सामने आने लगीं। ज्योति सिंह ने पवन सिंह पर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न समेत कई आरोप लगाए हैं। उन्होंने दो बार गर्भपात करवाने का आरोप लगाया था। पवन सिंह ने इन आरोपों को खारिज किया है। अप्रैल 2022 में ज्योति सिंह ने तलाक के लिए अर्जी दाखिल की थी। इसके बाद पवन सिंह की ओर से आरा फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल किए जाने की बात सामने आई। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भोजपुरी फिल्म स्टार पवन सिंह के काराकाट से निर्दलीय चुनाव लड़ने के समय ज्योति सिंह ने उनके लिए प्रचार भी किया था। उस दौरान दोनों के रिश्तों में सुलह की चर्चाएं हुईं, लेकिन बाद में फिर अलगाव की खबरें सामने आ गईं।

ज्योति सिंह ने मांगी 10 करोड़ रुपये की एलिमनी

ज्योति सिंह की ओर से अदालत में 10 करोड़ रुपये और एक मकान गुजारा भत्ता के तौर पर मांगने की बात सामने आई है। ज्योति सिंह के वकील के मुताबिक, उन्होंने अदालत से कहा है कि यदि पवन सिंह उन्हें साथ नहीं रखना चाहते हैं, तो उन्हें गुजारा भत्ते के तौर पर 10 करोड़ रुपये और एक मकान दिया जाए। हालांकि, एलिमनी की अंतिम राशि अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगी।

क्या होती है एलिमनी ?

एलिमनी या गुजारा भत्ता वह आर्थिक सहायता है, जो वैवाहिक विवाद या तलाक की स्थिति में अदालत के आदेश के अनुसार एक पक्ष को दूसरे पक्ष से मिल सकती है। हिंदू मैरिज एक्ट के तहत परिस्थितियों के आधार पर अंतरिम गुजारा भत्ता और स्थायी गुजारा भत्ता जैसे प्रावधान लागू हो सकते हैं। इसकी राशि तय करते समय अदालत संबंधित पक्षों की आय, संपत्ति, जरूरतों और अन्य परिस्थितियों पर विचार करती है।

अब पांच अक्टूबर को होगी सुनवाई

फिलहाल अदालत ने पवन सिंह की गैरहाजिरी पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है और अगली सुनवाई पांच अक्टूबर को निर्धारित की है। इस मामले में आगे की कार्यवाही और गुजारा भत्ते से जुड़ा फैसला अदालत की सुनवाई के बाद स्पष्ट होगा।